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दिल्ली से भी चौगुनी बड़ी बर्फ की चट्टान टूटकर समुद्र में पहुंची, जीव-जंतुओं के लिए खतरे की घंटी
Wed, 30 Dec 2020 08:14 AM IST
Tanuja Yadav
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Tanuja Yadav
Updated Wed, 30 Dec 2020 08:14 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
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अंटार्कटिका में मौजूद बर्फ की सबसे बड़ी चट्टान A68 का एक हिस्सा समुद्र में खिसक रहा है। इस हिस्से का आकार 5,800 स्क्वैयर किलोमीटर है और अब ये दक्षिण जॉर्जिया की ओर बढ़ रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर ये आगे ऐसा ही बढ़ता गया तो समुद्री जीवों के लिए बड़ा खतरा हो सकता है।
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जानकारों का कहना है कि ये कोई छोटी-मोटी चट्टान नहीं है बल्कि देश की राजधानी दिल्ली से करीब चौगुनी बड़ी है। इतने बड़े हिमखंड के समुद्र में तैरने पर जीवों और पर्यावरण पर खासा असर देखने को मिल सकता है। इसके अलावा चिंता की बात यह है कि अंटार्कटिका में बर्फ का टूटना पर्यावरण में बदलाव के कारण होता है।
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ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे की माने तो बर्फ का पिघलना एक सामान्य प्रक्रिया है, इसे क्लाइमेट चेंज से नहीं जोड़ा जा सकता। हालांकि कई विशेषज्ञ मानते हैं कि बड़े हिमखंडों का टूटना क्लाइमेट चेंज का नतीजा है। ये बर्फ की चट्टान धीरे-धीरे समुद्र में आगे खिसकती रहती है और तूफान आने की वजह से छोटे-छोटे टुकड़ों में बंट जाती है।
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A68 के अलावा एक 2,600 स्क्वैयर किलोमीटर यानि दिल्ली से लगभग दोगुना बड़ा हिमखंड A68a भी आगे ही बढ़ रहा है। जानकारों का मानना है कि ये चट्टान अगर किसी द्वीप पर रुक गई तो वहां की छोटी-बड़ी मछलियों और वनस्पति को खत्म कर देगा।
इसके अलावा एक दिक्कत यह भी सामने आ सकती है कि पेंगुविन और सील समुद्र में खाने के लिए लंबी दूरी तय करती हैं, ऐसे में इन चट्टानों की वजह से वो रास्ता भटक सकती हैं और बच्चों के लिए खाना लाने में असमर्थन हो सकती हैं। ऐसे में बच्चों की मौत भी हो सकती है।
इसके अलावा वैज्ञानिकों का कहना है कि इस हिमखंड के अलग हो जाने से वैश्विक समुद्री स्तर में 10 सेंटीमीटर की बढ़त हो जाएगी। इसके अलावा टाइटैनिक जैसे हादसे भी हो सकते हैं। चट्टान के टूटने का असर दूसरे देशों में ही नहीं बल्कि भारत में भी होने वाला है। समुद्री जलस्तर में बढ़ोतरी होने की वजह से अंडमान-निकोबार के कई टापू जलमग्न हो सकते हैं। इसके अलावा बंगाल की खाड़ी में स्थित सुंदरबन पर भी डूबने का खतरा हो सकता है।