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75% आबादी के सामने भीषण पेयजल संकट, जल गुणवत्ता सूचकांक में 122 देशों में भारत 120वें स्थान पर

Fri, 15 Jun 2018 06:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Updated Fri, 15 Jun 2018 06:51 AM IST
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75% of the country population faces severe drinking water crisis
water shimla
देश की लगभग आधी आबादी यानी 60 करोड़ लोगों को पानी की गंभीर किल्लत झेलनी पड़ रही है, जबकि 75 प्रतिशत आबादी को पीने के पानी के लिए दूर-दराज जाना पड़ता है। नीति आयोग द्वारा बृहस्पतिवार को जारी एक रिपोर्ट में इन तथ्यों का खुलासा किया गया है। 
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आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, गांवों में 84 प्रतिशत आबादी जलापूर्ति से वंचित है। जो पानी उपलब्ध है उसमें भी 70 प्रतिशत प्रदूषित है। वैश्विक जल गुणवत्ता सूचकांक में 122 देशों में भारत 120वें स्थान पर है। आयोग ने जल प्रबंधन के क्षेत्र में राज्यों में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए उनकी रैंकिंग जारी की है। नदी विकास, जल संसाधन एवं गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी और नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत तथा उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने ‘समेकित जल प्रबंधन सूचकांक’ नामक यह रिपोर्ट जारी करते हुए बताया कि इस मामले में गुजरात पहले स्थान पर है। इसके बाद मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, त्रिपुरा, हरियाणा और महाराष्ट्र का स्थान रहा है। रिपोर्ट वर्ष 2015-16 और 2016-17 के आंकड़ों पर तैयार की गई है। 
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गडकरी ने कहा कि देश की सबसे बड़ी समस्या पानी की है। इसके लिए उन्होंने खराब जल प्रबंधन को जिम्मेदार बताया। पानी की कमी नहीं है, बल्कि पानी के नियोजन की कमी है। राज्यों के बीच जल विवाद सुलझाना, पानी की बचत करना और बेहतर जल प्रबंधन कुछ ऐसे काम हैं जिनसे कृषि आमदनी बढ़ सकती है और गांव छोड़कर शहर आए लोग वापस गांव की ओर लौट सकते हैं। 
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केपटाउन बनने से बचाएं शहरों को 

नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि देश में पानी की स्थिति अच्छी नहीं है। पिछले 70 साल में इस पर ध्यान नहीं दिया गया। हर साल इतनी बारिश होती है, बाढ़ आती है लेकिन हमने कभी सोचा ही नहीं कि कभी पानी की समस्या भी हो सकती है। अब स्थिति ऐसी हो गई है कि इस विषय को गंभीरता से लेना होगा। यदि हम अपने शहरों को केपटाउन नहीं बनाना चाहते तो अभी से जल प्रबंधन शुरू करना होगा।


झारखंड, यूपी व हरियाणा की स्थिति बदतर

नीति आयोग द्वारा जारी रैंकिंग में 24 राज्यों के आंकड़े जारी किए गए हैं जिनमें बड़े राज्यों की श्रेणी में नीचे से चार राज्य झारखंड, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार हैं। वहीं, पूर्वोत्तर तथा हिमालयी राज्यों में मेघालय का प्रदर्शन सबसे खराब रहा है। वर्ष 2015-16 की तुलना में 2016-17 में सबसे ज्यादा सुधार राजस्थान, मेघालय, सिक्किम, त्रिपुरा, झारखंड, हरियाणा और गुजरात में देखा गया है। 
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