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10 लाख से ज्यादा कमाई बताने वाले सिर्फ 24 लाख, कार खरीदने वाले 25 लाख

Wed, 28 Dec 2016 03:20 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 28 Dec 2016 03:20 AM IST
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24 lakh people have income above Rs 10 lakh but 25 lakh new cars bought ever year
प्रतीकात्मक तस्वीर

भारत में सिर्फ 24.4 लाख करदाता अपनी सालाना आय 10 लाख रुपये से अधिक दर्शाते हैं लेकिन पिछले पांच वर्षों से हर साल 25 लाख नई कारें खरीदी जा रही हैं। एक शीर्ष अधिकारी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि कारों की सालाना खरीद में 35,000 लक्जरी कारें भी हैं। 

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अधिकारी के मुताबिक, 125 करोड़ की आबादी वाले इस देश में 2014-15 के दौरान सिर्फ 3.65 करोड़ लोगों ने आयकर रिटर्न भरा और बड़ी संख्या में लोग आयकर दायरे से बाहर रहने में सफल रहे। उन्होंने कहा, ‘3.65 करोड़ लोगों (जिन्होंने 2014-15 में आयकर रिटर्न भरा) में से सिर्फ 5.5 लाख लोगों ने 5 लाख रुपये से अधिक का आयकर भरा और यह राशि कुल आयकर का 57 फीसदी रही। इसका मतलब यह हुआ कि आयकर रिटर्न भरने वाले 3.65 करोड़ लोगों में सिर्फ 1.5 प्रतिशत लोग ही कुल आयकर की 57 प्रतिशत राशि चुकाते हैं।’
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उन्होंने बताया कि जब कारों की बिक्री से आयकर रिटर्न की तुलना की जाए तो चौंकाने वाले नतीजे सामने आते हैं। उन्होंने बताया, ‘बहुत सारे लोगों की आय इतनी होती है कि वे कार खरीद सकते हैं लेकिन आयकर दायरे से बाहर हैं।’ अमूमन एक कार की लाइफ सात साल होती है और एक आम आदमी दूसरी कार पांच साल से पहले नहीं खरीद पाता है। 
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 जो लोग आयकर रिटर्न भरते हैं उनमें से 5.32 लाख लोग अपनी सालाना आय दो लाख रुपये से भी कम बताते हैं और इसलिए वे आयकर दायरे में नहीं आते हैं। उन्होंने बताया कि 24.4 लाख आयकर रिटर्न भरने वालों ने अपनी सालाना आय 10 लाख रुपये से अधिक बताई है और इनमें से 1.47 लाख आयकर दाताओं ने अपनी सालाना आय 50 लाख रुपये से अधिक बताई है।

उन्होंने बताया कि 2014-15 के दौरान 1.61 लाख ऐसे लोग थे जिनके आय स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) की गई लेकिन उन्होंने आयकर रिटर्न (आईटीआर) ही नहीं भरा। सन 2016 के दौरान भारत को आयकर से प्राप्ति इसकी जीडीपी का 16.7 प्रतिशत रही जबकि इसी वर्ष अमेरिका को आयकर से प्राप्ति जीडीपी का 25.4 प्रतिशत और जापान में 30.3 प्रतिशत थी। ऐसे लोगों की एक बड़ी तादाद है जो आयकर चुका सकते हैं लेकिन ऐसा नहीं करते।

उन्होंने बताया कि सरकार कर चोरी करने वालों पर नकेल कसने के प्रयास तेज कर रही है। नोटबंदी की घोषणा के बाद सभी लोगों को अपने 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट बैंकों में जमा करना जरूरी हो गया है और इनमें से जो राशि अघोषित आय से जुड़ी होगी, उस पर टैक्स लगाया जाएगा।

हर साल 35 हजार लक्जरी गाड़ियां 

24 lakh people have income above Rs 10 lakh but 25 lakh new cars bought ever year
जुटाए गए आयकर आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ 48,417 लोगों ने अपनी सालाना आय एक करोड़ रुपये से अधिक बताई है। लेकिन हर साल बिकने वाली बीएमडब्ल्यू, जगुआर, ऑडी, मर्सिडीज, पोर्शे और मासेराटी जैसी लक्जरी गाड़ियों की संख्या 35 हजार के करीब है।

कार डीलरों से कार खरीदारों का ब्योरा मांगा
नोटबंदी के बाद नकद राशि से कार खरीदने वाले अब सरकार के निशाने पर हैं। आयकर विभाग ने कार डीलरों से ऐसे लोगों का ब्योरा मांगा है। इस संबंध में आयकर विभाग डीलरों को नोटिस जारी कर रहा है। देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी के मुताबिक, दिसंबर के दौरान ग्रामीण इलाकों में कारों की बिक्री पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 18 फीसदी अधिक रही।

ग्रामीण इलाकों में शहरी इलाकोंकी तरह लोग कार की खरीदारी बैंक से कर्ज लेकर नहीं करते हैं। नवंबर आखिर और दिसंबर के पहले-दूसरे सप्ताह में नकद राशि से कार खरीदने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी। 
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