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संसद: मानसून सत्र में 31 विधेयकों पर विचार किए जाने की संभावना, सूची में सबसे पहले दिल्ली से जुड़ा अध्यादेश

Wed, 19 Jul 2023 06:10 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Wed, 19 Jul 2023 06:10 PM IST
सार

संसद के मानसून सत्र की शुरुआत 20 जुलाई से होगी। जानकारी के मुताबिक, मानसून सत्र 11 अगस्त तक चल सकता है। इस दौरान संसद के दोनों सदनों की कुल 17 बैठकें प्रस्तावित हैं।

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31 Bills are likely to be taken up during the Monsoon Session of the Parliament Latest News Update
संसद का बजट सत्र 2023 की शुरुआत - फोटो : Social Media

विस्तार

20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र के दौरान 31 विधेयकों पर विचार किए जाने की संभावना है। इस सूची में सबसे ऊपर दिल्ली से जुड़ा अध्यादेश है। सरकार कोशिश करेगी कि इसे दोनों सदनों से जल्द से जल्द से पास कराकर कानून का रूप दिया जाए। एक अहम बात यह भी है कि इसमें समान नागरिक संहिता को लेकर कोई भी जिक्र नहीं है।

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संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बताया कि सत्र कल से शुरू हो रहा है। इसलिए सर्वदलीय सदन के नेताओं की एक बैठक बुलाई गई थी। बैठक में 34 दलों और 44 नेताओं ने भाग लिया। हमें महत्वपूर्ण सुझाव मिले। सरकार के पास 31 विधायी सूचीबद्ध आइटम हैं। सभी दल मणिपुर पर चर्चा चाहते हैं और सरकार इस पर चर्चा के लिए तैयार है।
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सर्वदलीय बैठक में इन मुद्दों पर चर्चा कराने की मांग

  • कांग्रेस ने मानसून सत्र के दौरान सरकार से मणिपुर की स्थिति और ओडिशा रेल हादसे जैसे मुद्दों पर चर्चा कराने की मांग की। पार्टी की ओर से कहा गया कि ताली एक हाथ से नहीं बजती और अगर सरकार सदन चलाना चाहती है तो उसे विपक्ष को अपनी बात रखने का मौका देना चाहिए।
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  • सत्र से पहले सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में हिस्सा लेने के बाद लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि बैठक में हमने संसद के मानसून सत्र के दौरान मणिपुर की स्थिति पर चर्चा कराने की मांग की। हमारी मांग है कि प्रधानमंत्री सदन में आएं और मणिपुर की स्थिति पर चर्चा हो।
  • कांग्रेस नेता ने कहा कि उनकी पार्टी ने चीन से लगने वाली सीमा पर स्थिति, महंगाई, ओडिशा रेल हादसे, बेरोजगारी, संघीय ढांचे पर प्रहार जैसे मुद्दों पर भी चर्चा कराने की मांग की है। हम दिल्ली इसलिए आए हैं कि सदन में चर्चा करें और जनता के मुद्दों को उठाएं।


प्रह्लाद जोशी ने विपक्षी गठबंधन पर भी तंज कसा
इस बीच संसद के मानसून सत्र से पहले एनडीए की बैठक हुई। इस बैठक से पहले सरकार ने सभी दलों के साथ भी अहम बैठक की। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने विपक्षी गठबंधन पर भी तंज कसते हुए कहा कि नाम बदलने से लोग नहीं बदल जाएंगे। लोग तो वही हैं, यह तो वह बात है कि पुरानी वाइन और नई बोतल।

विपक्ष को हंगामा नहीं करना चाहिए: अठावले
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि सर्वदलीय बैठक में मैंने मुद्दा उठाया है कि सदन सुचारू रूप से चले, विपक्ष को हंगामा नहीं करना चाहिए। इसके अलावा मैंने दलितों और महिलाओं पर हो रहे अत्याचार और SC, ST को प्रमोशन और प्राइवेट सेक्टर में उन्हें आरक्षण देने का मुद्दा उठाया है। 

