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मालेगांव ब्लास्ट केस के सभी आरोपी बरी: प्रज्ञा ठाकुर, प्रसाद पुरोहित के साथ किस-किस पर था केस, क्या थे आरोप?

Thu, 31 Jul 2025 01:24 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Thu, 31 Jul 2025 01:24 PM IST
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सार
मालेगांव ब्लास्ट केस में कौन-कौन आरोपी गिरफ्तार किए गए थे? पुलिस और जांच एजेंसियों ने इन्हें किस आधार पर पकड़ा था? इन पर आरोप क्या थे? इन पक्षों ने बचाव में क्या दलीलें रखीं? कोर्ट में इस मामले में कब क्या हुआ? आइये जानते हैं...
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2008 Malegaon Blast Case know all accused from Pragya Thakur to Prasad Purohit others know accusations explain
2008 मालेगांव ब्लास्ट केस के सभी आरोपी बरी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुंबई में गुरुवार को एक विशेष एनआईए अदालत ने 2008 के मालेगांव ब्लास्ट केस के सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया। जिन लोगों को बरी किया गया है, उनमें भाजपा की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा से लेकर भारतीय सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित और रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय के नाम भी शामिल हैं। 


बता दें कि 29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित मालेगांव में रमजान के महीने में एक जबरदस्त धमाका हुआ था। इस ब्लास्ट में छह लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। हालांकि, आरोपियों की गिरफ्तारी के 17 साल बाद अब एनआईए कोर्ट ने इस मामले में महाराष्ट्र के आतंक-रोधी दस्ते (एटीएस) की जांच में कई खामियां मिलने की बात कही। साथ ही इन आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत भी न पेश किए जाने का मामला उठा। इसके बाद अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया। गौरतलब है कि मालेगांव ब्लास्ट केस में फैसला करीब 17 साल बाद आया है। इस मामले में एक आरोपी को तो 2011 में जमानत मिल गई थी, लेकिन छह आरोपी आठ साल तक जेल में बंद रहे और उन्हें 2017 में जमानत मिली। 


Malegaon Blast Verdict: मालेगांव विस्फोट मामले में साध्वी प्रज्ञा समेत सभी आरोपी बरी; एनआईए कोर्ट का फैसला

मालेगांव ब्लास्ट केस में कौन-कौन आरोपी गिरफ्तार किए गए थे? पुलिस और जांच एजेंसियों ने इन्हें किस आधार पर पकड़ा था? इन पर आरोप क्या थे? इन पक्षों ने बचाव में क्या दलीलें रखीं? कोर्ट में इस मामले में कब क्या हुआ? आइये जानते हैं...

Malegaon Blast Case: बाइक में हुआ था धमाका, सात आरोपी और 17 साल बाद फैसला; जानें क्या है मालेगांव विस्फोट केस

पहले जानें- कौन हैं मालेगांव ब्लास्ट केस के आरोपी, क्या थे उन पर आरोप?


1. प्रज्ञा सिंह ठाकुर 

क्या थे आरोप?
प्रज्ञा सिंह ठाकुर उर्फ साध्वी प्रज्ञा जिन्हें स्वामी पूर्णा चेतनानंद गिरी के नाम से जाना जाता है, मध्य प्रदेश की निवासी हैं। वे इस केस में आरोपी नंबर-1 थीं। प्रज्ञा ठाकुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की सदस्य रही हैं। मालेगांव ब्लास्ट केस में वह पहली आरोपी थीं, जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार किया था। 
एटीएस ने जब इस मामले की जांच शुरू की तो उसे पता चला कि मालेगांव ब्लास्ट एक एलएमएल फ्रीडम मोटरसाइकिल में बम लगाकर अंजाम दिया गया। इस बाइक के प्रज्ञा ठाकुर के होने का आरोप लगा। इतना ही नहीं एटीएस की थ्योरी के मुताबिक, प्रज्ञा ठाकुर ने इसकी साजिश से जुड़ी कई बैठकें कीं और अन्य आरोपियों को ब्लास्ट को अंजाम देने के लिए सभी चीजें मुहैया कराने की बात कही। 


