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#CourageInKargil: चरवाहों से खाना बचाने की भूल पाक को पड़ी भारी, इस तरह हुआ साजिश का खुलासा
Wed, 22 Jul 2020 09:00 AM IST
अमित कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमित कुमार
Updated Wed, 22 Jul 2020 09:00 AM IST
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Kargil war
- फोटो : अमर उजाला
21 साल पहले कारगिल की ऊंची पहाड़ियों में पाकिस्तान ने एक बार फिर से मुंह की खाई थी। भारतीय सेना के साहस के सामने उसकी साजिश नहीं चल पाई और 1999 में भारतीय सेना ने पाक के सैनिकों को खदेड़ कारगिल में विजयी झंडा फहराया। करीब तीन महीने चली जंग के बाद 26 जुलाई को भारत ने दुश्मन के इरादों को नाकाम कर जीत हासिल की। मई की शुरुआत में ही पाक ने चुपचाप अपने सैनिकों की संख्या को कारगिल में इकट्ठा करना शुरू कर दिया था। पाक सैनिक धीरे-धीरे अपनी चौकियों पर क्षमता बढ़ा रहे थे। भारत को इसकी भनक तक नहीं लगने दी गई थी। मगर एक छोटी सी 'भूल' ने उसकी साजिश का पर्दाफाश कर दिया।
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आठ मई 1999 को पाकिस्तान ने एक बड़ी गलती की। पाक की छह नॉर्दर्न लाइट इंफेंट्री के कैप्टन इफ्तेखार और लांस हवलदार अब्दुल हकीम 12 सैनिकों के साथ कारगिल की आजम चौकी पर बैठे हुए थे। इनकी नजर पड़ी कि भारत के कुछ चरवाहे पास में ही अपने मवेशियों को चरा रहे हैं। इन चरवाहों को बंदी बनाया जाए या नहीं, इसे लेकर वो आपस में सलाह करने लगे। मगर इनमें से एक ने सलाह दी कि यहां तो पहले ही राशन की बहुत कमी है। ऐसे में अगर इन्हें बंदी बनाया तो अपने हिस्से के राशन में से इन्हें खिलाना पड़ेगा। आखिर में यही फैसला लिया गया कि चरवाहों को बंदी बनाने का फैसला सही नहीं होगा। इसलिए उन्हें जाने दिया गया।
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बस यही भूल उन्हें भारी पड़ गई। करीब डेढ़ घंटे बाद ये चरवाहे भारतीय सेना के जवानों के साथ वापस लौटे। भारतीय सैनिकों ने दूरबीन से मुआयना किया और इसके बाद एक हेलीकॉप्टर ने पूरे क्षेत्र की टोह ली। बस यही वो मौका था जब भारत को यह भनक लग गई थी कि कारगिल की पहाड़ियों में पाक सैनिकों ने अपना कब्जा जमा लिया है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी सेना के एक रिटायर्ड कर्नल अशफाक हुसैन ने कारगिल पर एक किताब भी लिखी है। उनके मुताबिक अगले दिन भारत के लामा हेलीकॉप्टर ने पाक चौकियों पर गोलियां बरसाईं।
अब भारतीय सेना को यह आभास हो गया था कि पाक की ओर से भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ हुई है। मगर उन्होंने पहले इसे खुद अपने स्तर पर सुलझाने का फैसला किया। इस वजह से भारत के राजनीतिक नेतृत्व को इसकी जानकारी बाद में मिली। एक पत्रकार को सेना के सूत्रों के हवाले से यह खबर मिली कि सीमा पर कुछ गड़बड़ है। यह जानकारी जैसे ही रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीज को मिली, उन्होंने तुरंत रूस का अपना दौरा रद्द कर दिया। इस तरह से सरकार को इस बारे में पहली जानकारी मिली।
अब भारतीय सेना को यह आभास हो गया था कि पाक की ओर से भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ हुई है। मगर उन्होंने पहले इसे खुद अपने स्तर पर सुलझाने का फैसला किया। इस वजह से भारत के राजनीतिक नेतृत्व को इसकी जानकारी बाद में मिली। एक पत्रकार को सेना के सूत्रों के हवाले से यह खबर मिली कि सीमा पर कुछ गड़बड़ है। यह जानकारी जैसे ही रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीज को मिली, उन्होंने तुरंत रूस का अपना दौरा रद्द कर दिया। इस तरह से सरकार को इस बारे में पहली जानकारी मिली।