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पैंडोरा पेपर्स: वित्तीय लेनदेन में 380 भारतीयों के नाम उजागर, इनमें उद्योगपति से लेकर भगोड़ा कारोबारी भी शामिल
Mon, 04 Oct 2021 08:36 PM IST
सुभाष कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुभाष कुमार
Updated Mon, 04 Oct 2021 08:36 PM IST
सार
बताया गया है कि पैंडोरा पेपर्स करीब 1 करोड़ 19 लाख गुप्त फाइलों का जत्था हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें भारत की नागरिकता रखने वाले 380 नामों का भी खुलासा हुआ है।
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पैंडोरा पेपर्स लीक में 380 भारतीय लोगों के नाम।
- फोटो : social media
विस्तार
पत्रकारों की अंतरराष्ट्रीय संस्था इंटरनेशनल कंसोर्शियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (ICIJ) और दुनियाभर के मीडिया संस्थानों ने बड़े अमीरों के गुप्त लेनदेन को लेकर अहम खुलासे किए हैं। इनमें 35 देशों के मौजूदा और पूर्व राष्ट्राध्यक्षों से लेकर सैकड़ों उद्योगपति, खिलाड़ी, सिलेब्रिटी, नेता और अन्य लोगों के अपनी संपत्ति और पैसे के लेन-देन को छिपाने और उनके हथकंडों का जिक्र है। इस लीक डेटा को पैंडोरा पेपर्स नाम दिया गया है। बताया गया है कि पैंडोरा पेपर्स करीब 1 करोड़ 19 लाख गुप्त फाइलों का जत्था हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें भारत की नागरिकता रखने वाले 380 नामों का भी खुलासा हुआ है।
क्या है पैंडोरा पेपर्स?
पैंडोरा पेपर्स 14 कॉरपोरेट सर्विस फर्म्स की ओर से लीक हुईं 1.19 करोड़ गुप्त फाइलें हैं। फाइलों में इन 14 सर्विस फर्म्स की ओर से खड़ी की गई 29,000 ऑफ-द-शेल्फ कंपनियों और प्राइवेट ट्रस्टों के नाम हैं, जिन्हें टैक्स बचाने के लिए ही बनाया गया था। इन ऑफ-द-शेल्फ कंपनियों को रिकॉर्ड छिपाने के लिए सिर्फ टैक्स हेवन देशों (जिन देशों में टैक्स न लगता हो) में ही नहीं, बल्कि सिंगापुर, न्यूजीलैंड और अमेरिका जैसे देशों में भी खड़ा किया गया था।
जो दस्तावेज सामने आए हैं, उनमें अमीरों की प्राइवेट ट्रस्टों के जरिए विदेशों में जमा संपत्ति और निवेश से जुड़े खुलासे किए गए हैं। इनमें कैश, शेयर्स और रियल एस्टेट में किए गए निवेश की भी जानकारी शामिल है। पैंडोरा पेपर्स में जिन 380 भारतीयों के नाम हैं, उनमें से 60 प्रमुख व्यक्तियों और कंपनियों के दस्तावेजों के सत्यापन द इंडियन एक्सप्रेस मीडिया ग्रुप की ओर से किए गए हैं।
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पैंडोरा पेपर्स में किन भारतीयों के नाम?
पैंडोरा पेपर्स में उद्योगपति अनिल अंबानी से लेकर नीरव मोदी और किरण मजूमदार शॉ के नाम प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर सामने आए हैं। इसके अलावा भारत रत्न और राज्यसभा सांसद सचिन तेंदुलकर का नाम भी इस लिस्ट का हिस्सा है। जिन अन्य लोगों के नाम इस लिस्ट में शामिल हैं, उनमें बॉलीवुड अभिनेता जैकी श्रॉफ और गांधी परिवार से जुड़े सतीश शर्मा के नाम भी शामिल हैं। इसके अलावा नीरा राडिया का भी नाम इस लिस्ट का हिस्सा है।
अमीरों ने ट्रस्ट्स के जरिए क्यों छिपाए अपने पैसे?
पैंडोरा पेपर्स की जांच के बाद यह सामने आया है कि अमीरों ने ट्रस्ट्स के जरिए विदेश में अपनी वित्तीय लेनदेने की जानकारियां छिपाईं। इसकी दो मुख्य वजहें रहीं...
