अमर उजाला के शानदार 75 साल: साधना की यात्रा और सौ साल का संकल्प, चुनौतियों भरा रहा है यह स्वर्णिम सफर
#AmarUjala75 : देश की आजादी के सिर्फ 8 माह के भीतर 18 अप्रैल, 1948 को ताजनगरी आगरा से एक नए संकल्प का शुभारंभ हुआ पत्रकारिता के उच्चतर मूल्यों को प्रस्थापित करने के दृढ़ निश्चय के साथ...अमर उजाला के रूप में। आज अपने इस महती दायित्व के 75 वर्ष पूर्ण कर अमर उजाला संकल्प की नई सदी की ओर अग्रसर होने जा रहा है।
विस्तार
अमर उजाला का पहला अंक 18 अप्रैल 1948 को पाठकों तक पहुंचा था। आगरा से यह एक विनम्र किन्तु दृढ़ संकल्पों से भरी शुरुआत थी। संस्थापक द्वय श्री डोरीलाल अग्रवाल और श्री मुरारीलाल माहेश्वरी ने पत्रकारिता के उच्चतर मूल्यों के साथ इस उपक्रम को आरंभ किया था। नवोन्मेषक श्री अतुल माहेश्वरी ने इसे नई ऊंचाइयां दीं। इसके प्रथम संपादकीय में ही स्पष्ट किया गया था - 'अमर उजाला को राष्ट्रीय उद्देश्यों के लिए निर्भीकता के साथ चलाया जाएगा। उस पर किसी दलगत राजनीति को हावी नहीं होने दिया जाएगा।' संकल्प के इस उजाले में प्रशस्त हुए मार्ग पर चलते हुए ही आज 75 वर्ष का एक अहम पड़ाव पूर्ण हो चुका है। अमर उजाला के पास मूल्यों की शक्ति तो है ही, तकनीकी नवाचार, नए युग के आयामों और श्रेष्ठ मानव संसाधन विकास के आधार पर हम 100 साल की ओर संकल्प के साथ बढ़ने की शुरुआत भी कर रहे हैं।
देश की आजादी के सिर्फ 8 माह के भीतर 18 अप्रैल, 1948 को ताजनगरी आगरा से एक नए संकल्प का शुभारंभ हुआ पत्रकारिता के उच्चतर मूल्यों को प्रस्थापित करने के दृढ़ निश्चय के साथ...अमर उजाला के रूप में। आज अपने इस महती दायित्व के 75 वर्ष पूर्ण कर अमर उजाला संकल्प की नई सदी की ओर अग्रसर होने जा रहा है। यह उपलब्धि हमारी ही नहीं, बल्कि आपके विश्वास और स्नेह की थाती है। आपका प्रेम ही है, जिसने हमें अपने प्रगति पथ से कभी डिगने नहीं दिया।
अमर उजाला नाम से प्रारंभ यह संकल्प आज छह राज्यों और दो केंद्रशासित प्रदेशों से प्रकाशित 22 संस्करणों और करोड़ों पाठकों के परिवार के विशाल वटवृक्ष में परिवर्तित हो चुका है तो यह हमारी नहीं आपकी सफलता है...आपका श्रेय है। यह उपलब्धि अमर उजाला की ही नहीं वरन् आपके विश्वास और स्नेह की थाती है। जब आप हमारी निष्ठा को आश्वस्ति भरा साथ देते हैं तो हमारी चुनौती बढ़ जाती है कि हम उस भरोसे की कसौटी पर खरे उतरें। यह हमारे सुधी पाठकों का ही प्रेम है, जिसने हमें गत सात दशकों से भी ज्यादा अंतराल में अपने प्रगति पथ से कभी डिगने नहीं दिया। हमें विश्वास है कि नई सदी की तरफ बढ़ती उम्मीदों की ये उड़ान आपके सहयोग की शक्ति के सहारे और नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। अमर उजाला के लिए हर पाठक सर्वोपरि है। इसी भावना के साथ समाचार पत्रों से लेकर डिजिटल संस्करणों की यात्रा हमारे करोड़ों पाठकों की शुभेच्छाओं के संबल से बखूबी आगे बढ़ रही है।
इस अटूट साझेदारी का ही परिणाम है कि अमर उजाला इन दशकों में निष्पक्ष और बिना लाग-लपेट के खबरें पहुंचाने के साथ ही जनता से जुड़े सामाजिक-राष्ट्रीय सरोकारों के कई अभियानों को सफलतापूर्वक परिणाम तक पहुंचाकर राष्ट्र और जन के विकास में भागीदार बन पाया है।
पाठकों के प्रेम का ही परिणाम है कि हम इस सफर के दौरान आईं तमाम चुनौतियों के बावजूद आप तक पहुंचते रहे। आंधी, बारिश, हिमपात हो या भीषण लू की लपटों के दिन, अमर उजाला हर दिन पौ फटते ही आपके दरवाजे बिला नागा पर उपस्थित होता रहा। कोरोनाकाल के लॉकडाउन जैसे कठिन समय में भी हमने आपको महामारी के प्रति जागरूक करने के दायित्व से मुंह नहीं मोड़ा।
...और हां आप तक समाचार पहुंचाना हमारे दायित्व का एक छोटा हिस्सा भर है। समाज को उसकी आवश्यकता के समय सहयोग हमारे लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है। साधनहीन लेकिन प्रतिभाशाली बच्चों को छात्रवृत्ति देकर उनके सपनों को पंख देने, रक्तदान जैसे महादान में योगदान, ‘शब्द सम्मान’ जैसे प्रतिष्ठापूर्ण सम्मानों के जरिये हिंदी की सेवा, ‘मां तुझे प्रणाम’ से राष्ट्रीयता की भावना के संचार और ‘अपराजिता’ से बेटियों की आवाज को मंच देने जैसे कई कदमों से हम अपने दायित्वों का निर्वाह करते हुए आपके स्नेह को सार्थकता देने का प्रयास करते रहे हैं। यही कारण है कि अमर उजाला आज अपने सामाजिक सरोकारों के कारण अलग पहचान रखता है। हर कालखंड नई चुनौतियां और नए अनुभव लेकर आता है।
यह सुखद संयोग है कि आज देश अपनी आजादी का अमृत महोत्सव भी मना रहा है। इस शुभ घड़ी में अमर उजाला देश के उज्ज्वलतम भविष्य के लिए अपने यथाशक्ति योगदान का संकल्प व्यक्त करता है।
अमर उजाला के लिए हर पाठक सर्वोपरि है। हमारे पाठकों का प्रेम ही है कि हम 75 वर्षों के दौरान आई तमाम चुनौतियों के बावजूद आप तक पहुंचते रहे। आंधी, बारिश, हिमपात या भीषण लू भी हमारे कदम नहीं थाम सकी। अमर उजाला हर दिन पौ फटते ही आपके दरवाजे पर बिना नागा उपस्थित होता रहा। कोरोना के अति संकट काल में भी हमने महामारी के प्रति आपको जागरूक करने के अपने कर्तव्य से मुंह नहीं मोड़ा।