कोर्ट में क्या हुआ?
प्रज्ञा ठाकुर ने दलील दी कि वह इस साजिश का हिस्सा नहीं थीं और एटीएस ने अवैध तरह से उन्हें हिरासत में रखकर टॉर्चर किया। प्रज्ञा ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर खुद को गलत तरह से गिरफ्तार करने का आरोप लगाया। जेल में रखे जाने के दौरान उन्होंने कई मौकों पर अपने बिगड़ते स्वास्थ्य और कैंसर से जूझने तक की बात कही। हालांकि, उनकी जमानत याचिका कई मौकों पर खारिज हुई।

हालांकि, एटीएस से 2011 में केस लेने के बाद 2016 में एनआईए ने जो चार्जशीट दाखिल की, उसमें कहा गया कि जिस बाइक की वजह से प्रज्ञा ठाकुर को ब्लास्ट से जोड़ा गया, वह घटना से पहले लंबे समय से उनके पास थी ही नहीं। इतना ही नहीं कई गवाह, जिन्होंने ब्लास्ट की साजिश से जुड़ी बैठकों को सुनने की बात कही थी, उन्होंने बाद में अपना बयान बदल लिया। बाद में प्रज्ञा ठाकुर को 2017 में बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। 

2. प्रसाद श्रीकांत पुरोहित

क्या थे आरोप?
2008 मालेगांव ब्लास्ट केस में प्रसाद पुरोहित को एटीएस ने गिरफ्तार किया था। वे सेना में सेवारत अधिकारी हैं। महाराष्ट्र एटीएस का दावा था कि प्रसाद पुरोहित ने 2006 में अभिनव भारत संगठन की स्थापना में भूमिका निभाई थी। इसी संगठन के जरिए बम धमाकों के लिए फंड्स इकट्ठा किए गए। पुरोहित पर भी ब्लास्ट की साजिश रचने के लिए कई बैठकों में हिस्सा लेने का आरोप था। पुरोहित पर आरोप लगा था कि वह इन बैठकों में अलग झंडा और संविधान बनाने की बात कहते थे और इस्राइल या फिर थाईलैंड में एक निर्वासित सरकार बनाने का विचार प्रसारित करते थे। एटीएस ने पुरोहित के खिलाफ केस में एक और आरोपी रमेश उपाध्याय के साथ हुई उनकी बातचीत का हवाला दिया था और फोन टैपिंग को सबूत के तौर पर पेश किया था। 


कोर्ट में क्या हुआ?
पुरोहित ने दावा किया कि उनके मालेगांव ब्लास्ट केस से जुड़ी जिन बैठकों में शामिल होने का दावा किया जाता है, उनमें वे सेना के खुफिया अधिकारी के तौर पर हिस्सा लेते थे, ताकि कट्टरवाद के खिलाफ नए सूत्र बनाए जा सकें। पुरोहित ने यह भी दलील दी कि खुफिया इकाई में काम करने वाले सैन्य अधिकारी के लिए आरडीएक्स जैसे विस्फोटक हासिल करना नामुमकिन था। 

सुनवाई के दौरान सेना के कई अधिकारियों ने पुरोहित के पक्ष में गवाही देते हुए कहा कि एटीएस ने उन्हें बयान देने के लिए धमकी दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में पुरोहित को जमानत दे दी और इसके बाद वे फिर सेना के साथ जुड़ गए। 

