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Hindi News ›   India News ›   A landmark step in preserving India’s manuscript heritage, Ministry of Culture signed MoUs with 17 centres

Gyan Bharatam: भारत की पांडुलिपि विरासत के संरक्षण में एक ऐतिहासिक कदम, डिजिटलीकरण के लिए केंद्र का समझौता

Sat, 25 Oct 2025 11:14 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Sat, 25 Oct 2025 11:14 PM IST
सार

संस्कृति मंत्रालय ने पांडुलिपि संरक्षण, अभिलेखीकरण और प्रसार को बढ़ावा देने के लिए ज्ञान भारतम पहल के अंतर्गत 17 केंद्रों, 12 समूहों और पांच स्वतंत्र केंद्रों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। इस समारोह में संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल भी उपस्थित थे।

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A landmark step in preserving India’s manuscript heritage, Ministry of Culture signed MoUs with 17 centres
पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण के लिए केंद्र और 17 संस्थानों में समझौता - फोटो : X @MinOfCultureGoI

विस्तार

केंद्र सरकार ने ज्ञान भारतम में पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण के लिए 17 संस्थानों के साथ करार किया है। केंद्रीय पर्यटन व संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि पांच साल में एक करोड़ से अधिक पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और संरक्षण पर काम होगा। देश की इस ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, बहुमूल्य धरोहर को सहेजने में बेशक टाइमलाइन है, लेकिन गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए।
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केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय और 17 संस्थानों में समझौता
पांडुलिपियों के संरक्षण के साथ एक राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी भी बनेगी। बेशक पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण व संरक्षण पर टाइमलाइन है, लेकिन गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए। दिल्ली स्थित राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय में आयोजित कार्यक्रम में पहले चरण के तहत केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय और 17 संस्थानों में समझौता हुआ। इसमें 12 राज्य और पांच संस्थान शामिल हैं। 
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अन्य राज्यों व संस्थान भी अगले चरण में होंगे शामिल
अगले चरण में अन्य राज्यों व संस्थानों को भी शामिल किया जाएगा। इसमें हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयागराज, नागरी प्रचारिणी सभा वाराणसी, अभय जैन ग्रंथालय बीकानेर, सनातन ट्रस्ट तिरुपति, आनंद आश्रम ट्रस्ट पुणे, हिमाचल स्टेट म्यूजियम शिमला, सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ बुद्धिस्ट स्ट्डीज लेह, नक्षत्र वैद्यशाला देवप्रयाग, वृंदावन रिसर्च इंस्टीट्यूट वृंदावन, नव नालंदा महावीर नालंदा, डॉ एसएस गौड़ यूनिवर्सिटी सागर, असम यूनिवर्सिटी सिल्चर, द एस्टेटिक सोसायटी कोलकाता इत्यादि का नाम शामिल है।

यह आयोजन दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित तीन दिवसीय वैश्विक भारतीय पांडुलिपि सम्मेलन के एक महीने से भी ज्यादा समय बाद हुआ है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए थे। समारोह में केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने अपने संबोधन में कहा कि यह सिर्फ एक और गायन समारोह नहीं है, बल्कि मंत्रालय के परिवार के विस्तार की दिशा में एक कदम है, जिसने इस महत्वपूर्ण मिशन को अपने हाथ में लिया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा, 'ज्ञान भारतम सम्मेलन में मैंने कहा था कि यह मिशन हमारी विरासत और भविष्य के बीच एक सेतु का काम करेगा। 2047 तक भारत आर्थिक और सैन्य दृष्टि से सक्षम हो जाएगा, लेकिन जिस गौरवशाली भारत का निर्माण होगा, उसमें सांस्कृतिक विरासत और विशेष रूप से पांडुलिपि विरासत की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।'
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