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Rare Case :नाबालिग की सुप्रीम कोर्ट से गुहार, मेरा लिवर देकर पिता की जान बचाने दो, यूपी सरकार से मांगा जवाब

Fri, 09 Sep 2022 01:39 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Fri, 09 Sep 2022 01:39 PM IST
सार

बालक की याचिका पर शीर्ष कोर्ट ने यूपी सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस बालक के पिता को जान बचाने के लिए लिवर की जरूरत है। वह गंभीर रूप से बीमार है। चूंकि बालक की उम्र कम है, इसलिए देश के अंगदान कानून इसमें बाधक बन सकते हैं। 

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17-year son wants to donate liver to father, seeks permission from SC
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social media

विस्तार

उत्तर प्रदेश का 17 साल का एक बेटा गंभीर रूप से बीमार अपने पिता को अपना लिवर डोनेट करना चाहता है। इसके लिए उसने सुप्रीम कोर्ट से इजाजत देने की गुहार लगाई है। 
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बालक की याचिका पर शीर्ष कोर्ट ने यूपी सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस बालक के पिता को जान बचाने के लिए लिवर की जरूरत है। वह गंभीर रूप से बीमार हैं। चूंकि बालक की उम्र कम है, इसलिए देश के अंगदान कानून इसमें बाधक बन सकते हैं। अब देखना होगा कि विशेष परिस्थिति व बच्चे की पिता की जान बचाने की आकांक्षा के चलते राज्य सरकार व सुप्रीम कोर्ट क्या फैसला सुनाएगी। 

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प्रधान न्यायाधीश यूयू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले में उत्तर प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य विभाग से जवाब मांगा है। यूपी के स्थायी वकील को स्वास्थ्य सचिव लखनऊ को अदालत के आदेश से अवगत कराने को कहा है। याचिका के अनुसार लड़के के पिता की हालत गंभीर है और उन्हें लीवर ट्रांसप्लांट की जरूरत है। इसके लिए बालक ने शीर्ष अदालत से अनुमति मांगी है। 


12 सितंबर को यूपी के अधिकारी तलब
शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में यूपी के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सोमवार 12 सितंबर को अपने समक्ष उपस्थित रहने को कहा है। यह देखने के लिए कि नाबालिग बच्चा अंगदान कर सकता है? कोर्ट ने मामले का प्रारंभिक परीक्षण करने को कहा है।  

भारतीय कानून केवल असाधारण परिस्थितियों में ही नाबालिगों के जीवित अंग दान करने की अनुमति देता है। मानव अंगों के प्रत्यारोपण नियम 2014 में कहा गया है कि नाबालिगों को जीवित अंग या ऊतक दान की अनुमति नहीं दी जाएगी। असाधारण परिस्थितियों में इसकी इजाजत उपयुक्त सक्षम प्राधिकारी और संबंधित राज्य सरकार की पूर्व अनुमति से और तथ्यों की पूर्ण छानबीन के बाद दी जा सकती हैै। 

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