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ताज से 64 करोड़ रुपये की कमाई, पर पर्यटन के लिए ले रहे कर्ज

Tue, 17 May 2016 02:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, आगरा
ब्यूरो/अमर उजाला, आगरा Updated Tue, 17 May 2016 02:07 AM IST
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64 crore also taking on debt for tourism.
- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, आगरा
ताजमहल से 64 करोड़ रुपये की हर साल कमाई है, लेकिन ताज के ठीक पीछे कछपुरा गांव में सड़क, पानी, नाली, शौचालय जैसी मूल सुविधाओं के लिए वर्ल्ड बैंक से कर्ज लिया जाएगा। प्रदेश और आगरा के अफसरों ने कर्ज से कछपुरा का विकास कराने के लिए वर्ल्ड बैंक की टीम के साथ निरीक्षण किया।
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गांव की गरीबी दिखाकर वर्ल्ड बैंक टीम से प्रोजेक्ट के लिए सहमति ले ली गई। अब कछपुरा और ताज से किले के बीच प्रस्तावित वॉक वे की डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार कराई जाएगी और इसे फंड वर्ल्ड बैंक से दिया जाएगा।
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सूबे के महानिदेशक पर्यटन नवनीत सहगल के साथ वर्ल्ड बैंक के 8 देशों के डायरेक्टर ताज के पार्श्व में कछपुरा गांव पहुंचे। सोमवार सुबह निरीक्षण में गांव के स्कूल और लोगों के घरों को दिखाया गया। प्रो-पूअर प्रोजेक्ट के तहत गांव में सड़क, नाली, पानी, शौचालय और रोजगार के साधन उपलब्ध कराने का दावा किया गया।
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वर्ल्ड बैंक से कर्ज लेकर कछपुरा का विकास

64 crore also taking on debt for tourism.
महानिदेशक पर्यटन नवनीत सहगल के मुताबिक वर्ल्ड बैंक की मदद से होने वाले इस प्रोजेक्ट में एक ही फेस में काम शुरू होगा, जिससे गांव में कूड़ा निस्तारण की समस्या भी दूर हो जाएगी। ग्रामीणों के सुझाव से ही प्रोजेक्ट तैयार होगा।

वर्ल्ड बैंक की टीम का यह दो साल में 6 वां दौरा है। प्रदेश सरकार वर्ल्ड बैंकी की मदद से कई बड़े प्रोजेक्ट शुरू कराना चाहती थी, लेकिन बैंक द्वारा पैसा देने से पहले की सख्ती से कई प्रोजेक्ट इस लिस्ट से हटा दिए गए। वर्ल्ड बैंक टीम में साउथ एशियन रीजनल कार्डिनेटर स्टेफेनिया अवाकर्ली के साथ 8 देशों के डायरेक्टर मौजूद रहे। कछपुरा में निरीक्षण के समय डीएम पंकज कुमार, संयुक्त निदेशक पर्यटन पीके सिंह, उपनिदेशक अनूप श्रीवास्तव, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी दिनेश कुमार आदि मौजूद रहे।

अफसरों की सुख-सुविधाओं के लिए पथकर
ताजमहल के पास ताजगंज प्रोजेक्ट हो या मुगल म्यूजियम या फिर ताज ओरिएंटेशन सेंटर। यह तीनों बड़े प्रोजेक्ट राज्य सरकार अपने बजट से करा रही है। इसी तरह प्रो-पूअर के तहत वॉक वे और कछपुरा गांव के विकास की योजना को वर्ल्ड बैंक की मदद से पूरा कराया जा रहा है। ऐसे में लाख टके का सवाल ये है कि आखिर 64 करोड़ रुपये की हर साल हो रही कमाई पर्यटन विकास में क्यों नहीं लगाई जा रही। हर बार अफसरों की सुख सुविधा के लिए पथकर का प्रयोग क्यों किया जा रहा है।
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