1. बाहरी देश में निवेश के दौरान अपनी असल पहचान छिपाने और विदेशी संस्थाओं (खासकर कंपनियों) से खुद का नाम दूर रखने के लिए, ताकि टैक्स अधिकारियों के लिए उन तक पहुंचना नामुमकिन हो जाए।
2. अपने नकद, शेयर होल्डिंग, रियल एस्टेट, एयरक्राफ्ट्स, यॉट और अन्य निवेशों को लेनदारों और कानूनी एजेंसियों से बचाने के लिए।
भारत में कौन-कौन से बड़े नाम उजागर?
1. पैंडोरा पेपर्स में अनिल अंबानी का नाम है, जिन्होंने कुछ समय पहले ही चीन के तीन बैंकों की ओर से 70 करोड़ डॉलर (करीब 5200 करोड़ रुपये) वापस मांगे जाने पर ब्रिटेन की एक कोर्ट में खुद को दिवालिया घोषित किया। लीक दस्तावेजों में सामने आया है कि उनके पास 18 संपत्तियां हैं।
2. पीएनबी घोटाले के बाद जनवरी 2018 में भारत छोड़कर भागने वाले नीरव मोदी ने अपनी बहन पूर्वी के जरिए ब्रिटेन के वर्जिन आइलैंड्स में एक फर्म तैयार करवाई थी, जो कि सिंगापुर की ट्राइडेंट ट्रस्ट कंपनी की कॉरपोरेट प्रोटेक्टर के तौर पर काम कर रही है।
3. इसी रिपोर्ट के मुताबिक, बायोकॉन की प्रमोटर किरण मजूमदार शॉ के पति ने एक ट्रस्ट खड़ा करवाया था, जिसकी जिम्मेदारी इनसाइडर ट्रेडिंग के लिए सेबी द्वारा प्रतिबंधित किए गए एक व्यक्ति को दी गई थी। हालांकि, शॉ ने सोमवार को कहा कि उनके ऑफशोर ट्रस्ट में किए गए निवेश पूरी तरह प्रामाणिक और वैध हैं। उन्होंने ट्वीट में कहा, "पैंडोरा पेपर्स में मेरे पति के ट्रस्ट पर गलत तरह से रिपोर्टिंग की जा रही है। उनका ट्रस्ट पूरी तरह से स्वतंत्र ट्रस्टियों द्वारा मैनेज किया जाता है और जैसा कि इन रिपोर्ट्स में आरोप लगाया गया है कोई भी भारतीय नागरिक इस ट्रस्ट में ऊंचा कद नहीं रखता।"
4. इसके अलावा 2016 में ब्रिटेन के वर्जिन आइलैंड में स्थापित एक कंपनी के बिकने पर सचिन तेंदुलकर, उनकी पत्नी अंजलि और उनके ससुर को भी फायदा पहुंचने का मामला सामने आया है। हालांकि, तेंदुलकर के वकील का दावा है कि उनके सारे निवेश वैध हैं और इनका खुलासा टैक्स लेने वाले अफसरों को दिया जा चुका है।
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क्या है पैंडोरा पेपर्स?
पैंडोरा पेपर्स 14 कॉरपोरेट सर्विस फर्म्स की ओर से लीक हुईं 1.19 करोड़ गुप्त फाइलें हैं। फाइलों में इन 14 सर्विस फर्म्स की ओर से खड़ी की गई 29,000 ऑफ-द-शेल्फ कंपनियों और प्राइवेट ट्रस्टों के नाम हैं, जिन्हें टैक्स बचाने के लिए ही बनाया गया था। इन ऑफ-द-शेल्फ कंपनियों को रिकॉर्ड छिपाने के लिए सिर्फ टैक्स हेवन देशों (जिन देशों में टैक्स न लगता हो) में ही नहीं, बल्कि सिंगापुर, न्यूजीलैंड और अमेरिका जैसे देशों में भी खड़ा किया गया था।
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जो दस्तावेज सामने आए हैं, उनमें अमीरों की प्राइवेट ट्रस्टों के जरिए विदेशों में जमा संपत्ति और निवेश से जुड़े खुलासे किए गए हैं। इनमें कैश, शेयर्स और रियल एस्टेट में किए गए निवेश की भी जानकारी शामिल है। पैंडोरा पेपर्स में जिन 380 भारतीयों के नाम हैं, उनमें से 60 प्रमुख व्यक्तियों और कंपनियों के दस्तावेजों के सत्यापन द इंडियन एक्सप्रेस मीडिया ग्रुप की ओर से किए गए हैं।
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पैंडोरा पेपर्स में किन भारतीयों के नाम?
