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काले धन पर तीन साल में 23 हजार से ज्यादा छापे

Sat, 08 Apr 2017 05:43 AM IST
amarujala.com, Presented By :संदीप भ्ाट्ट
amarujala.com, Presented By :संदीप भ्ाट्ट Updated Sat, 08 Apr 2017 05:43 AM IST
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23 thousand raid on black money in three years
काले धन के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ रही केंद्र सरकार ने बीते तीन वर्षों के दौरान जहां 23,064 छापे मारे, वहीं 2,814 मामलों में आपराधिक मुकदमे दायर किए गए और 3,893 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इस दौरान काले धन को सफेद बनाने वालों पर कार्रवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी 519 मामले दर्ज कर 14,933 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की। तीन वर्षों में विभिन्न एजेंसियों ने 1.37 लाख करोड़ रुपये की कर चोरी का खुलासा किया।
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केंद्रीय वित्त मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार बीते तीन वर्षों के दौरान मंत्रालय की कई एजेंसियों के मिल कर काम करने और निरंतर प्रयास से काले धन की समस्या से लड़ने में अपार सफलता मिली है। इस अवधि में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर विभागों ने अप्रत्याशित कार्रवाई  की।
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प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कर विभाग सबसे ज्यादा सक्रिय
अलोच्य अवधि के दौरान आयकर विभाग ने 17,525 छापों को अंजाम दिया। इसके अलावा सीमा शुल्क विभाग ने 2,509,  केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग ने 1,913 और सेवा कर विभाग ने 1,120 छापे मारे। इस दौरान केंद्रीय विभागों ने 1.37 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी का पता लगाया। इसमें से आयकर विभाग के अधिकारियों ने 69,434 करोड़ रुपये, सीमा शुल्क विभाग ने 11,405 करोड़ रुपये, केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग ने 13,952 करोड़ रुपये और सेवा कर विभाग ने 42,727 करोड़ रुपये की कर चोरी का खुलासा किया। इसके साथ ही 2,814 मामलों में आपराधिक मुकदमे किए गए। अधिकारियों का कहना है कि इन मामलों में 3,893 व्यक्तियों को गिरफ्तार भी किया गया।
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ईडी ने दर्ज किये 519 मामले

23 thousand raid on black money in three years
काले धन को सफेद बनाने के मामलों पर रोक लगाने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तेजी दिखाते हुए आलोच्य अवधि में 519 मामले दर्ज कर 396 मामले में सर्च ऑपरेशन चलाया। ईडी द्वारा 79 मामलों में गिरफ्तारी भी की गईं और 14,933 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की  गई।

बेनामी कानून फिर से
मंत्रालय के मुताबिक पिछले 28 वर्षों तक निष्प्रभावी रहे बेनामी प्रोहिबिशन कानून को नवंबर 2016 से व्यापक संशोधन के बाद प्रभावी बनाया गया। साथ ही 245 से अधिक बेनामी लेनदेन का पता लगाया गया। 124 मामलों में 55 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति अस्थायी रूप से जब्त भी की गई है।

कानूनों को तर्कसंगत बनाया गया
अधिकारियों का कहना है कि विभिन्न तरीकों से नकद लेनदेन पर नजर रखने और उसे नियंत्रित करने के लिए कानूनों को तर्कसंगत बनाया गया, कमियों को दूर किया गया है और दंडात्मक प्रावधानों को कठोर बनाया गया है। ऐसे तरीकों में दो लाख रुपये से ऊपर के नकदी लेनदेन में दंड का प्रावधान, अनुमति योग्य नकद खर्च की सीमा केवल 10 हजार रुपये रखना, पैन कार्ड प्राप्त करने और आयकर रिटर्न भरने के लिए आधार संख्या की अनिवार्यता तथा 50 हजार रुपये से अधिक की नकदी जमा के लिए पैन की अनिवार्यता और बैंक खातों से आधार को आवश्यक रूप में जोड़ना शामिल हैं।

शेल कंपनियों पर कार्रवाई
वित्त मंत्रालय का कहना है कि पिछले तीन वर्षों में हजारों शेल कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। ऐसे मामलों में कानून लागू करने वाली एजेंसियों यानी, आयकर विभाग, ईडी, एमसीए, एसएफआईओ व सीबीआई के माध्यम  से कार्रवाई की गई। इस दौरान सिर्फ आयकर विभाग की जांच में ही 1,155 शेल कंपनियों की जानकारी मिली, जिनका उपयोग 22,000 से अधिक लाभार्थी गैर कानूनी जरिए से कर रहे थे। ऐसे लाभार्थियों के नकली लेन-देन में शामिल रकम 13,300 करोड़ रुपये से अधिक हैं।

कार्रवाई और होगी तेज
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि राजस्व विभाग की विभिन्न एजेंसियां इतना करके ही चुप नहीं बैठेंगी, बल्कि इस दिशा में जांच और छापे की कार्रवाई और तेज की जाएगी।
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