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अजित डोभाल के बेटे की याचिका पर कोर्ट ने लिया संज्ञान, मानहानि केस में 30 जनवरी को गवाही
Tue, 22 Jan 2019 03:35 PM IST
अमित मंडल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमित मंडल
Updated Tue, 22 Jan 2019 03:35 PM IST
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अजित डोभाल
विवेक डोभाल की याचिका पर दिल्ली कोर्ट ने संज्ञान लिया। मामले में कोर्ट 30 जनवरी को गवाहों के बयान रिकॉर्ड करेगी। बता दें कि विवेक डोभाल ने सोमवार को ही कांग्रेस नेता जयराम नरेश पर मानहानि का केस किया है। विवेक ने कारवां पत्रिका के रिपोर्टर पर भी केस किया है। उनकी याचिका के बाद कोर्ट ने मामले में संज्ञान लिया है। मालूम हो कि विवेक डोभाल राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के बेटे हैं।
यह है पूरा मामला
जयराम ने एक लेख में आरोप लगाया था कि एनएसए के बेटे विवेक डोभाल ने केमन आइसलैंड टेक्स हैवन कंट्री (कर मुक्त प्रदेश) में जो फंड लिया है, उसमें बड़ा घालमेल नजर आ रहा है। आठ नवंबर 2016 को देश में नोटबंदी होती है और उसके 13 दिन बाद विवेक डोभाल केमन आइसलैंड में जीएनवाई एशिया नाम से एक फंड लेते हैं।
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साल 2000 से लेकर 2017 तक केमन आइसलैंड से देश में आठ हजार तीन सौ करोड़ रुपये की एफडीआई आई है, जबकि अप्रैल 2017 से मार्च 2018 तक आठ हजार तीन सौ करोड़ रुपया आ जाता है। जयराम रमेश ने आरबीआई से इस मामले की जांच कराने की मांग की है। जयराम ने कहा था, जीएनवाई एशिया की इस एफडीआई में डोभाल की क्या भूमिका रही है, वे बताएं। यह मामला सीधे तौर पर भ्रष्टाचार से जुड़ा है।
कांग्रेस का कहना था कि खुद अजीत डोभाल ने 2011 में यह मांग की थी कि टेक्स हैवन देशों में जमा राशि की मॉनिटरिंग होनी चाहिए। उन्होंने इसके लिए फाइनेंशियल इंटेलीजेंस एजेंसी की मदद लेने की भी बात कही थी। आज वे सत्ता में हैं, लेकिन अपनी इस मांग को पूरा नहीं कर रहे हैं। डोभाल को यह बताना होगा कि 12 माह में इतनी ज्यादा एफडीआई कैसे आ गई, जो 17 साल में कभी नहीं आ सकी। ये सब बातें आरबीआई की रिपोर्ट में दर्ज हैं।
रमेश ने कहा था कि जीएनवाई एशिया के दो निदेशक हैं। एक विवेक डोभाल और दूसरे डॉन डब्लू ई-बैंकस। ये नाम पनामा पेपर और पैराडाइज में भी देखे गए हैं। डोभाल के दोनों बेटों विवेक और शौर्य डोभाल के पास ही ज्यूस स्ट्रेटजिक मेनेजमेंट एडवाइजर का फंड भी है। डोभाल बताएं कि जीएनवाई और ज्यूस का क्या रिश्ता है।
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A Delhi Court has taken cognizance of the criminal defamation complaint filed by Vivek Doval, son of National Security Advisor (NSA) Ajit Doval and fixed the date of 30th January for witnesses' recording.
— ANI (@ANI) January 22, 2019विज्ञापन
यह है पूरा मामला
जयराम ने एक लेख में आरोप लगाया था कि एनएसए के बेटे विवेक डोभाल ने केमन आइसलैंड टेक्स हैवन कंट्री (कर मुक्त प्रदेश) में जो फंड लिया है, उसमें बड़ा घालमेल नजर आ रहा है। आठ नवंबर 2016 को देश में नोटबंदी होती है और उसके 13 दिन बाद विवेक डोभाल केमन आइसलैंड में जीएनवाई एशिया नाम से एक फंड लेते हैं।
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साल 2000 से लेकर 2017 तक केमन आइसलैंड से देश में आठ हजार तीन सौ करोड़ रुपये की एफडीआई आई है, जबकि अप्रैल 2017 से मार्च 2018 तक आठ हजार तीन सौ करोड़ रुपया आ जाता है। जयराम रमेश ने आरबीआई से इस मामले की जांच कराने की मांग की है। जयराम ने कहा था, जीएनवाई एशिया की इस एफडीआई में डोभाल की क्या भूमिका रही है, वे बताएं। यह मामला सीधे तौर पर भ्रष्टाचार से जुड़ा है।
कांग्रेस का कहना था कि खुद अजीत डोभाल ने 2011 में यह मांग की थी कि टेक्स हैवन देशों में जमा राशि की मॉनिटरिंग होनी चाहिए। उन्होंने इसके लिए फाइनेंशियल इंटेलीजेंस एजेंसी की मदद लेने की भी बात कही थी। आज वे सत्ता में हैं, लेकिन अपनी इस मांग को पूरा नहीं कर रहे हैं। डोभाल को यह बताना होगा कि 12 माह में इतनी ज्यादा एफडीआई कैसे आ गई, जो 17 साल में कभी नहीं आ सकी। ये सब बातें आरबीआई की रिपोर्ट में दर्ज हैं।
रमेश ने कहा था कि जीएनवाई एशिया के दो निदेशक हैं। एक विवेक डोभाल और दूसरे डॉन डब्लू ई-बैंकस। ये नाम पनामा पेपर और पैराडाइज में भी देखे गए हैं। डोभाल के दोनों बेटों विवेक और शौर्य डोभाल के पास ही ज्यूस स्ट्रेटजिक मेनेजमेंट एडवाइजर का फंड भी है। डोभाल बताएं कि जीएनवाई और ज्यूस का क्या रिश्ता है।