2009 अवमानना केसः प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका, कहा- इजाजत दें
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वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका फाइल की है। इसके तहत उन्होंने मांग की है कि उन्हें आपराधिक अवमानना केस के खिलाफ अपील करने का अधिकार दिया जाए ताकि केस बड़ी और दूसरी बेंच सुन सके।
Lawyer Prashant Bhushan today filed a writ petition before the Supreme Court seeking the right of appeal against conviction in original criminal contempt cases so that the cases can be heard by a larger and a different bench. pic.twitter.com/nFxZzzAZcs
— ANI (@ANI) September 12, 2020विज्ञापन
शीर्ष अदालत ने अटॉर्नी जनरल से मदद थी मांगी
इससे पहले गुरुवार को शीर्ष अदालत ने अधिवक्ता प्रशांत भूषण और पत्रकार तरुण तेजपाल के खिलाफ लंबित 2009 के अवमानना मामले में गुरुवार को अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से मदद करने का अनुरोध किया था।
कोर्ट ने तहलका पत्रिका में प्रकाशित साक्षात्कार में उच्चतम न्यायालय के कुछ तत्कालीन पीठासीन और पूर्व न्यायाधीशों पर कथित रूप से लांछन लगाने को लेकर भूषण और तेजपाल को नवंबर 2009 में अवमानना के नोटिस जारी किए थे।
तेजपाल उस वक्त इस पत्रिका के संपादक थे। न्यायमूर्ति एएम खानविलकर, न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ के समक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई के लिए यह मामला आया। भूषण की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने कहा कि इस मामले में कानून के बड़े सवालों पर विचार होना है और ऐसी स्थिति में इसमें अटॉर्नी जनरल की मदद की जरूरत होगी।
रिट (याचिका) क्या है
व्यक्तियों या संस्थानों द्वारा अपने लाभ के लिए दायर की जाती है। यदि मूल अधिकार का उल्लंघन राज्य द्वारा किया जाता है तो राज्य के विरुद्ध न्याय पाने के लिए संविधान के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय में जबकि अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय में writ petition (रिट याचिका) दाखिल करने का अधिकार दिया गया है।