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अलगाववादी गुटों के 300 और लोगों पर लगेगा पीएसए
राघवेंद्र नारायण मिश्र/ अमर उजाला, जम्मू
Updated Thu, 29 Sep 2016 03:57 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : PTI
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केंद्र सरकार अलगाववादियों को किसी तरह की रियायत देने के मूड में नहीं है। सुरक्षा एजेंसियों के इनपुट के आधार पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर सरकार को उपद्रवियों की नई सूची भेजी है। इनमें अलगाववादी गुटों के 300 लोगों के नाम हैं। केंद्र की सलाह पर सूची में शुमार अलगाववादियों और पत्थरबाजों पर राज्य सरकार पीएसए लगाने की तैयारी में हैं।
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अलगाववादियों को अलग-थलग कर सख्त कार्रवाई की रणनीति पर अमल शुरू हो गया है। शासन के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक आतंकी बुरहान वानी की मुठभेड़ में मौत के बाद से अबतक लगभग 285 लोगों पर पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। नई सूची पर कार्रवाई के बाद यह संख्या 700 तक पहुंच सकती है।
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पीएसए के लिए पहले चिह्नित किए गए लगभग 100 लोगों पर अबतक कार्रवाई लंबित है। इनमें से अधिकांश फरार हैं। कश्मीर में अब हालात सामान्य हो रहे हैं। इससे अलगाववादियों, उपद्रवियों और आतंकी गुटों की बेचैनी बढ़ी है।
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बदले हालात में अलगाववादी गुट अपनी प्रासंगिकता साबित करने के लिए अब सियासी पहल पर जोर देने लगे हैं। अलगाववादियों की बंद और हड़ताल के कलेंडर अब धीरे-धीरे बेअसर हो रहे हैं। घाटी से कर्फ्यू हटते ही आम लोगों की जिंदगी पटरी पर लौटती दिखने लगी है।
महबूबा भी अब रियायत के मूड में नहीं
हालात में सुधार होते ही लगी ट्रकों की कतार
उपद्रवियों के खौफ से घाटी की ओर रुख करने के घबराने वाले ट्रक ड्राइवरों से सेब के थोक व्यापारियों का समूह चिरौरी कर रहा है। हालात में थोड़ी सुधार के बाद अब सेब लेकर दूसरे राज्यों में जाने वाले ट्रकों की कतार रोजाना देखी जा सकती है।
इस स्थिति ने अलगाववादियों को हड़ताल कलेंडर में ढील के लिए मजबूर किया है। सूत्रों का कहना है कि मुहर्रम से पहले अलगाववादियों की हड़ताल का कलेंडर सिकुड़ सकता है।
महबूबा भी अब रियायत के मूड में नहीं
अलगाववादियों को उम्मीद थी कि बिगड़े हालात के कारण सरकार झुकेगी और उनके लिए वार्ता का विधिवत न्यौता आएगा। लेकिन केंद्र ने ज्यादा सख्त रुख अपनाया। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती भी अब अलगाववादियों को रियायत के मूड में नहीं दिख रहीं हैं।
महबूबा को नाराजगी है कि वालिद मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन के कुछ दिन बाद ही अलगाववादियों ने उनकी राह में कांटे बिछा दिए।
उपद्रवियों के खौफ से घाटी की ओर रुख करने के घबराने वाले ट्रक ड्राइवरों से सेब के थोक व्यापारियों का समूह चिरौरी कर रहा है। हालात में थोड़ी सुधार के बाद अब सेब लेकर दूसरे राज्यों में जाने वाले ट्रकों की कतार रोजाना देखी जा सकती है।
इस स्थिति ने अलगाववादियों को हड़ताल कलेंडर में ढील के लिए मजबूर किया है। सूत्रों का कहना है कि मुहर्रम से पहले अलगाववादियों की हड़ताल का कलेंडर सिकुड़ सकता है।
महबूबा भी अब रियायत के मूड में नहीं
अलगाववादियों को उम्मीद थी कि बिगड़े हालात के कारण सरकार झुकेगी और उनके लिए वार्ता का विधिवत न्यौता आएगा। लेकिन केंद्र ने ज्यादा सख्त रुख अपनाया। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती भी अब अलगाववादियों को रियायत के मूड में नहीं दिख रहीं हैं।
महबूबा को नाराजगी है कि वालिद मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन के कुछ दिन बाद ही अलगाववादियों ने उनकी राह में कांटे बिछा दिए।