पैंडोरा पेपर्स में उद्योगपति अनिल अंबानी से लेकर नीरव मोदी और किरण मजूमदार शॉ के नाम प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर सामने आए हैं। इसके अलावा भारत रत्न और राज्यसभा सांसद सचिन तेंदुलकर का नाम भी इस लिस्ट का हिस्सा है। जिन अन्य लोगों के नाम इस लिस्ट में शामिल हैं, उनमें बॉलीवुड अभिनेता जैकी श्रॉफ और गांधी परिवार से जुड़े सतीश शर्मा के नाम भी शामिल हैं। इसके अलावा नीरा राडिया का भी नाम इस लिस्ट का हिस्सा है।
अमीरों ने ट्रस्ट्स के जरिए क्यों छिपाए अपने पैसे?
पैंडोरा पेपर्स की जांच के बाद यह सामने आया है कि अमीरों ने ट्रस्ट्स के जरिए विदेश में अपनी वित्तीय लेनदेने की जानकारियां छिपाईं। इसकी दो मुख्य वजहें रहीं...
1. बाहरी देश में निवेश के दौरान अपनी असल पहचान छिपाने और विदेशी संस्थाओं (खासकर कंपनियों) से खुद का नाम दूर रखने के लिए, ताकि टैक्स अधिकारियों के लिए उन तक पहुंचना नामुमकिन हो जाए।
2. अपने नकद, शेयर होल्डिंग, रियल एस्टेट, एयरक्राफ्ट्स, यॉट और अन्य निवेशों को लेनदारों और कानूनी एजेंसियों से बचाने के लिए।
भारत में कौन-कौन से बड़े नाम उजागर?
1. पैंडोरा पेपर्स में अनिल अंबानी का नाम है, जिन्होंने कुछ समय पहले ही चीन के तीन बैंकों की ओर से 70 करोड़ डॉलर (करीब 5200 करोड़ रुपये) वापस मांगे जाने पर ब्रिटेन की एक कोर्ट में खुद को दिवालिया घोषित किया। लीक दस्तावेजों में सामने आया है कि उनके पास 18 संपत्तियां हैं।
2. पीएनबी घोटाले के बाद जनवरी 2018 में भारत छोड़कर भागने वाले नीरव मोदी ने अपनी बहन पूर्वी के जरिए ब्रिटेन के वर्जिन आइलैंड्स में एक फर्म तैयार करवाई थी, जो कि सिंगापुर की ट्राइडेंट ट्रस्ट कंपनी की कॉरपोरेट प्रोटेक्टर के तौर पर काम कर रही है।
3. इसी रिपोर्ट के मुताबिक, बायोकॉन की प्रमोटर किरण मजूमदार शॉ के पति ने एक ट्रस्ट खड़ा करवाया था, जिसकी जिम्मेदारी इनसाइडर ट्रेडिंग के लिए सेबी द्वारा प्रतिबंधित किए गए एक व्यक्ति को दी गई थी। हालांकि, शॉ ने सोमवार को कहा कि उनके ऑफशोर ट्रस्ट में किए गए निवेश पूरी तरह प्रामाणिक और वैध हैं। उन्होंने ट्वीट में कहा, "पैंडोरा पेपर्स में मेरे पति के ट्रस्ट पर गलत तरह से रिपोर्टिंग की जा रही है। उनका ट्रस्ट पूरी तरह से स्वतंत्र ट्रस्टियों द्वारा मैनेज किया जाता है और जैसा कि इन रिपोर्ट्स में आरोप लगाया गया है कोई भी भारतीय नागरिक इस ट्रस्ट में ऊंचा कद नहीं रखता।"
4. इसके अलावा 2016 में ब्रिटेन के वर्जिन आइलैंड में स्थापित एक कंपनी के बिकने पर सचिन तेंदुलकर, उनकी पत्नी अंजलि और उनके ससुर को भी फायदा पहुंचने का मामला सामने आया है। हालांकि, तेंदुलकर के वकील का दावा है कि उनके सारे निवेश वैध हैं और इनका खुलासा टैक्स लेने वाले अफसरों को दिया जा चुका है।