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विदेशी नागरिक शिविरों में हुई 28 लोगों की मौत बीमारी से हुई: नित्यानंद राय
Wed, 27 Nov 2019 10:45 PM IST
अमित मंडल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमित मंडल
Updated Wed, 27 Nov 2019 10:45 PM IST
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राज्यसभा
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केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार को राज्यसभा में स्पष्ट किया कि असम में नजरबंद कर शिविरों में रखे गए 28 लोगों की मौत किसी भय या दवा कारण नहीं बल्कि विभिन्न बीमारियों के चलते हुई है। दरअसल असम में गैरकानूनी तरीके से रहने वाले विदेशी नागरिकों को नजरबंदी के लिए संचालित छह शिविरों में रखा गया था। गृहराज्य मंत्री ने बताया कि इन शिविरों में 2016 से 13 अक्तूबर तक 28 लोगों की मौत हुई है।
गृहराज्य मंत्री ने प्रश्नकाल के दौरान जवाब में बताया कि छह शिविरों में 988 विदेशी नागरिकों को रखा गया है। पूरक प्रश्र के जवाब में मंत्री ने बताया कि 28 मृतकों को हर्जाना नहीं दिया जा सकता है। ये सभी गैरकानूनी ढंग से देश में आकर रहने वाले थे जिन्हें पकड़े जाने पर नजरबंदी में रखा गया। इस दौरान बीमारी के कारण उनकी मौत हुई है लिहाजा मुआवजा या हर्जाना देने का कोई प्रावधान नहीं है। ये ऐसे लोग हैं जो बिना कागजात या पासपोर्ट के आ जाते हैं या उनकी समय सीमा समाप्त होने के बाद भी देश में रह रहे होते हैं हम इन्हें गैरकानूनी मानते हैं।
नित्यानंद राय ने इस शिविरों में चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध न होने की बात को गलत ठहराते हुए बताया कि असस सरकार ने जानकारी दी है कि नजरबंदी शिविरों में सभी मूलभूत सुविधाएं और चिकित्सा मुहैया कराई जाती है। शिविरों में मेडिकल कर्मचारियों के साथ अस्पताल की सुविधाएं भी मुहैया कराई जाती है। शिविर में मौजूद बंदियों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जाता है।
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गृहराज्य मंत्री ने प्रश्नकाल के दौरान जवाब में बताया कि छह शिविरों में 988 विदेशी नागरिकों को रखा गया है। पूरक प्रश्र के जवाब में मंत्री ने बताया कि 28 मृतकों को हर्जाना नहीं दिया जा सकता है। ये सभी गैरकानूनी ढंग से देश में आकर रहने वाले थे जिन्हें पकड़े जाने पर नजरबंदी में रखा गया। इस दौरान बीमारी के कारण उनकी मौत हुई है लिहाजा मुआवजा या हर्जाना देने का कोई प्रावधान नहीं है। ये ऐसे लोग हैं जो बिना कागजात या पासपोर्ट के आ जाते हैं या उनकी समय सीमा समाप्त होने के बाद भी देश में रह रहे होते हैं हम इन्हें गैरकानूनी मानते हैं।
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नित्यानंद राय ने इस शिविरों में चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध न होने की बात को गलत ठहराते हुए बताया कि असस सरकार ने जानकारी दी है कि नजरबंदी शिविरों में सभी मूलभूत सुविधाएं और चिकित्सा मुहैया कराई जाती है। शिविरों में मेडिकल कर्मचारियों के साथ अस्पताल की सुविधाएं भी मुहैया कराई जाती है। शिविर में मौजूद बंदियों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जाता है।
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