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प्रदूषण से हर साल मरते हैं 15 लाख हिंदुस्तानी, फिर भी पर्यावरण चुनावी मुद्दा नहीं, विशेषज्ञ चिंतित
Wed, 08 May 2019 08:09 PM IST
Amit Digital
अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली
Published by: Amit Digital
Updated Wed, 08 May 2019 08:09 PM IST
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वायु प्रदूषण
- फोटो : PTI
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प्रदूषण दिल्ली की एक बड़ी समस्या बन चुकी है। इसकी वजह से दिल्ली में सांस लेना भी दूभर हो गया है। हर साल लगभग 15 लाख भारतीय प्रदूषण की वजह से मौत के मुंह में समा जाते हैं। इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद पर्यावरण यहां राजनीतिक दलों की प्रमुखता में शामिल नहीं है। जनता भी इस मुद्दे पर बहुत सक्रिय नहीं है। उसे मुफ्त की घोषणाओं की बात तो समझ आती है लेकिन प्रदूषण के कारण हो रहा नुकसान उसकी प्राथमिकता में अब भी नहीं है।
हालांकि, अब इस फ्रंट पर यह अच्छी खबर मानी जा सकती है कि धीरे-धीरे प्रदूषण राजनीतिक दलों की प्रमुखता में आ रहा है। पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से भाजपा, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस तीन प्रमुख दल चुनाव लड़ रहे हैं। तीनों ही दलों के उम्मीदवारों ने अपने-अपने चुनावी घोषणा पत्र में प्रदूषण को बड़ी समस्या मानते हुए इससे निबटने के उपाय करने का वायदा किया है।
भाजपा उम्मीदवार गौतम गंभीर ने वायदा किया है कि अगर वे सांसद बनते हैं तो अपने क्षेत्र में अत्याधुनिक मशीनें लगवाकर कूड़े का निस्तारण करवाएंगे। उन्होंने इस कूड़े से बिजली पैदा करने की बात भी कही है जिससे न सिर्फ कूड़े का निस्तारण होगा, बल्कि वह आय का एक जरिया भी बन सकेगा।
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इसी तरह कांग्रेस उम्मीदवार अरविंदर सिंह लवली ने भी अपने चुनावी घोषणा पत्र में आनंद विहार जैसे इलाके में खतरनाक स्तर तक पहुंच जाने वाले वायु प्रदूषण को खतरनाक मानते हुए अत्याधुनिक परिचालन व्यवस्था को लागू कर वाहनों का भार कम करते हुए प्रदूषण स्तर को सुधारने की बात कही है।
आम आदमी पार्टी उम्मीदवार आतिशी मार्लेना ने कहा है कि सांसद बनने के 100 दिन के अंदर वे दिल्ली के कचरे के निस्तारण का समाधार करेंगी।
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हालांकि, अब इस फ्रंट पर यह अच्छी खबर मानी जा सकती है कि धीरे-धीरे प्रदूषण राजनीतिक दलों की प्रमुखता में आ रहा है। पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से भाजपा, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस तीन प्रमुख दल चुनाव लड़ रहे हैं। तीनों ही दलों के उम्मीदवारों ने अपने-अपने चुनावी घोषणा पत्र में प्रदूषण को बड़ी समस्या मानते हुए इससे निबटने के उपाय करने का वायदा किया है।
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भाजपा उम्मीदवार गौतम गंभीर ने वायदा किया है कि अगर वे सांसद बनते हैं तो अपने क्षेत्र में अत्याधुनिक मशीनें लगवाकर कूड़े का निस्तारण करवाएंगे। उन्होंने इस कूड़े से बिजली पैदा करने की बात भी कही है जिससे न सिर्फ कूड़े का निस्तारण होगा, बल्कि वह आय का एक जरिया भी बन सकेगा।
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इसी तरह कांग्रेस उम्मीदवार अरविंदर सिंह लवली ने भी अपने चुनावी घोषणा पत्र में आनंद विहार जैसे इलाके में खतरनाक स्तर तक पहुंच जाने वाले वायु प्रदूषण को खतरनाक मानते हुए अत्याधुनिक परिचालन व्यवस्था को लागू कर वाहनों का भार कम करते हुए प्रदूषण स्तर को सुधारने की बात कही है।
आम आदमी पार्टी उम्मीदवार आतिशी मार्लेना ने कहा है कि सांसद बनने के 100 दिन के अंदर वे दिल्ली के कचरे के निस्तारण का समाधार करेंगी।
क्या कहते हैं पर्यावरण विशेषज्ञ
