केरल में 23 साल के व्यक्ति को निपाह होने की आशंका, बीते साल हुई थी 17 की मौत
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केरल के रहने वाले एक 23 साल के व्यक्ति को निपाह वायरस होने की आशंका है। प्रारंभिक जांच में निपाह के कई लक्षण पाए गए हैं। इस बात की जानकारी सोमवार को राज्य की स्वस्थ्य मंत्री केके शैलजा ने दी है। उन्होंने तीन शहरों में फीवर क्लीनिक और निगरानी वार्ड खोलने की बात कही है।
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जिन डॉक्टरों ने बीते साल इस बीमारी का इलाज किया था, उन्हें कोच्चि आने को कहा गया है। विशेषज्ञों से मदद की बात कही गई है। जो लोग बीते दो हफ्तों में मरीज से मिले हैं, उन्हें भी स्क्रीनिंग कराने के लिए कहा गया है। जिले के मेडिकल अफसर केजी रीना का कहना है कि 50 लोगों की सूची बनाई गई है, उन्हें निगरानी में रखा जाएगा। जो भी लोग मरीज का इलाज कर रहे हैं, उन्हें भी जागरुक रहने को कहा गया है।
मरीज को बीते 10 दिनों से बुखार है। उसे डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। जांच के लिए उसके खून के सैंपल भेजे गए। सरकार ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। लोगों से कहा गया है कि डरे ना। मरीज के संपर्क में आए छह लोगों की पहचान कर ली गई है।
क्या है निपाह वायरस?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के मुताबिक निपाह वायरस तेजी से उभरता वायरस है, जो जानवरों और इंसानों में गंभीर बीमारी को जन्म देता है। निपाह के बारे में सबसे पहले 1998 में मलेशिया के कम्पंग सुंगाई निपाह से पता चला था। वहीं से इस वायरस को ये नाम मिला। उस वक्त इस बीमारी के वाहक सूअर बनते थे।
लेकिन इसके बाद जहां-जहां निपाह के बारे में पता चला, इस वायरस को लाने-ले जाने वाले कोई माध्यम नहीं थे। साल 2004 में बांग्लादेश में कुछ लोग इस वायरस की चपेट में आए। इन लोगों ने खजूर के पेड़ से निकलने वाले तरल को चखा था और इस तरल तक वायरस को लाने वाले चमगादड़ थे, जिन्हें फ्रूट बैट कहा जाता है।
इस बीमारी के लक्षण हैं सिर दर्द और तेज बुखार। हालत ज्यादा खराब हो तो मरीज कोमा में भी जा सकता है। इसकी कोई वैक्सीन भी नहीं है। ये वायरस बीते साल मई में भी फैला था। जिसमें 17 लोगों की मौत हो गई थी। मृतकों में मरीजों का इलाज करने वाली नर्स भी शामिल थी।