Rare Case :नाबालिग की सुप्रीम कोर्ट से गुहार, मेरा लिवर देकर पिता की जान बचाने दो, यूपी सरकार से मांगा जवाब
बालक की याचिका पर शीर्ष कोर्ट ने यूपी सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस बालक के पिता को जान बचाने के लिए लिवर की जरूरत है। वह गंभीर रूप से बीमार है। चूंकि बालक की उम्र कम है, इसलिए देश के अंगदान कानून इसमें बाधक बन सकते हैं।
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बालक की याचिका पर शीर्ष कोर्ट ने यूपी सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस बालक के पिता को जान बचाने के लिए लिवर की जरूरत है। वह गंभीर रूप से बीमार हैं। चूंकि बालक की उम्र कम है, इसलिए देश के अंगदान कानून इसमें बाधक बन सकते हैं। अब देखना होगा कि विशेष परिस्थिति व बच्चे की पिता की जान बचाने की आकांक्षा के चलते राज्य सरकार व सुप्रीम कोर्ट क्या फैसला सुनाएगी।
Supreme Court issues notice to the Uttar Pradesh government on a plea of a 17-year-old boy seeking permission to donate his liver to his father who needs liver transplantation and is in critical condition. pic.twitter.com/dgDANTAKUP
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) September 9, 2022
प्रधान न्यायाधीश यूयू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले में उत्तर प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य विभाग से जवाब मांगा है। यूपी के स्थायी वकील को स्वास्थ्य सचिव लखनऊ को अदालत के आदेश से अवगत कराने को कहा है। याचिका के अनुसार लड़के के पिता की हालत गंभीर है और उन्हें लीवर ट्रांसप्लांट की जरूरत है। इसके लिए बालक ने शीर्ष अदालत से अनुमति मांगी है।
12 सितंबर को यूपी के अधिकारी तलब
शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में यूपी के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सोमवार 12 सितंबर को अपने समक्ष उपस्थित रहने को कहा है। यह देखने के लिए कि नाबालिग बच्चा अंगदान कर सकता है? कोर्ट ने मामले का प्रारंभिक परीक्षण करने को कहा है।
भारतीय कानून केवल असाधारण परिस्थितियों में ही नाबालिगों के जीवित अंग दान करने की अनुमति देता है। मानव अंगों के प्रत्यारोपण नियम 2014 में कहा गया है कि नाबालिगों को जीवित अंग या ऊतक दान की अनुमति नहीं दी जाएगी। असाधारण परिस्थितियों में इसकी इजाजत उपयुक्त सक्षम प्राधिकारी और संबंधित राज्य सरकार की पूर्व अनुमति से और तथ्यों की पूर्ण छानबीन के बाद दी जा सकती हैै।