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1993 Serial Blasts: अदालत से दो पूर्व आबकारी अधिकारियों को राहत, विभागीय कार्रवाई का आदेश किया रद्द

Sun, 10 Mar 2024 03:58 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 10 Mar 2024 03:58 PM IST
सार

1993 Serial Blasts: बंबई उच्च न्यायालय ने केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग के दो सेवानिवृत्त अधिकारियों को 1993 के सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में राहत दी है। उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश को रद्द किया गया है।

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1993 serial blasts: HC relief to 2 former Excise officials accused of allowing landing of explosives
बंबई उच्च न्यायालय - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

बंबई उच्च न्यायालय ने केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग के दो सेवानिवृत्त अधिकारियों को 1993 के सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में राहत दी है। अदालत ने बीस साल बाद उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही के आदेश को रद्द किया। उन पर विस्फोटकों को उतारने की अनुमति देने का आरोप था।

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'कार्रवाई के आदेश को रद्द किया'
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर की खंडपीठ ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश को रद्द किया। पीठ ने कहा कि सेवानिवृत्त अधिकारियों के खिलाफ कोई सबूत नहीं हैं।

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'वेतन और पेंशन जैसे सभी लाभ मिलेंगे'
उच्च न्यायालय ने अपने चार मार्च के फैसले में कहा, "केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग के सेवानिवृत्त अधीक्षक एसएम पडवाल और यशवंत लोटाले वेतन और पेंशन जैसे सभी लाभ के हकदार होंगे। जो उन्हें दो महीने के भीतर प्रदान किए जाएंगे। मुंबई में 12 मार्च 1993 को अलग-अलग इलाकों में बम धमाके हुए थे। जिनमें 257 लोगों की मौत हो गई थी और 700 से ज्यादा घायल हो गए थे।" 

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'100 लोगों को ठहाराया दोषी'
एक विशेष अदालत ने बाद में मामले में 100 लोगों को दोषी ठहराया और 23 अन्य को बरी कर दिया। उच्च न्यायालय ने कहा कि पडवाल और लोटाले मामले में किसी आपराधिक मुकदमे का सामना नहीं कर रहे हैं। उपलब्ध कथित साक्ष्यों के आधार पर उनके खिलाफ आरोप साबित नहीं होते। 

'आरोप साबित नहीं करते सबूत'
उच्च न्यायालय ने कहा, "हमारा निष्कर्ष यह है कि यह एक ऐसा मामला है, जहां कोई सबूत नहीं था और सजा का आदेश पारित करते समय अनुशासनात्मक कार्रवाई का निर्णय गलत है।"

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