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Hindi News ›   India News ›   36 illegal bungalows built on banks of Indrayani river in Pune demolished, PCMC took action on orders of NGT.

Maharashtra: पुणे में इंद्रायणी नदी के किनारे बने 36 अवैध बंगले ध्वस्त, NGT के आदेश पर नगर निगम ने की कार्रवाई

Sat, 17 May 2025 06:21 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे Published by: बशु जैन Updated Sat, 17 May 2025 06:21 PM IST
सार

पुणे में रिवर विला परियोजना के खिलाफ एनजीटी में कार्यकर्ता तानाजी गंभीरे ने याचिका दायर की थी। विला का निर्माण इंद्रायणी नदी की नीली बाढ़ रेखा के किनारे किया गया है, जहां विकास गतिविधियों पर प्रतिबंध है। एनजीटी ने नगर निगम को छह महीने के भीतर इन सभी 36 बंगलों को ध्वस्त करने का आदेश दिया था।

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36 illegal bungalows built on banks of Indrayani river in Pune demolished, PCMC took action on orders of NGT.
ध्वस्त किए गए बंगले। - फोटो : PTI

विस्तार

पुणे में इंद्रायणी नदी के किनारे बने 36 अवैध बंगलों को नगर निगम ने ध्वस्त कर दिया। पिंपरी चिंचवाड़ नगर निगम (पीसीएमसी) के अधिकारियों ने राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) के आदेश पर यह कार्रवाई की। ध्वस्तीकरण के दौरान बंगलों के मालिक मायूस नजर आए। नगर निगम कर्मचारियों ने भवनों के ध्वस्तीकरण के दौरान लोगों को हटाया। 
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पुणे में रिवर विला परियोजना के खिलाफ एनजीटी में कार्यकर्ता तानाजी गंभीरे ने याचिका दायर की थी। उन्होंने कहा था कि विला का निर्माण इंद्रायणी नदी की नीली बाढ़ रेखा के किनारे किया गया है, जहां विकास गतिविधियों पर प्रतिबंध है। नीली रेखा 25 साल में एक बार नदी में आने वाली बाढ़ के स्तर को दर्शाती है।
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जुलाई 2024 में एनजीटी ने नगर निगम को छह महीने के भीतर इन सभी 36 ढांचों को ध्वस्त करने का आदेश दिया था। साथ ही बंगला मालिकों से पर्यावरण क्षति मुआवजे के तौर पर सामूहिक रूप से पांच करोड़ रुपये वसूलने का भी आदेश दिया था। इसके बाद पीसीएमसी ने प्रक्रिया शुरू की और बंगला मालिकों की सुनवाई शुरू की।
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इस बीच, 29 बंगला मालिकों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन शीर्ष अदालत ने उनकी अपील खारिज कर दी। इसके बाद भूमि और बंगला मालिकों ने एनजीटी से अपने आदेश की समीक्षा करने के लिए संपर्क किया। एनजीटी ने भी उनकी समीक्षा याचिका खारिज कर दी। एनजीटी से कोई राहत नहीं मिलने पर संपत्ति मालिकों ने फिर से सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सर्वोच्च न्यायालय ने चार मई को अपील का निपटारा कर दिया था और आदेश दिया था कि पीसीएमसी को बंगलों को गिराने के एनजीटी के आदेश को लागू करे और पर्यावरण को हुए नुकसान के लिए 5 करोड़ रुपये वसूलने चाहिए।

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36 illegal bungalows built on banks of Indrayani river in Pune demolished, PCMC took action on orders of NGT.
ध्वस्त किए गए बंगले। - फोटो : PTI
सुप्रीम कोर्ट ने नहीं किया था कार्रवाई करने में समय का जिक्र
इसके बाद शनिवार को पिंपरी चिंचवाड़ नगर निगम (पीसीएमसी) के अधिकारी और कर्मचारी भारी पुलिस बल के साथ सुबह चिखली गांव में रिवर विला परियोजना पर पहुंचे। यहां ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। नगर आयुक्त शेखर सिंह ने कहा कि नगर निगम ने बंगलों को ध्वस्त कर दिया, क्योंकि मानसून के दौरान ध्वस्तीकरण अभियान नहीं चलाया जा सकता। उन्होंने कहा कि किसी ने भ्रम पैदा करने की कोशिश की है कि सुप्रीम कोर्ट ने 4 मई को निगम को कार्रवाई करने के लिए छह महीने का समय दिया था।

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उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 4 मई के अपने फैसले में एनजीटी के आदेश को ही दोहराया है। एनजीटी ने ही 2024 में ध्वस्तीकरण का आदेश देते हुए पीसीएमसी को 6 महीने का समय दिया था। 17 मई को आदेशों का पालन करते हुए हमने सभी 36 अवैध ढांचों को ध्वस्त कर दिया। अब बंगला मालिकों से पांच करोड़ रुपये की वसूली से संबंधित एनजीटी के आदेश के दूसरे भाग को लागू किया जाएगा।  उन्होंने कहा कि मैं शहर के सभी लोगों से अपील करता हूं कि वे किसी भी खरीदारी से पहले उस क्षेत्र की जांच कर लें, जहां आवासीय परियोजना स्थित है, उसका लेआउट, अनुमोदन तथा समुचित जांच पड़ताल कर लें।

बंगले के मालिकों ने कहा कि उन्होंने और अन्य लोगों ने 2018 में मेसर्स जारे वर्ल्ड और मेसर्स वी स्क्वायर से भूखंड खरीदे थे। हमने सरकार की पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करके भूखंडों को अपने नाम पर स्थानांतरित कर लिया। जब जमीन अवैध थी तो भी पीसीएमसी के कुछ अधिकारियों ने उन्हें निर्माण कार्य जारी रखने को कहा। एक बंगला मालिक ने कहा कि मैंने अपना बंगला बनाने में एक करोड़ रुपये से ज़्यादा खर्च किए हैं और मैं आज भी 68,000 रुपये की ईएमआई चुका रहा हूं। अगर पीसीएमसी ने पहले बंगले के निर्माण के बाद उसके खिलाफ़ कार्रवाई की होती, तो आज यह स्थिति नहीं आती।

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