फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   60 percent of plants and animals have been taken over by foreign invasive species

IPBES: 60 फीसदी पौधे-जानवर लील गईं विदेशी आक्रामक प्रजातियां, वैश्विक अर्थव्यवस्था को 35 लाख करोड़ का नुकसान

Thu, 07 Sep 2023 05:23 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Thu, 07 Sep 2023 05:23 AM IST
सार

इसका खुलासा जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं पर आधारित अंतर सरकारी मंच इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन बायोडायवर्सिटी एंड इकोसिस्टम सर्विसेज (आईपीबीईएस) की नई रिपोर्ट ‘द असेसमेंट रिपोर्ट ऑन इनवेसिव एलियन स्पीशीज एंड देयर कंट्रोल’ में किया गया है।

विज्ञापन
60 percent of plants and animals have been taken over by foreign invasive species
biodiversity - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दुनिया भर में 60 फीसदी पौधों और जानवरों के विलुप्त होने की वजह विदेशी आक्रामक प्रजातियां हैं। यह प्रति वर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था को 35 लाख करोड़ (42,300 करोड़ डॉलर) से ज्यादा की चपत लगा रही हैं। यदि 1970 के बाद से देखें तो नुकसान की यह दर हर दशक चार गुना बढ़ रही है।

विज्ञापन

इसका खुलासा जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं पर आधारित अंतर सरकारी मंच इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन बायोडायवर्सिटी एंड इकोसिस्टम सर्विसेज (आईपीबीईएस) की नई रिपोर्ट ‘द असेसमेंट रिपोर्ट ऑन इनवेसिव एलियन स्पीशीज एंड देयर कंट्रोल’ में किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में 37,000 से ज्यादा विदेशी प्रजातियां हैं। इनमें से करीब 3500 से ज्यादा आक्रामक श्रेणी की हैं, जो स्थानीय जैवविविधता के लिए खतरनाक बन चुकी हैं। इसके अलावा हर साल 200 नई विदेशी प्रजातियां इनमें जुड़ रही हैं। विदेशी प्रजातियों से तात्पर्य पौधों, जानवरों और सूक्ष्मजीवों से है, जिन्हें इंसान उनके मूल आवासों से दूसरी नई जगहों पर ले जाता है। इनमें से आक्रामक प्रजातियां पर्यावरण और जैवविविधता के साथ-साथ इंसानों के लिए भी खतरा बन रही हैं। यह प्रजातियां स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और जीविका को भी खतरे में डाल रही हैं।

विज्ञापन

मत्स्य पालन को भारी नुकसान
रिपोर्ट में आक्रामक प्रजातियों में तालाबों को ढंक देने वाली जलकुम्भी से लेकर पक्षियों के अंडे खाने वाले चूहे, केकड़े, चिट्रिड फंगस, सीप, पेड़-पौधे, एशियन हॉर्नेट, गिलहरी और सांप तक शामिल हैं। इसी प्रकार यूरोपीय तटीय केकड़ा न्यू इंग्लैंड में शेलफिश को प्रभावित कर रहा है। इसी तरह कैरेबियन फाल्स मसल्स, देशी क्लैम और सीपों को नष्ट कर रहे है। इनकी वजह से भारत में भी स्थानीय मत्स्य पालन को भारी नुकसान हो रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

बचाव के उपाय
भारत सहित 190 से अधिक देशों ने जैव विविधता को होने वाले नुकसान को ‘रोकने और पलटने’ के लिए 2022 में एक ऐतिहासिक समझौता किया था। इसे ‘कुनमिंग-मॉन्ट्रियल ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क’ के नाम से जाना जाता है। इसके तहत 2030 तक कम से कम 30 प्रतिशत भूमि, जल क्षेत्र और तटीय व समुद्री क्षेत्रों की जैव विविधता के संरक्षण और प्रबंधन का लक्ष्य रखा गया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed