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चीन से लेकर पाकिस्तान की सीमा तक गरजेंगी तोपें

शशिधर पाठक/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 19 May 2017 07:19 AM IST
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145 cannon will included in indian Army artillery

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भारतीय सेना के तोपखाने में जान आने की उम्मीद जगी है। 1980 के दशक में हुए बोफोर्स तोप सौदे के बाद पहली बार सेना को अमेरिकी बीएई सिस्टम की दो अल्ट्रालाइट हॉवित्जर एम-777 तोपें मिली हैं। अगले कुछ सालों में ऐसी 145 तोपें सेना के तोपखाने शामिल होंगी।
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सेना ने इन तोपों को चीन की सीमा पर रक्षा पंक्ति को मजबूत करने के लिए लिया है। इसी क्रम में सेना मुख्यालय ने तोपखाना बेड़े में धनुष और कोरियन तकनीक की 100 के-9वज्र टी हॉवित्जर तोपों को भी शामिल करने का मन बनाया। इन तोपों के जरिए पाकिस्तान और चीन की सीमा पर रक्षा पंक्ति से मजबूत बनाया जाएगा।


एम-777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर
अमेरिका की बीएई सिस्टम से तोपों को लेने के लिए भारत ने नवंबर 2016 में लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस पर दस्तखत किया था। इस समझौते के तहत फॉरेन मिलिट्री सेल्स प्रक्रिया के तहत 145 तोपों ली जानी हैं। इनमें से 25 तोपों की आपूर्ति तैयार हालत में होनी है।

दो तोप आ चुकी है और शेष 23 तोपों की आपूर्ति 5-5 के तोपों के क्रम में होनी है। शेष 120 तोप महिन्द्रा डिफेंस देख में ही असेम्बल करेगी। 155एमएम, 39 कैलिबर क्षमता की ये तोंपे टाइटेनियम और एल्यूमीनियम अलॉय से बने होने के कारण काफी हल्की(4 टन भार) हैं।
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