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3. रमेश उपाध्याय

क्या थे आरोप?
भारतीय सेना के रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय इस मामले में गिरफ्तार होने वाले चौथे आरोपी थे। एटीएस ने दावा किया था कि फरीदाबाद में एक बैठक के दौरान उपाध्याय ने मामले में सह-आरोपी प्रसाद पुरोहित के साथ हिंदू राष्ट्र बनाने और इसके अलग संविधान के विचार का समर्थन किया था। इतना ही नहीं नासिक में भोसला सैन्य स्कूल में एक बैठक में उपाध्याय को मालेगांव ब्लास्ट केस के लिए फंडिंग देने वाले अभिनव भारत संगठन का कार्यकारी अध्यक्ष चुना गया था। 



कोर्ट में क्या हुआ?
रमेश उपाध्याय ने कहा कि उनके फोन की एटीएस की तरफ से टैपिंग की गई, जो कि कानून और निजी स्वायत्तता का उल्लंघन था। उन्होंने एटीएस पर सबूतों को गढ़ने का आरोप लगाया और कहा कि गवाहों पर दबाव डालकर उनके खिलाफ बयान देने के लिए मजबूर किया गया। 

4. अजय राहिरकर

क्या थे आरोप?
महाराष्ट्र के पुणे से जुड़े व्यापारी अजय राहिरकर को एटीएस ने नवंबर 2008 को गिरफ्तार किया था। एटीएस ने आरोप लगाया था कि अभिनव भारत संगठन का गठन 2006 में पुणे में उनके ही घर में हुआ था और वे इस संगठन के ट्रेजरर रहे। एटीएस ने आरोप लगाया था कि राहिरकर मालेगांव ब्लास्ट की साजिश से जुड़ी कई बैठकों में शामिल हुए और अभिनव भारत के जरिए धमाकों के लिए फंड्स जुटाने में लगे रहे। इन फंड्स का इस्तेमाल प्रसाद पुरोहित के निर्देश पर हथियार जुटाने के लिए किया गया। 



कोर्ट में क्या हुआ?
मालेगांव ब्लास्ट केस में सबसे पहले जमानत अजय राहिरकर को ही मिली थी। उन्होंने कहा था कि एटीएस ने मामले में उन्हें झूठे दावों से फंसाया है और उनका ब्लास्ट से कोई लेना-देना नहीं था। बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें 9 नवंबर 2011 को जमानत दे दी। कोर्ट ने कहा कि एटीएस ने दावा किया है कि वे ब्लास्ट की साजिश रचने वाली बैठकों का हिस्सा रहे, लेकिन मीटिंग से जुड़ी कथित बातचीत से उनके इसमें शामिल रहने का कोई तथ्य नहीं मिला। 

5. सुधाकर चतुर्वेदी

क्या थे आरोप?
सुधाकर चतुर्वेदी सेना के खुफिया विभाग के लिए काम करता था। एटीएस का दावा था कि वह अभिनव भारत संगठन को कई अहम सूचनाएं पहुंचाने के लिए जिम्मेदार था और बम ब्लास्ट के वक्त वह नासिक के देवलाली में रुका था। एटीएस ने आरोप लगाया था कि आरडीएक्स के स्रोतों का पीछा करने पर इसका एक ठिकाना चतुर्वेदी के किराए के घर पर मिला था। आतंक-रोधी दस्ते ने कहा था कि जिस तरह के विस्फोटक के सैंपल चतुर्वेदी के घर पर मिले, वह मालेगांव ब्लास्ट में इस्तेमाल हुए आरडीएक्स से मेल खाते थे। 

कोर्ट में क्या हुआ?
सुधाकर चतुर्वेदी के मामले में एनआईए ने सेना के दो अफसरों के बयान को लिया था। चार्जशीट में इन दो अफसरों के हवाले से कहा गया कि 3 नवंबर 2008 को उन्होंने चतुर्वेदी के घर पर एटीएस के एक अधिकारी को देखा था और वह फर्श पर कुछ रगड़ता पाया गया था। एनआईए के मुताबिक, चतुर्वेदी के घर से आरडीएक्स के सैंपल का मिलना और इस घटनाक्रम ने फॉरेंसिक सबूतों को लेकर शक पैदा कर दिया। 