अधीर, अन्य नेताओं ने दिल्ली सेवा अध्यादेश पर प्रस्ताव का नोटिस दिया
कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी, टीएमसी के सौगत रॉय, द्रमुक के ए. राजा और आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन ने दिल्ली सेवा अध्यादेश के खिलाफ लोकसभा में वैधानिक प्रस्ताव लाने के लिए नोटिस दिया है। लोकसभा सचिवालय ने नोटिस स्वीकार कर लिया है। जब भी संसद सत्र के दौरान किसी अध्यादेश को बदलने के लिए विधेयक पेश किया जाता है, तो इसके विरोध में विपक्षी सदस्य वैधानिक प्रस्ताव पेश करते हैं।

11 अगस्त तक चलेगा सत्र
संसद के मानसून सत्र की शुरुआत 20 जुलाई से होगी। जानकारी के मुताबिक, मानसून सत्र 11 अगस्त तक चल सकता है। इस दौरान संसद के दोनों सदनों की कुल 17 बैठकें प्रस्तावित हैं।

मध्यस्थता विधेयक में संसोधनों को दी मंजूरी
केंद्रीय कैबिनेट ने मध्यस्थता विधेयक में संशोधनों को मंजूरी दे दी, जिसमें मध्यस्थता कार्यवाही पूरी करने की अधिकतम समयसीमा 360 दिन से घटाकर 180 दिन करना शामिल है। कानून मंत्रालय के विधेयक में आधिकारिक संशोधनों को गुरुवार से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में पेश किए जाने की संभावना है।  मध्यस्थता विधेयक, 2021 को दिसंबर 2021 में राज्यसभा में पेश किया गया था। बाद में इसे कानून और कार्मिक मामलों की संसदीय समिति के पास भेजा गया, जिसने अपनी रिपोर्ट दी। सूत्रों ने बताया कि मंत्रिमंडल ने जिन आधिकारिक संशोधनों को मंजूरी दी है, वे काफी हद तक संसदीय समिति की सिफारिशों पर आधारित हैं। सरकार की ओर से स्वीकार की गई पैनल की अन्य प्रमुख सिफारिशों के तहत मुकदमे से पहले मध्यस्थता को अनिवार्य के बजाय स्वैच्छिक बना दिया गया है।

संशोधनों में क्या-क्या?

  • उच्च सदन में लंबित विधेयक के अनुसार, पार्टियों के अदालत या न्यायाधिकरण से संपर्क करने से पहले दीवानी या वाणिज्यिक विवादों के मामलों में मुकदमे से पहले अनिवार्य मध्यस्थता का प्रावधान किया गया है।
  • असाधारण परिस्थितियों में एक पक्ष अदालत या न्यायाधिकरण से न केवल मध्यस्थता कार्यवाही शुरू होने से पहले बल्कि कार्यवाही जारी रहने के दौरान भी अंतरिम राहत मांग सकता है।
  • विधेयक के अनुसार वाणिज्यिक विवादों के अलावा ऐसे विवाद जिनमें केंद्र सरकार और राज्य सरकार एक पक्ष हैं, उनमें मध्यस्थता तब तक नहीं की जा सकेगी जब तक कि उन विवादों की प्रकृति को इस रूप में अधिसूचित नहीं किया जाता है कि उन्हें मध्यस्थता के लिए भेजा जा सकता है या नहीं।

प्रेस और पत्रिका पंजीकरण विधेयक को मंजूरी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को ‘प्रेस और पत्रिका पंजीकरण विधेयक’ को मंजूरी दे दी। इसके तहत प्रकाशकों पर अभियोजन और उन्हें जेल में डालने के प्रावधानों को समाप्त करने, पत्रिकाओं की पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रस्ताव किया गया है। विधेयक ‘प्रेस और पुस्तक पंजीकरण (पीआरबी) अधिनियम, 1867’ की जगह लेगा, जिसमें देश में मुद्रण और प्रकाशन उद्योग के पंजीकरण से संबंधित प्रावधान हैं।
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