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प्रधानमंत्री आरोग्य योजना से जुड़ने के लिए 27 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश तैयार: नीति

Fri, 21 Sep 2018 05:46 AM IST
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Updated Fri, 21 Sep 2018 05:46 AM IST
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27 States and Union Territories ready to join the Prime Minister Health Plan
आयुष्मान भारत योजना 2018
महत्वकांक्षी स्वास्थ्य योजना प्रधानमंत्री आरोग्य योजना (पीएमजेएवाई) से जुड़ने के लिए 27 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश तैयार हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार यानी 23 सितंबर को इस योजना की शुरुआत करेंगे। यह जानकारी नीति आयोग के सदस्य और इस योजना के शिल्पकार वीके पॉल ने दी। उन्होंने कहा कि देश भर के सरकारी और निजी क्षेत्र के 15 हजार से अधिक अस्पतालों ने योजना से जुड़ने की इच्छा जताई है, जिनमें 7500 नीजि अस्पताल हैं। 
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योजना का उद्देश्य 10.74 करोड़ गरीब परिवारों को 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराना है। यह देश की कुल आबादी का 40 फीसदी है। इसे दुनिया का सबसे बड़ा सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रम कहा जा रहा है। इसका 60 फीसदी वित्त पोषण केंद्र सरकार करेगी और शेष राज्य करेंगे।
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पॉल ने कहा कि प्रधानमंत्री भले ही 23 सितंबर को योजना की शुरुआत करेंगे, लेकिन यह प्रभावी रूप से 25 सितंबर काम करेगा। 25 सिंतबर को पंडित दीन दयाल उपाध्याय की जयंती है। इस योजना के कारण चालू वित्त वर्ष में सरकारी खजाने पर 3,500 करोड़ रुपये का बोझ आएगा। पॉल के मुताबिक, प्रधानमंत्री के योजना की शुरुआत करने के साथ 26-27 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश भी तत्काल इसे शुरू कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि पांच या छह राज्यों ने इस पर हस्ताक्षर नहीं किया है। इससे जाहिर है कि वे इसे लेकर जबतक सहमत नहीं होते हैं, वहां यह योजना लागू नहीं होगी।
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अस्पताल में इलाज के लिए देना होगा पहचान पत्र

पॉल के मुताबिक, सरकार को अगले पांच साल में छोटे एवं मझोले शहरों में हजारों नए अस्पतालों के शुरू होने की उम्मीद है। कुछ राज्यों ने अस्पतालों को पैनल में शामिल करने की प्रक्रिया अभी शुरू की है। उन्होंने कहा कि पैनल में शामिल अस्पताल में इलाज के लिए संबंधित व्यक्ति को पहचान पत्र देना होगा। यह आधार कार्ड या वोटर कार्ड  या राशन कार्ड हो सकता है। लागत से जुड़े एक सवाल पर उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष में योजना के लिए केंद्र सरकार करीब 3,500 करोड़ रुपये देगी। उन्होंने कहा कि 2018-19 के बजट में 2,000 करोड़ रुपये का निर्धारण किया गया था।


पूर्ण रूप से शुरू होने में लगेगा समय

पॉल ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में छह महीने बचा है और 27 राज्य ही इसे तत्काल शुरू करेंगे। इसे पूर्ण रूप से शुरू होने में थोड़ा वक्त लगेगा। इसलिए इसमें 1500 करोड़ रुपये की और मांग की गई है। इस तरह केंद्र सरकार के बजट में यह राशि अब 3,500 करोड़ रुपये हो गई है। यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार को भरोसा है कि इस योजना को ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा जैसा माल एवं सेवा कर के मामले में हुआ, इस पर उन्होंने कहा कि सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाया है कि सूचना प्रौद्योगिकी प्रणाली में कोई समस्या पैदा न हो। उन्होंने कहा कि सॉफ्टवेयर का तेलंगाना में परीक्षण किया गया है। इसमें सुधार लाया गया है। 
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