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Gadchiroli Blast: NIA कोर्ट ने मकोका से बरी की मांग करने वालों की याचिका खारिज की, 2019 में हुआ था विस्फोट

Thu, 09 Mar 2023 10:46 PM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Jeet Kumar Updated Thu, 09 Mar 2023 10:46 PM IST
सार

विशेष एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) अदालत के न्यायाधीश राजेश कटारिया ने छह मार्च को तीन आरोपियों सोमसे मदावी, किसान हिदामी और परसराम तुलवी की याचिकाओं को खारिज कर दिया।

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2019 Gadchiroli blast, NIA court rejects pleas of three accused seeking discharge from MCOCA
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मुंबई की एक विशेष अदालत ने मई 2019 में महाराष्ट्र में गढ़चिरौली आईईडी विस्फोट मामले में तीन आरोपियों की याचिकाओं को खारिज कर दिया है, आरोपियों ने कड़े संगठित अपराध विरोधी कानून मकोका के प्रावधानों से मुक्ति की मांग की थी। नक्सलियों द्वारा किए गए विदर्भ क्षेत्र के गढ़चिरौली जिले में 1 मई, 2019 को एक आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) विस्फोट में क्विक रिस्पांस टीम के पंद्रह सुरक्षाकर्मी और एक नागरिक की मौत हो गई थी।

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आतंकवाद विरोधी कानून के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है
विशेष एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) अदालत के न्यायाधीश राजेश कटारिया ने छह मार्च को तीन आरोपियों सोमसे मदावी, हिदामी और परसराम तुलवी की याचिकाओं को खारिज कर दिया। गुरुवार को एक विस्तृत आदेश उपलब्ध कराया गया। तीनों और छह अन्य पर महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (मकोका), भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा के तहत हत्या और गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, आतंकवाद विरोधी कानून के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है।
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 आरोपी तुलवी ने दावा किया कि उसे अपराध में झूठा फंसाया गया
अगर मकोका के तहत आने वाले अपराधों का दोषी पाया जाता है, तो आरोपी मौत की सजा या आजीवन कारावास और न्यूनतम 1,50,000 रुपये का जुर्माना पाने के लिए उत्तरदायी हैं। अधिवक्ता शरीफ शेख के माध्यम से दायर अपने आवेदन में, आरोपी तुलवी ने दावा किया कि उसे अपराध में झूठा फंसाया गया है। दलीलों के दौरान, अधिवक्ता शेख ने अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया था कि उनके मुवक्किल पर मकोका के तहत मुकदमा चलाने के लिए, अभियोजन पक्ष को अधिनियम के तहत कथित अपराधों की सामग्री को साबित करना होगा।
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अन्य दो अभियुक्तों (मदावी और हिदामी) ने भी अपने अधिवक्ता वहाब खान के माध्यम से इसी तरह की दलीलें उठाईं। हालांकि, विशेष लोक अभियोजक जयसिंह देसाई ने डिस्चार्ज आवेदनों का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के सदस्य हैं।

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