राष्ट्रपति संबोधन के 6 घंटे के भीतर टीडीपी के चार सांसद भाजपा में, पूरी फिल्म अभी बाकी है
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ये महज इत्तेफाक नहीं है कि गुरुवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने मोदी सरकार 2.0 का एजेंडा देश के सामने रखा। राष्ट्रपति ये भी बताते हैं कि मोदी सरकार किस तरह नए भारत की नीव रखेगी। उनके संबोधन को अभी छह घंटे भी नहीं हुए थे कि शाम को तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के चार सांसदों की खबर आ गई। वे चारों अब भाजपा में शामिल हो गए हैं। ये सब यूं ही नहीं हुआ। अगर आप कई बातों को एक-दूसरे से जोड़ कर देखें तो इस नतीजे पर पहुंचेंगे कि मोदी 2.0 का ये ट्रेलर है, पूरी फिल्म अभी बाकी है। यानी एजेंडे पर काम शुरू हो गया है। हो सकता है कि आने वाले दिनों में कई दूसरी पार्टियों में भी ये सुनने को मिले कि उनके फलां नेता भाजपा में चले गए हैं।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जो बातें कही, अगर आप उनकी गहराई में जाएं तो आसानी से मोदी 2.0 का ट्रेलर जान सकेंगे। उन्होंने कहा, देश ने तीन दशकों के बाद पूर्ण बहुमत की सरकार दी है। दूसरी बार और भी मजबूत समर्थन दे दिया। राष्ट्रपति यहीं पर नहीं रुके, वे बोले, ये विकास यात्रा को आगे बढ़ाने का जनादेश है। 2014 से पहले निराशा का माहौल था। उनकी ये बातें यह इशारा कर रही थीं कि मोदी 2.0 एक मजबूत सरकार है, न्यू इंडिया के लिए कठोर फैसले लेने पड़े तो लेंगे।
राष्ट्रपति द्वारा यह कहना कि 'एक राष्ट्र एक चुनाव' समय की मांग है, यह बताने के लिए काफी है कि इस मुद्दे को पीएम मोदी कितनी गंभीरता से ले रहे हैं। यह अलग बात है कि एनडीए-भाजपा सरकार मौजूदा परिस्थितियों में अपनी मर्जी के बिलों को राज्यसभा में पास नहीं करा सकती। राज्यसभा की कुल सदस्य संख्या यानी 245 में से भाजपा के पास 71 सदस्य हैं। इससे उच्च सदन में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी तो बन गई, मगर बिल या अध्यादेश को मंजूरी दिलाने के लिए जो बहुमत होना चाहिए, वो नहीं है।
चूंकि लोकसभा में अब पांच साल तक मोदी सरकार के पास प्रचंड बहुमत है, जबकि दूसरी ओर विपक्ष अभी से बिखराव की राह पर है। सपा, टीडीपी, बसपा, टीएमसी, आरजेडी और कई दूसरे क्षेत्रीय दल अभी तक लोकसभा की हार पचा नहीं पा रहे हैं। इन पार्टियों में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। हो सकता है कि आने वाले वक्त में इन पार्टियों के भीतर से मोदी 2.0 को राज्यसभा में मदद मिल जाए।
मोदी सरकार का विपक्षी दलों के लिए अब क्या संदेश मानें
इस बार भाजपा का एजेंडा छिपा हुआ नहीं है। राष्ट्रपति के भाषण को देखें तो उसमें ऐसा कुछ भी नया नहीं था जो मोदी ने सार्वजनिक तौर पर पहले न कहा हो। 'एक राष्ट्र एक चुनाव' पर पिछले साल ही भाजपा आगे कदम रख चुकी थी। तभी विधि आयोग की रिपोर्ट भी आ गई। सुझाव भी दे दिए गए। इसके बाद लोकसभा चुनाव में भारी बहुमत मिल गया। बता दें कि पीएम मोदी और भाजपा इस कार्यकाल में किसी भी तरह 'एक राष्ट्र एक चुनाव' की योजना को अमलीजामा पहनाने का प्रयास करेंगे।
अगर भाजपा में यह एजेंडा हल्का होता तो संसद का सत्र शुरू होने के तुरंत बाद मोदी एक राष्ट्र एक चुनाव के मसले पर विपक्षी दलों के अध्यक्षों की बैठक न बुलाते। मोदी ने ऐसा कर अपनी मंशा जता दी है। उनका स्पष्ट संदेश है कि विपक्षी पार्टियां इस मुद्दे पर सरकार के साथ आएं तो ठीक है, अन्यथा सदन में बहुमत का जुगाड़ करना भी भाजपा को आता है।
वित्त मंत्रालय की जांच एजेंसियों में बैठे एक अधिकारी की मानें तो अब एक नहीं, बल्कि कई पार्टियों के नेताओं के यहां नोटिस भेजने का सिलसिला शुरु होगा। फाइल वर्क शुरू हो चुका है। किसी के खिलाफ नए मामले दिखेंगे तो कोई पुराने केसों में फंसा मिलेगा। खासतौर पर, कांग्रेस, टीडीपी, सपा, बसपा, टीएमसी और आरजेडी के कई नेताओं को ऐसी परेशान झेलने के लिए तैयार रहना चाहिए।