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Hindi News ›   Bihar ›   A man using grafting technique to provide five variety of mango on one tree

एक ही पेड़ पर पांच प्रजातियों के आम, मई से जुलाई तक पकता रहता है फलों का राजा

Sat, 11 Jul 2020 12:49 PM IST
Tanuja Yadav न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: Tanuja Yadav Updated Sat, 11 Jul 2020 12:49 PM IST
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A man using grafting technique to provide five variety of mango on one tree
एक ही पेड़ पर आम की पांच प्रजातियां - फोटो : AMAR UJALA

आप लोग आम खाने के शौकीन होंगे और कई डाल पर चढ़कर आपने आम तोड़े और खाए होंगे लेकिन क्या आपने कभी एक ही पेड़ पर आम की पांच तरह की प्रजातियां देखी हैं। ये सुनने में काफी अजीब लग रहा है लेकिन ये सच है। बिहार की राजधानी पटना में एक शख्स ने आम के पेड़ पर पांच तरह के आम उगाए हैं।

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सातवीं पास भिखारी मेहता ने एक कलम तैयार किया, जिसके बाद दो महीने तक एक ही पेड़ पर पके हुए अलग-अलग आम के प्रकार का मजा लिया जा रहा है। सामान्य आम के पेड़ में 15 दिनों में सभी फल पक जाते हैं लेकिन मेहता की लगाई कलम से आम मई में पकना शुरू होते हैं और जुलाई तक पकते हैं। 
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पटना में आम के शौकीनों ने अपने घरों में इस तरह के पौधे लगाए हुए हैं। बागवानी विशेषज्ञ प्रोफेसर एसके प्रसाद बताते हैं कि शहरी क्षेत्र के लिए ग्राफ्टिंग विधि से तैयार की गई कलम एक तरह का वरदान है। इस कलम से एक या दो पेड़ लगाने पर परिवार के लिए दो से तीन महीने तक पर्याप्त फल मिल जाते हैं।

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मेहता के बाग में लगे एक ही पेड़ में बंबइया, गुलाब खास, कलकतिया, मालदह, दशहरी, चौसा जैसे प्रकार लगे हैं। मई में बंबइया पकने लगता है। इसके बाद गुलाब खास, कलकतिया, आम्रपाली, दूधिया मालदह, दशहरी, चौसा पकता है। सभी प्रकार के पकने का वक्त अलग-अलग होता है।

 

भिखारी मेहता ने जानकारी दी कि अगले साल यही पेड़ दस प्रकार वाले फल देने लगेंगे। इसके लिए ग्राफ्टिंग विधि का इस्तेमाल किया जाता है। सबसे पहले गुठली से बीजू का पौधा तैयार किया जाता है, जो तीन महीने में तीन फीट का हो जाता है। इसके बाद तने के ऊपरी भाग को तोड़ दिया जाता है, इससे उसमें कई शाखाएं निकल जाती हैं।



बार-बार तोड़ने पर शाखाओं की संख्या बढ़ती जाती है। चार माह होने पर सभी शाखाओं में अलग-अलग वेराइटी के पेड़ से इसमें कोपल की ग्राफ्टिंग की जाती है। "वी" शेप में बीजू और दूसरे पेड़ की कोपल को बांध दिया जाता है। एक साल में पौधा तैयार हो जाता है।

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