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कुश की अयोध्या से मीरबाकी के बाबरी मस्जिद तक, एक नई कहानी कहती है ‘मंदिर वहीं बनायेंगे’

Sun, 02 Dec 2018 11:33 PM IST
अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली Updated Sun, 02 Dec 2018 11:33 PM IST
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A new story of Ayodhya of Kush to the Babri Masjid of Mirbaki
राम मंदिर - फोटो : amar ujala

अयोध्या में राममंदिर निर्माण की कोशिशें हर मंच से जारी हैं। नरेंद्र सहगल की पुस्तक ‘मंदिर वहीं बनायेंगे’ मंदिर निर्माण की अनेक कोशिशों के बीच लोगों को इस मुद्दे के प्रति जागरूक करने की एक कोशिश है। यह कहना है पुस्तक के लेखक नरेंद्र सहगल का। सहगल के मुताबिक़ उनकी पुस्तक अब तक की पुस्तकों से अलग हटकर है और इस विषय पर धार्मिक तथ्यों के साथ सरकार के द्वारा स्वीकार किये जा चुके आंकड़े भी हैं जो विषय की गंभीरता को समझने में मदद करते हैं। नरेंद्र सहगल की पुस्तक सोमवार तीन दिसंबर को विहिप के शीर्ष नेता डॉ सुरेन्द्र जैन के हाथों लोकार्पित हो रही है।

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एक पत्रकार के रूप में जम्मू-कश्मीर में लम्बे अरसे तक काम कर चुके सहगल का कश्मीर और राममंदिर प्रिय विषय है। वे इन विषयों पर अब तक बीस से अधिक पुस्तक लिख चुके हैं। ऐसा होना इसलिए भी उम्मीदों के मुताबिक़ था क्योंकि वे आरएसएस के प्रचारक रह चुके हैं। अपनी पुस्तक ‘मंदिर वहीं बनायेंगे’ के बारे में अमर उजाला से बात करते हुए नरेंद्र सहगल ने कहा कि यह उनकी सिर्फ एक और पुस्तक नहीं है, बल्कि न्यायालय के अब तक के निर्णयों, धार्मिक प्रमाणों और सरकारी दस्तावेजों के संकलन से लेकर यह खुद उनकी अपनी अनुभव यात्रा भी है क्योंकि एक पत्रकार और एक प्रचारक रहते हुए उन्होंने खुद इन मुद्दों को जिया है।

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नरेंद्र सहगल के मुताबिक़ अयोध्या में राममंदिर का निर्माण उनके पुत्र कुश ने करवाया था। लंबे काल में यह क्षीण हो गया था जिसके बाद लगभग डॉ हजार साल पहले उज्जैन नगर के सम्राट विक्रमादित्य ने इसका पुनर्निर्माण कराया था। मंदिर-मस्जिद के विवाद में जब इस जगह की खुदाई हिन्दू-मुस्लिम कारीगरों के हाथ से कराया गया तब इसके हिन्दू मंदिर होने में कोई संदेह ही नहीं रह गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने इसी बात को ध्यान में रखकर फैसला दिया था। लेकिन अपील में जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस पर अब तक अपना फैसला नहीं दिया जो दोनों समुदायों में विवाद की एक जड़ बना। सहगल के मुताबिक़ अगर सर्वोच्च न्यायालय ने समय से इस विवाद पर फैसला दे दिया होता तो न तो यह 2019 के चुनाव का मुद्दा बनता और न ही राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच हिंदुओं की आस्था इस कदर पिसती रहती। 

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