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देश में बीस करोड़ लोग हैं मानसिक बीमार, 'पागल' के टैग से डरकर नहीं कराते उपचारः रिपोर्ट

Mon, 23 Dec 2019 07:22 PM IST
संदीप भट्ट डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संदीप भट्ट Updated Mon, 23 Dec 2019 07:22 PM IST
सार

  • आईसीएमआर रिपोर्ट का दावा- 2017 में 19.73 करोड़ लोग थे मानसिक रुप से बीमार
  • वर्ष 1990 की तुलना में लगभग दो गुने हो गए मानसिक बीमार लोग
  • नौकरी में अनिश्चितता, शादी और आर्थिक चिंताओं ने बढ़ाई लोगों की समस्या

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200 million Indians live with mental health disorders says icmr report

विस्तार

देश में मानसिक बीमार लोगों की संख्या चिंताजनक रुप से बढ़ती जा रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2017 में देश में लगभग 19.73 करोड़ लोग किसी न किसी प्रकार की मानसिक बीमारी के शिकार थे। यह संख्या पूरी आबादी की 14.3 फीसदी है जो किसी भी देश के लिए चिंता की वजह हो सकती है। इनमें 4.57 करोड़ लोग अवसाद और 4.49 करोड़ लोग किसी न किसी बात की चिंता से मानसिक बीमारी के शिकार थे। अगर सभी बीमारियों के हिसाब से तुलना करें तो मानसिक बीमारी कुल बीमारियों की लगभग 4.7 फीसदी थी। यह 1990 की मानसिक बीमारियों की तुलना में लगभग दो गुनी थी।

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सोमवार को जारी आईसीएमआर की एक रिपोर्ट (ग्लोबल बर्डेन ऑफ डिसीज स्टडी 2017) में दावा किया गया है कि कुल मानसिक बीमारियों में डिप्रेशन या मानसिक अवसाद की भूमिका सबसे ज्यादा है। यह लगभग 33.8 फीसदी है। इसके बाद 19 फीसदी आंकड़े के साथ चिंता दूसरी सबसे बड़ी मानसिक समस्या है जो लोगों को परेशान कर रही है। बौद्धिक दिव्यांगता के भी 10.8 फीसदी मरीज इसका बड़ा हिस्सा हैं। वहीं सीजोफ्रेनिया के 9.8 फीसदी मरीज मानसिक बीमारी के शिकार बताए गए हैं।
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रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि उत्तर भारत के कम विकसित राज्यों में मानसिक बीमारों की संख्या ज्यादा है जबकि दक्षिण के अपेक्षाकृत संपन्न राज्यों में मानसिक बीमारों की संख्या कम थी। आत्महत्या और मानसिक बीमारी के बीच सीधा संबंध पाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक मानसिक बीमार लोग आत्महत्या के ज्यादा प्रयास करते हैं। रिपोर्ट में यह भी पाया गया है कि मानसिक रुप से बीमार महिलाएं पुरुषों की तुलना में आत्महत्या के ज्यादा प्रयास करती हैं।

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क्यों इलाज नहीं कराते लोग

आईसीएमआर के निदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने रिपोर्ट जारी करने के अवसर पर कहा कि मानसिक बीमारी किसी भी अन्य सामान्य बीमारियों की तरह का एक शारीरिक विकार है जिसे उचित इलाज के जरिए दूर किया जा सकता है। विभिन्न कारणों से यह किसी भी स्वस्थ व्यक्ति को अपनी चपेट में ले सकती है। लेकिन जागरुकता की कमी के कारण मानसिक बीमारी को लोग पागलपन से जोड़कर देखते हैं। इसी डर से इलाज कराने से भी बचते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि अगर एक बार मानसिक बीमारी का इलाज करवाया जाए तो लोग उन्हें पागल समझने लगेंगे। उन्होंने कहा कि लोगों को इस भ्रांति से बचने के साथ-साथ किसी भी प्रकार की मानसिक समस्या होने पर अच्छे मनोचिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

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