प्रदूषण (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : PTI
पर्यावरण के क्षेत्र में काम कर रहे विशेषज्ञों का कहना था कि प्रदूषण की वजह से लोगों की जिंदगी को भारी नुकसान पहुंच रहा है। लोग बीमार पड़ते हैं, इससे न सिर्फ उनका स्वास्थ्य खराब होता है, बल्कि उन्हें भारी आर्थिक नुकसान भी होता है। ऐसे में साफ पर्यावरण देने को चुनावी मुद्दा बनाया जाना चाहिए। पर्यावरण विशेषज्ञ उस्मान के मुताबिक, चुनावी वायदों में पर्यावरण का न होना गंभीर चिंता की बात थी, लेकिन अब यह लोगों की समझ में आ रहा है, यह एक अच्छा संकेत है।
उन्होंने कहा कि विकासशील देशों की आर्थिक स्थिति को सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाले कारणों में खराब हवा और खराब स्वास्थ्य सेवाएं होती हैं। अगर सरकारें इन पर पर्याप्त ध्यान दें तो इससे उनकी अर्थव्यवस्था बेहतर हो सकती है।
पर्यावरण विशेषज्ञ मनु भटनागर के मुताबिक भारत के लिहाज से प्रदूषण बेहद गंभीर स्थिति में है, लेकिन यह चिंताजनक बात है कि राजनीतिक दलों की प्राथमिकता में यह अभी भी नहीं है। उन्होंने कहा कि जर्मनी जैसे देश में पर्यावरण प्रमुख मुद्दा है। इसका परिणाम है कि रूलिंग ग्रीन पार्टी ने इसे अपना अभियान बना दिया है।
आज जर्मनी की एक चौथाई बिजली की आपूर्ति केवल नवीकरणीय ऊर्जा के माध्यम से होती है। उन्होंने कहा कि भारत में न तो जनता और न ही राजनीतिक दल इस मामले को गंभीरता से लेते हैं जबकि भारत में इस पर काम करने की बहुत जरूरत है।
उन्होंने कहा कि विकासशील देशों की आर्थिक स्थिति को सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाले कारणों में खराब हवा और खराब स्वास्थ्य सेवाएं होती हैं। अगर सरकारें इन पर पर्याप्त ध्यान दें तो इससे उनकी अर्थव्यवस्था बेहतर हो सकती है।
पर्यावरण विशेषज्ञ मनु भटनागर के मुताबिक भारत के लिहाज से प्रदूषण बेहद गंभीर स्थिति में है, लेकिन यह चिंताजनक बात है कि राजनीतिक दलों की प्राथमिकता में यह अभी भी नहीं है। उन्होंने कहा कि जर्मनी जैसे देश में पर्यावरण प्रमुख मुद्दा है। इसका परिणाम है कि रूलिंग ग्रीन पार्टी ने इसे अपना अभियान बना दिया है।
आज जर्मनी की एक चौथाई बिजली की आपूर्ति केवल नवीकरणीय ऊर्जा के माध्यम से होती है। उन्होंने कहा कि भारत में न तो जनता और न ही राजनीतिक दल इस मामले को गंभीरता से लेते हैं जबकि भारत में इस पर काम करने की बहुत जरूरत है।
50 फीसदी बच्चों के फेफड़े प्रदूषण से प्रभावित
प्रतीकात्मक तस्वीर
हाल ही में जारी एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया था कि पूरे विश्व के 30 सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में से 22 भारत में हैं। इस सूची में प्रदूषण स्तर के मामले में दिल्ली को 11वें नंबर पर रखा गया था।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक अकेले प्रदूषण से भारत में हर साल लगभग 15 लाख लोगों की मौत होती है। अकेले दिल्ली के 50 फीसदी बच्चों के फेफड़े प्रदूषण के कारण प्रभावित हो रहे हैं जिससे न सिर्फ उनकी पढ़ने-लिखने की क्षमता प्रभावित हो रही है, बल्कि वे खतरनाक बीमारियों के शिकार भी हो रहे हैं।
दिल्ली में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब की स्थिति में है। PM10 और PM2.5 अपने निर्धारित मानक से 400 गुना अधिक तक की स्थिति में पहुंच जाते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक अकेले प्रदूषण से भारत में हर साल लगभग 15 लाख लोगों की मौत होती है। अकेले दिल्ली के 50 फीसदी बच्चों के फेफड़े प्रदूषण के कारण प्रभावित हो रहे हैं जिससे न सिर्फ उनकी पढ़ने-लिखने की क्षमता प्रभावित हो रही है, बल्कि वे खतरनाक बीमारियों के शिकार भी हो रहे हैं।
दिल्ली में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब की स्थिति में है। PM10 और PM2.5 अपने निर्धारित मानक से 400 गुना अधिक तक की स्थिति में पहुंच जाते हैं।