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अध्ययन: कोरोना की तीसरी लहर में जान गंवाने वाले 60 फीसदी मरीजों को नहीं लगी थी टीके की एक या दोनों खुराकें

Sat, 22 Jan 2022 06:28 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sat, 22 Jan 2022 06:28 PM IST
सार

कोरोना वायरस की तीसरी लहर के दौरान जान गंवाने वाले करीब 60 फीसदी मरीजों को या तो टीके की एक भी खुराक नहीं लगी थी या फिर एक ही खुराक लगी थी।

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60 percent covid deaths in third wave of Coronavirus among partially or completely unvaccinated says Max Healthcare study
दिल्ली में कोरोना - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

एक निजी अस्पताल के अध्ययन में सामने आया है कि कोरोना वायरस की तीसरी लहर के दौरान इस महामारी जान गंवाने वाले 60 फीसदी लोगों का या तो बिल्कुल टीकाकरण नहीं हुआ था या फिर पूर्ण टीकाकरण नहीं हुआ था। यह अध्ययन मैक्स हेल्थकेयर की ओर से किया गया है। इसके अनुसार जान गंवाने वालों में 70 वर्ष से अधिक आयु वाले और विभिन्न बीमारियों से पीड़ित लोगों की संख्या अधिक रही है।

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मैक्स हेल्थकेयर की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, 'हमारे अस्पतालों में, 82 मौतों में से 60 फीसदी मामले ऐसे थे जिनमें मरीज को टीके की या तो दोनों खुराकें नहीं लगी थीं या फिर एक ही खुराक लगी थी।' दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन भी इस पर जोर देते रहे हैं कि ऐसे लोगों में जान जाने का खतरा अधिक देखा गया है जिनका प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर है और जो पहले से ही गंभीर बीमारियों से पीड़ित रहे हैं।
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ऑक्सीजन सपोर्ट की तीनों लहरों में कुछ ऐसी रही स्थिति
कोरोना वायरस वैश्विक महामारी की तीन लहरों का तुलनात्मक अध्ययन बताता है कि तीसरी लहर के दौरान केवल 23.4 फीसदी मरीजों को ऑक्सीजन सपोर्ट देने की आवश्यकता पड़ी। महामारी की दूसरी लहर के दौरान यह आंकड़ा 74 फीसदी और पहली लहर के दौरान 63 फीसदी था। मैक्स के अस्पतालों में कुल 41 कोरोना संक्रमित नाबालिग भर्ती किए गए। यहां इस आयु वर्ग में एक भी मौत दर्ज नहीं की गई।
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इस बार दिल्ली के अस्पतालों में बेड का कोई संकट नहीं
बयान में कहा गया कि पिछले साल अप्रैल में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जब दिल्ली में 28 हजार मामले दर्ज किए गए थे, तब सभी अस्पतालों के आईसीयू बेड पूरी तरह भरे हुए थे। जबकि इस तीसरी लहर के दौरान पिछले सप्ताह ही दिल्ली में कहीं अधिक मामले दर्ज किए गए थे लेकिन कोरोना वायरस संक्रमितों के लिए कहीं भी अस्पतालों में बेड की उपलब्धता को लेकर कोई संकट देखने को नहीं मिला है।

पांचवी लहर नहीं मिली घातक, ऑक्सीजन सपोर्ट के साथ मृत्युदर भी घटी

दिल्ली में कोरोना की पांच लहरों को लेकर पहला चिकित्सीय अध्ययन सामने आया है। नए अध्ययन में पता चला है कि ओमिक्रॉन वैरिएंट से मौजूदा पांचवी लहर घातक साबित नहीं हुई है। साथ ही इस लहर में चौथी लहर के मुकाबले मृत्युदर में साढ़े चार फीसदी व ऑक्सीजन सपोर्ट में भी 50.6 फीसदी की कमी हुई है। हालांकि, अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या करीब 12 फीसदी तक जरूर बढ़ी है। 

मैक्स अस्पताल के समूह चिकित्सा निदेशक डॉ. संदीप बुद्धिराजा के नेतृत्व में हुए अध्ययन के मुताबिक, वर्ष मार्च  2020 से लेकर जनवरी 2021 के दौरान 20833 मरीजों को अस्पताल में भर्ती किया गया। इनमें से 35 फीसदी मरीजों को आईसीयू व 63 फीसदी मरीजों को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया। वहीं, मार्च 2021 से जून 2021यानी चौथी लहर के दौरान 12,444 मरीजों भर्ती हुए।

इसमें से 34 फीसदी मरीज आईसीयू व 74 फीसदी मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहे। वहीं, दिसंबर 2021 से अब तक 1378 मरीजों को भर्ती किया गया। इसमें से 45.9 फीसदी मरीज आईसीयू में भर्ती हुए हैं, जबकि 23.4 फीसदी मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं। बुद्धिराजा के मुताबिक, चौथी लहर में प्रतिदिन 26 हजार मामले आने के कारण अस्पताल के सभी बेड भर गए थे, जबकि ओमिक्रॉन की लहर में केवल एक बार ही 28 हजार मामले देखे गए और अब अस्पताल में बिस्तर खाली हैं। 

सबसे अधिक चौथी लहर में हुई मौत
आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में सबसे अधिक 10 फीसदी चौथी लहर के दौरान मौत हुई है।चौथी लहर के दौरान मृत्यु दर 10.5 फीसदी रही, जबकि शुरुआती तीन लहरों में यह 7.2 फीसदी थी। पांचवी लहर में मृत्यु दर घटकर छह फीसदी पर आ गई है, जो कि अब तक की सबसे कम मौतों का दर है।  राहत की बात यह भी है कि पांचवी लहर में एक भी बच्चे ने कोरोना से दम नहीं तोड़ा। अस्पताल में 41 बच्चों को भर्ती किया गया, जिनमें एक भी बच्चे की मौत नहीं हुई। हालांकि, दो बच्चों को वेंटिलेटर पर भर्ती किया गया। 

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