2015 सर्जिकल स्ट्राइक: जब म्यांमार में घुसकर भारतीय जवानों ने आतंकियों की लाशें बिछा दीं

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्रीधर मिश्रा Updated Fri, 15 May 2020 11:46 PM IST
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म्यांमार की सरकार ने भारत को 22 उग्रवादी सौंपे हैं। इन्हें मणिपुर और असम में राज्य पुलिस को सौंपा गया है। ये उग्रवादी NDFB(S), UNLF, PREPAK (Pro), KYKL, PLA and KLO से संबंध रखते हैं। इन उग्रवादियों में से 10 मणिपुर में वॉन्टेड थे जबकि बाकियों की असम में तलाश थी। सूत्रों की मानें तो यह पूरा ऑपरेशन एनएसए अजित डोभाल के नेतृत्व में हुआ। ऐसे में हम आपको भारतीय सेना के उस आपरेशन के बारे में बताने जा रहे हैं, जब साल 2015 में जांबाज जवानों ने म्यांमार में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक किया था।
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  1. ऑपरेशन का प्लान: 4 जून 2015 को गृह मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर, एनएसए अजीत डोभाल, सेना प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग और अन्य अधिकारियों की बैठक में इस ऑपरेशन का प्लान बना।
  2. पीएम की हरी झंडी: म्यांमार में आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 जून को भारतीय सेना को मंजूरी दी थी।
  3. ऑपरेशन की तैयारी: भारतीय सेना के 21 पैरा कमांडोज ने इस ऑपरेशन का मॉक ड्रिल किया था। 5 दिनों तक ऑपरेशन की तैयारी चली।
  4. ऑपरेशन का दिन: 8 और 9 जून की रात को भारतीय सेना के जवान तीन टीमों में ध्रुव हेलीकॉप्टर से म्यांमार सीमा में दाखिल हुए। इसके बाद तड़के 3 बजे ऑपरेशन शुरू हुआ।
  5. 8 घंटों में ऑपरेशन खत्म: भारतीय सेना के जांबाज जवानों ने महज 8 घंटो मे इस ऑपरेशन को खत्म कर दिया था।
  6. क्या था इनपुट: भारतीय सेना के पास जानकारी थी कि म्यांमार के पोन्यु इलाके के पास उंजिया में उग्रवादी गुट 'द नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड- खापलांग' (NSCN-K) के कैंप सक्रिय हैं. 
  7. इन हथियारों से थे लैस: भारतीय सेना के जवानों के पास एक-दूसरे के बात करने के लिए रेडियो सेट थे. इसके अलावा उनके पास ग्रेनेड, नाइट विजन डिवाइस, ट्रेवोर राइफल, माउंटेड डिवाइस से लेकर रॉकेट लॉन्चर तक थे।
  8. दिल्ली कंट्रोलरूम की भूमिका: दिल्ली कंट्रोलरूम से भारतीय जवानों को सारी जरूरी जानकारी दी जा रही थी।
  9. म्यांमार को सूचना: ऑपरेशन जब काफी हद तक पूरा हो गया था तब भारत सरकार ने म्यांमार की सरकार को इसकी जानकारी दी थी।
  10. अधिकारियों के दौरे रद्द: इस ऑपरेशन के कारण एनएसए और सेना अध्यक्ष ने अपना दौरा रद्द किया था। नेशनल सिक्योरिटी एडवायजर अजीत डोवाल को बांग्लादेश जाना था और आर्मी चीफ को ब्रिटेन। 
  11. 100% कामयाबी: यह ऑपरेशन 100 फीसदी कामयाब था। इस पूरे ऑपरेशन में भारतीय सेना के किसी भी सैनिक को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। 

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