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गोधरा कांडः गुलबर्ग सोसाइटी नरसंहार पर विशेष अदालत का फैसला 2 जून को
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Wed, 25 May 2016 06:13 PM IST
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गुलबर्ग सोसायटी नरसंहार में पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी सहित 69 लोग मारे गए थे
- फोटो : indiaExpress
गुलबर्ग सोसायटी नरसंहार में पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी सहित 69 लोग मारे गए थे, इसी मामले में 2 जून को एक विशेष अदालत अपना फैसला सुनाएगी। फैसले का इंतजार सितंबर 2015 से
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कोर्ट के ट्रायल पूरे होने के बाद से हो रहा है।
28 फरवरी 2002 को गुजरात के गोधरा में हुए नरसंहार में 66 लोगों को आरोपी बनाया गया है। यह दंगे उस वक्त हुए थे जब साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन को गोधरा रेलवे स्टेशन पर कुछ उग्रवादियों ने
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जला दिया था जिसमें 59 लोग मारे गए थे। 2009 में शुरू हुए कोर्ट ट्रायल से अब तक 4 आरोपियों की मौत हो चुकी है।
आरोपियों में से एक बिपिन पटेल, असर्वा से बीजेपी पार्षद है, विपिन ने पिछले साल दिसम्बर में अहमदाबाद नगर निगम चुनाव जीता था। यह उसकी भाजपा के टिकट पर लगातार चौथी जीत है।
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विपिन उस वक्त भी पार्षद था जब 2002 में दंगे सोसाइटी में भड़के हुए थे।
विशेष जांच दल (एसआईटी) ने कहना है कि ट्रेन जलने की घटना के एक दिन बाद लगभग 20 हजार से 22 हजार लोगों की भीड़ गुलबर्ग सोसाइटी में एकत्रित हुई थी। गुलबर्ग सोसाइटी मघानीनगर का पॅाश मुस्लिम इलाका है। भीड़ काफी उग्र थी, उस घटना में 69 लोगो मारे गए थे।
एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट 24 गवाहों व आरोपियों की मेडिकल रिपोर्ट व घटना स्थल पर पाए गए साक्ष्यों के आधार पर तैयार की थी। एसआईटी के मुताबिक घटना स्थल पर पाए घातक हथियार, तलवार, लाठी, केरोसिन और पेट्रोल से सोबित होता है कि बहुत से लोग जिंदा जला गए दिए थे।
ट्रायल कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह तर्क दिया गया था कि जले हुए पाए गए शवों के आधार पर यह कहना गलत नहीं होगा कि उन पर बेरहमी से हमला नही हुआ होगा, हो सकता है कि पहले उन पर हमला किया गया हो फिर बाद में उन्हें जिंदा जला दिया हो। अन्य लापता लोगों को मृत मान लिया गया था जबकि जाफरी सहित 39 शव घटनास्थल से बरामद किए गए ।
जाफरी की विधवा पत्नी जाकिया ने कथित तौर पर दंगे करवाने के आरोप में मौजूदा प्रधानमंत्री व उस वक्त के गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर केस फाइल किया था। इस मामले में एसआईटी ने
2012 में मोदी को क्लीन चिट दे दी है।
एसआईटी की इस रिपोर्ट को मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने 2014 में सही करार दिया था। अदालत ने कहा था कि आरोपी के खिलाफ को भी सबूत नही हैं। इसके बाद जाकिया ने हाईकोर्ट में एक पिटीशन दायर की है जो अभी भी लंबित है।
यह मामला उन 9 मामलों में से एक है जिनके लिए खुद सुप्रीम कोर्ट ने अपनी निगरानी में एसआईटी का गठन आगे की जांच के लिए किया था। वो 9 मामले थे नरोदा पाटिया, ओडे (दो मामले), दिपड़ा
दरवाजा, सरदारपुरा, प्रांतिज और गोधरा ट्रेन नरसंहार मामलों में आरोपियों को दोषी ठहकाया जा चुका है, इलके अलावा प्रांतिज केस में बड़ी संख्या में आरोपियों को दोषी ठहराया जा चुका है। नौंवा
मामला नरोदा गांव का है जो अभी भी अंडर ट्रायल है।