65 लाख पेंशनरों को मिली बड़ी राहत, अगर खो गए हैं दस्तावेज तो 'डिजिलॉकर' करेगा मदद
केंद्र सरकार ने सार्वजनिक वित्त प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक पेंशन पेमेंट ऑर्डर (ई-पीपीओ) को डिजीलॉकर के साथ जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी है...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
केंद्र सरकार ने सार्वजनिक वित्त प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक पेंशन पेमेंट ऑर्डर (ई-पीपीओ) को डिजीलॉकर के साथ जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके बाद पूर्व सरकारी कर्मी अपने डिजिलॉकर अकाउंट से पीपीओ का प्रिंटआउट निकाल सकते हैं। उन्हें सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
देखा गया है कि किसी सेवानिवृत्त कर्मी का पीपीओ खो जाने की स्थिति में उसे एक-दो नहीं, बल्कि कई बार संबंधित कार्यालय में बुलाया जाता है। नया पीपीओ जारी होने की प्रक्रिया में कई तरह के दस्तावेज जमा कराने पड़ते हैं। 'डिजिलॉकर' मिलने के बाद पीपीओ के खो जाने या उसके नहीं मिलने का झंझट ही खत्म हो जाएगा।
कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय की तरफ से जारी पत्र में कहा गया है, विभाग के पास ऐसे बहुत से केस आ रहे हैं, जिनमें पेंशनरों का पीपीओ खो जाने या कहीं इधर उधर होने की बात सामने आती है। चूंकि वरिष्ठ नागरिक होने के चलते उनके लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाना संभव नहीं होता है।
जब उनके पेंशन पेमेंट ऑर्डर की मूल प्रति खो जाती है तो उन्हें कई तरह की परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। कोविड-19 के दौरान यह दस्तावेज खो जाता है तो उसे दोबारा बनवाने के लिए कितनी मशक्कत करनी होगी, यह अंदाजा लगाया जा सकता है।
परिवार में कई बार ऐसी परिस्थितियां होती हैं, जहां उनके साथ सरकारी कार्यालय में जाने वाला कोई नहीं होता। कमजोर स्वास्थ्य के चलते वे खुद वहां तक नहीं पहुंच सकते। इन सबके मद्देनजर सेवानिवृत्त कर्मचारियों को राहत पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार ने 'डिजिलॉकर' की योजना बनाई है।
इसे सार्वजनिक वित्त प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक पेंशन पेमेंट ऑर्डर के साथ समन्वित कर जोड़ा जाएगा। इससे पेंशनर को डिजिलॉकर अकाउंट से अपने पीपीओ का प्रिंटआउट निकालने की सुविधा मिलेगी। इतना ही नहीं, उसे अगर कहीं पर पीपीओ की प्रति देनी होगी तो वह 'डिजिलॉकर' के जरिए कॉपी भेज सकता है।
सेवानिवृत्त कर्मचारी को इसके लिए 'भविष्य सॉफ्टवेयर' का इस्तेमाल करना होगा। यह पेंशनर के लिए एकमात्र विंडो है। इसके जरिए पेंशन से संबंधित सारे काम होते हैं। यह 'भविष्य सॉफ्टवेयर' अब सेवानिवृत्त कर्मियों को अपना डिजिलॉकर लिंक करने की सुविधा प्रदान करेगा। डिजिलॉकर को 'भविष्य सॉफ्टवेयर'के साथ ही लिंक करना है।