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कोरोना काल में अस्पतालों में 24 फीसदी कम हुए प्रसव, 31 फीसदी बच्चों को नहीं लगे टीके

Sat, 19 Sep 2020 07:29 AM IST
Kuldeep Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Sat, 19 Sep 2020 07:29 AM IST
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24 percent reduced deliveries in hospitals in Corona period 31 percent children were not vaccinated
Infant, Kid - फोटो : पेक्सेल्स

कोरोना से बचाव के लिए लॉकडाउन लगाया गया। संक्रमण की गति पर लॉकडाउन का असर हुआ या नहीं? यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है लेकिन इससे नौनिहालों को टीके से वंचित रहना पड़ा। स्थिति यह है कि इस वर्ष अप्रैल से जून के बीच देश के अस्पतालों में 24 फीसदी कम डिलीवरी हुई हैं। परिवार स्वास्थ्य मंत्रालय ने लॉकडाउन के दौरान प्रभावित स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में जानकारी दी है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार देश के अस्पतालों में 23.90 फीसदी महिलाओं की डिलीवरी हुई है।

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इस साल अप्रैल से जून के बीच लॉकडाउन में स्वास्थ्य सेवाओं में रुकावट
मंत्रालय ने लोकसभा में भी इन आंकड़ों को पेश किया है। लोगों को समय पर टीका भी नहीं लग पाया है। देश में 19.4 फीसदी शिशुओं को जन्म के बाद हेपेटाइटिस बी का टीका नहीं लग पाया। इसके अलावा टीकाकरण कार्यक्रम में पिछले वर्ष की तुलना में इस बार 31 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। अब तक के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब देश में टीकाकरण अभियान इस कदर प्रभावित हुआ है।
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19% बच्चों को जन्म के बाद नहीं लग सका हेपेटाइटिस-बी का टीका
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि महामारी की शुरुआत लॉकडाउन की घोषणा होने के कुछ समय तक स्वास्थ्य सेवाओं पर काफी बुरा असर पड़ा था।लेकिन लगातार राज्यों के साथ बैठकर और जिला स्तर पर निगरानी बढ़ाए जाने से जल्द ही सुधार भी देखने को मिला।
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उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली का हवाला देकर लॉकडाउन के दौरान की स्थिति बताई जा रही थी, लेकिन सभी तरह के आंकड़ों की समीक्षा के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत इस साल मार्च से अगस्त के बीच 10,96,048 माताओं की जांच की गई है।

लॉकडाउन के दौरान अस्पताल में होने वाली प्रसूतियों में 23.9 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। साथ ही 31 फीसदी टीकाकरण व 19.4 फीसदी हेपेटाइटिस बी के टीके में कमी देखने को मिली है। इसके अलावा और बीसीजी टीकाकरण में 30 से 40 तक की कमी दर्ज की गई है।


आठ महीने में चार लाख का उपचार 
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, कोरोना वायरस को लेकर 24 मार्च से लॉकडाउन होने के बाद अस्पतालों में ओपीडी इत्यादि पर काफी असर देखने को मिला। चूंकि स्वास्थ्य राज्य का विषय है, इसलिए केंद्र के पास एम्स की जानकारी है। दिल्ली एम्स में एक माह में करीब तीन लाख मरीजों का ओपीडी व आईपीडी (भर्ती) दोनों मिलाकर उपचार होता था। लेकिन 24 मार्च से लेकर अब तक 4,01,506 मरीजों को ही उपचार मिल पाया है।
 

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