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प्रवासी प्रजातियों को बचाने के लिए आज से मंथन करेंगे दुनियाभर के 130 देश

Mon, 17 Feb 2020 04:22 AM IST
Mohit Mudgal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Mohit Mudgal Updated Mon, 17 Feb 2020 04:22 AM IST
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130 countries share common concerns over migratory bird environment by saving insect moths
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

दुनिया के 130 देशों की चिंता जलवायु परिवर्तन के चलते प्रवासी प्रजातियों की घटती संख्या और लुप्त हो रही प्रजातियों को लेकर है। इसके तहत प्रवासी पक्षियों के संरक्षण के लिए उन कीट पतंगों को बचाने की जरूरत है जो मेहमान पक्षियों का भोजन बनते हैं।

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संयुक्त राष्ट्र की प्रवासी जीव प्रजाति संधि के तहत चिंतित देशों के प्रतिनिधि छह दिवसीय कॉप-13 सम्मेलन में सोमवार से गहन चर्चा कर समाधान खोजेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीडियो कांफ्रेंसिंग से सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे।
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प्रवासी पक्षियों के अलावा समुद्र के जलचर और अन्य प्रवासी प्राणी देशों की सीमाएं लांघ पलायन करते हैं। जलवायु परिवर्तन का गंभीर खतरा अब इन मेहमानों पर भी दिखने लगा है। इसमें बड़ा खतरा आने वाले पक्षियों के भोजन संकट का है। इन पक्षियों को जरूरी कीट पतंगे नहीं मिल रहे हैं। वहीं समुद्र में प्लास्टिक बड़ी चुनौती के रूप में है।
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केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि इस अंतरराष्ट्रीय 13वें सम्मेलन की मेजबानी भारत कर रहा है। पूरे एक सप्ताह प्रवासी पक्षियों, प्राणियों और जलचर के संवर्धन और संरक्षण पर चर्चा और समाधान खोजेंगे। प्रकृति और मनुष्य का विकास एक साथ हो।

नार्वे के साथ द्विपक्षीय करार

सम्मेलन से पूर्व रविवार को केंद्रीय मंत्री जावड़ेकर ने नार्वे के पर्यावरण मंत्री सेन्हो रोतवन के साथ द्विपक्षीय बैठक कर एक करार किया। दोनों देशों की ओर से जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण पर संयुक्त बयान जारी किया। दोनों देशों के बीच तकनीकी के आदान प्रदान, ज्वाइंट रिसर्च के साथ विभिन्न मुद्दों पर सहयोग पर सहमति बनी है।

दोनों देशों का ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप 2020 को सुपर इयर फॉर इनवायरमेंट के तहत पूरे दशक का एजेंडा तय करेंगे। नार्वे के मंत्री प्रधानमंत्री ने क्लीन इंडिया मिशन की तारीफ करते हुए कहा कि वे इससे प्रभावित हैं। इस क्षेत्र में नार्वे भारत के साथ दीर्घकालिक सहयोग करेगा।

समुद्र में प्लास्टिक जलचरों की मुसीबत

जावड़ेकर ने बताया समुद्र में प्लास्टिक सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने बताया भारत ने सिंगल यूज प्लास्टिक वेस्ट पर काबू पाया है। भारत में समुद्र से करीब 20 हजार टन  प्लास्टिक कचरा होता है। जिसमें करीब 15 हजार टन ही हम निकाल पाते हैं जबकि पांच टन रह जाता है। हमारे यहां प्रति व्यक्ति सालाना करीब 11 किलो प्लास्टिक की खपत है। जबकि अमेरिका में करीब  सौ किलो प्रति व्यक्ति है। उनका कहना है कि सम्मेलन के माध्यम से हम आधुनिक तकनीक अपनाने, सभी देशों पर दबाव बनाने के साथ तत्काल एक्शन को राजी करेंगे।

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