हालांकि, मामले में गवाह के तौर पर पेश हुए एटीएस अधिकारी ने सबूतों को गढ़ने के आरोपों को नकारा था और दावा किया था कि इस तरह की कहानी 2015 के बाद सामने लाई गई, ताकि आरोपी खुद को बचा सकें। हालांकि, इसके बाद मामले में गवाह बयान से पलट गए और चतुर्वेदी के ब्लास्ट की साजिश से जुड़ी बैठकों में शामिल होने पर बयान टालने लगे।

6. सुधाकर द्विवेदी 

क्या थे आरोप?
मालेगांव ब्लास्ट केस में द्विवेदी को 2008 में ही गिरफ्तार किया गया था। एटीएस का दावा था कि उसके पास से जो लैपटॉप जब्त किया गया था, उसमें बाकी आरोपियों के साथ जो बैठक हुई, उसकी कई ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग्स मौजूद थीं। एटीएस ने उसके और अन्य आरोपियों के आवाज के सैंपल के जरिए बैठक में उन सभी की मौजूदगी का दावा किया था। आरोप था कि नासिक में अगस्त 2007 में हुई बैठक में कर्नल पुरोहित और द्विवेदी ने एक सीडी दिखाई थी, जिसमें हिंदुओं के साथ बर्बरता को प्रदर्शित किया गया था। एटीएस ने कहा था कि अप्रैल 2008 में भोपाल में हुई एक बैठक में आरोपियों ने इन बर्बरताओं का बदला लेने की साजिश रची। 

कोर्ट में क्या हुआ?
अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में कहा कि द्विवेदी के खिलाफ जो रिकॉर्डिंग्स मिली हैं, उन पर भरोसा किया जा सकता है। हालांकि, द्विवेदी और अन्य आरोपियों ने कहा कि जब्ती के बाद उनके लैपटॉप को सील नहीं किया गया था और इसकी सामग्री पर भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसके साथ छेड़छाड़ की संभावना बढ़ जाती है। 

7. समीर कुलकर्णी

क्या थे आरोप?
मालेगांव धमाके के मामले में कोर्ट में जितनी भी सुनवाई हुईं समीर कुलकर्णी लगभग सभी में मौजूद रहे। पुणे में एक सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर काम करने वाले समीर कुलकर्णी पर आरोप लगे कि वह हिंदुओं के खिलाफ हो रही बर्बरता का बदला लेने से जुड़ी चर्चा में शामिल रहे थे। 



कोर्ट में क्या हुआ?
कुलकर्णी ने दावा किया कि एटीएस ने उन्हें झूठे सबूतों के आधार पर फंसाया और उनके खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए सही सबूत तक नहीं हैं।  उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें अवैध तरीके से पहले हिरासत में लिया गया और फिर गिरफ्तार कर लिया गया। कुलकर्णी ने यह भी कहा कि सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई। उन्होंने अपने ऊपर आतंक-रोधी कानून यूएपीए लगाए जाने के फैसले को भी चुनौती दी थी। 

8. दो और आरोपी, जिन्हें नहीं किया जा सका गिरफ्तार

एटीएस और एनआईए ने दो और लोगों के नाम आरोपी के तौर पर चार्जशीट में शामिल किए थे। हालांकि, इन्हें कभी गिरफ्तार नहीं किया जा सका। इनमें एक नाम रामचंद्र कालसांगरा उर्फ रामजी और संदीप दांगे का था। आरोप था कि मध्य प्रदेश के इंदौर के रहने वाले यह दोनों लोग ब्लास्ट की साजिश में शामिल थे और साध्वी प्रज्ञा की जिस एलएमएल मोटरसाइकिल में बम रखकर ब्लास्ट किया गया उसे कालसांगरा ही चलाता था। इन दोनों के प्रज्ञा ठाकुर के संपर्क में होने की बात सामने आई थी और कालसांगरा पर बाइक में बम लगाने का आरोप लगा था। 
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