मालेगांव विस्फोट मामले में कर्नल पुरोहित, साध्वी प्रज्ञा समेत सात लोगों पर आरोप तय
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2008 मालेगांव विस्फोट मामले में आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित की याचिका को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अदालत ने खारिज करते हुए आरोप तय कर दिए हैं। लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित और साध्वी प्रजा सहित सातों दोषियों पर आरोप तय किए गए हैं।
एनआईए की विशेष अदालत ने वर्ष 2008 के मालेगांव बम धमाका मामले में लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर सहित अन्य के खिलाफ आरोप तय किए हैं। मालेगांव मामले में सभी सात आरोपियों के खिलाफ गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून (यूएपीए) और आईपीसी की धाराओं के तहत आरोप तय किए गए हैं।
इस धमाका मामले में सातों आरोपियों पर आतंकवाद की साजिश रचने सहित हत्या और अन्य अपराध का आरोप भी दर्ज किया है। सभी आरोपियों पर आईपीसी की गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून (यूएपीए) और आईपीसी की धाराओं के तहत इन पर मुकदमा चलाया जाएगा। इस मामले में अगली सुनवाई 2 नवंबर को होगी।
फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश वीएस पडलकर ने कहा कि सभी आरोपियों पर अभिनव भारत संस्था बनाने और 2008 में मालेगांव धमाका करने का आरोप लगाया जाता है जिसमें छह लोग मारे गए थे।29 सितंबर 2008 को हुए इस धमाके में छह लोगों की जान चली गई थी 100 से अधिक लोग घायल हुए थे।
जज ने कहा, साजिश को दिया अंजाम :
आरोप तय करने के बाद तय जज पडालकर ने कहा कि, ‘अभिनव भारत संगठन का गठन आतंकवाद फैलाने के लिए आम लक्ष्य के साथ हुआ था और आरडीएक्स के साथ एक बम मालेगांव में मोटरसाइकिल पर लगाया गया था जिसमें छह लोगों की मौत हो गई थी और 101 अन्य घायल हो गए थे। एक आतंकी गतिविधि करने के लिए आरोपी एक साथ आए, आपराधिक साजिश रची और अपनी साजिश को अंजाम दिया।
साध्वी प्रज्ञा ने पूरे मामले को साजिश बताया :
आरोप तय होने के बाद सभी सात आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताया है। साध्वी प्रज्ञा ने कहा कि यूपीए के शासनकाल में कर्नल पुरोहित को फंसाने की साजिश रची गई। कर्नल पुरोहित आतंकवादी नहीं बल्कि राष्ट्रवादी हैं। साध्वी ने कहा कि वीर सावरकर की संस्था अभिनव भारत आतंकवादी संगठन कैसे हो सकती है।
इससे पहले सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने कर्नल पुरोहित की उनके खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था और यह तय माना गया था कि मंगलवार को अदालत कर्नल पुरोहित, साध्वी प्रज्ञा समेत सभी आरोपियों पर आरोप तय किए जाएंगे। आरोपी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को 5 लाख के निजी मुचलके पर जमानत मिल चुकी है। मालेगांव धमाका मामले में साध्वी प्रज्ञा समेत सात आरोपियों को अप्रैल 2017 में बॉम्बे हाईकोर्ट जमानत मिल गई थी।
2008 Malegaon Blasts case: NIA court rejects Lt Col Purohit's plea of deferring the framing of charges and said that the charges are ready, it will frame the charges today itself. pic.twitter.com/5AAlUHrjWy
— ANI (@ANI) October 30, 2018
यह है मामला :
उत्तर महाराष्ट्र के मालेगांव में 29 सितंबर, 2008 को एक मस्जिद के पास एक मोटरसाइकिल पर बंधे विस्फोटक सामग्री में विस्फोट होने से छह लोगों की मौत हो गई थी और 100 से अधिक घायल हो गए थे। पुरोहित व साध्वी प्रज्ञा के अलावा आरोपियों में मेजर (सेवानिवृत्त) रमेश उपाध्याय, समीर कुलकर्णी, अजय राहिरकर, सुधाकर द्विवेदी और सुधाकर चतुर्वेदी शामिल थे।
कौन हैं कर्नल पुरोहित
मालेगांव ब्लास्ट मामले में अभियुक्त बनाए गए कर्नल श्रीकांत पुरोहित का संबंध दक्षिण पंथी संगठन अभिनव भारत से बताया जाता है। बॉम्बे हाइकोर्ट ने एनआईए की रिपोर्ट के आधार पर कहा था, पुरोहित वह हैं जिन्होंने हिंदू राष्ट्र के लिए अलहदा संविधान बनाने के साथ, एक अलग भगवा झंडा बनाया। उन्होंने हिंदुओं पर मुस्लिमों के अत्याचार का बदला लेने पर भी विचार-विमर्श किया।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुरोहित की याचिका को अस्वीकार कर दिया था।
जांच एजेंसियों ने मामले की सुनवाई के दौरान बताया था कि मालेगांव ब्लास्ट को कथित तौर पर अभिनव भारत नामक दक्षिणपंथी संस्था ने अंजाम दिया था। एनआईए के मुताबिक, पुरोहित ने गुप्त बैठकों में हिस्सा लेकर धमाकों के लिए विस्फोटक तक जुटाने की मदद की थी। इस मामले में 17 अगस्त 2017 को कोर्ट के सामने पुरोहित ने खुद को राजनीति का शिकार होने की बात कही थी।
मालेगांव विस्फोट में कब-क्या हुआ :
- एसटीएफ की जांच में अभिनव भारत संस्था का नाम आया
- 24 अक्तूबर, 2008 को असीमानंद, पुरोहित और साध्वी प्रज्ञा की गिरफ्तारी
- जुलाई, 2009 में स्पेशल कोर्ट ने सभी आरोपियों पर मकोका लगाया
- जुलाई 2010 में बांबे हाईकोर्ट ने मकोका बरकरार रखा
- 31 मई 2016 को एनआईए ने दाखिल किया नया आरोपपत्र
- मई 2016 में आरोपियों ने बरी के लिए दाखिल की याचिका
- 25 अप्रैल, 2017 को बांबे हाईकोर्ट ने साध्वी प्रज्ञाको सशर्त जमानत दी
-23 अगस्त 2017 को पुरोहित भी जमानत पर रिहा
- 27 दिसंबर, 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने मकोका हटाने का निर्देश दिया
- 30 अक्तूबर 2018 को पुरोहित, प्रज्ञा समेत सभी 7 पर आरोप तय