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सुप्रीम कोर्ट: कोरोना काल में अपने माता-पिता को खो चुके बच्चों पर खर्च होंगे 25 करोड़ रुपये, जानिए क्या है मामला
Sat, 18 Sep 2021 08:46 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Sat, 18 Sep 2021 08:46 PM IST
सार
महामारी की दूसरी लहर से सर्वाधिक प्रभावित रहे राज्यों में से एक महाराष्ट्र ने मेडिकल कॉलेज प्रवेश से संबंधित एक पुराने मामले में शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री में ये रुपये जमा किए थे। अब इसका इस्तेमाल अनाथ बच्चों पर किया जा सकता है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : एएनआई
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना की वजह से परिजनों को खो चुके बच्चों की मदद के लिए अहम फैसला किया है। दरअसल, पांच साल पहले के एक मामले में महाराष्ट्र सरकार से शीर्ष कोर्ट की रजिस्ट्री में 20 करोड़ रुपये की राशि जमा कराई गई थी। ब्याज के चलते अब वह राशि बढ़कर 25 करोड़ रुपये हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इसका इस्तेमाल महाराष्ट्र में कोरोना के दौरान अपने माता-पिता को खो चुके बच्चों के कल्याण के लिए करने का समर्थन किया है।
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जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और बीवी नागरत्ना की पीठ ने इस सप्ताह के शुरू में कहा था कि महाराष्ट्र में लगभग 19,000 बच्चे ऐसे हैं, जिनके माता-पिता में से एक की मौत कोरोना की वजह से हुई है। 593 बच्चे ऐसे हैं, जिनके माता-पिता दोनों की मौत इस महामारी की वजह से हो गई। बता दें कि महामारी की दूसरी लहर से सर्वाधिक प्रभावित रहे राज्यों में से एक महाराष्ट्र ने मेडिकल कॉलेज प्रवेश से संबंधित एक पुराने मामले में शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री में ये रुपये जमा किए थे।
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने 17 जून 2021 को एक नीति तैयार की थी, जिसमें महामारी की वजह से अपने माता-पिता दोनों को खो चुके बच्चों के लिए पांच-पांच लाख रुपये की राशि फिक्स्ड डिपोजिट करने की बात कही गई थी। यह राशि बच्चों को बालिग होने पर मिलती। शीर्ष अदालत ने कहा कि राशि महाराष्ट्र सरकार को जारी करने का निर्देश दिए जाने से पहले वह एक शपथपत्र के जरिये ठोस बयान चाहती है।
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दूसरी ओर केंद्र सरकार कोरोना के कारण माता-पिता को खोने वाले बच्चों के मासिक वजीफे को 2,000 से बढ़ाकर 4,000 रुपये करने की योजना बना रही है। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पिछले दिनों कहा था कि इस संबंध में एक प्रस्ताव अगले कुछ हफ्तों में मंजूरी के लिए कैबिनेट के पास भेजा जा सकता है।