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योगी के 100 दिन कितने 'काम' के, खबर पढ़कर खुद ही जानिए

Tue, 27 Jun 2017 05:17 PM IST
amarujala.com- Written by : हरेन्द्र सिंह मोरल
amarujala.com- Written by : हरेन्द्र सिंह मोरल Updated Tue, 27 Jun 2017 05:17 PM IST
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100 days of yogi govt, know about key points

मंगलवार को उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के 100 दिन पूरे हो गए। विधानसभा चुनावों में 300 से ज्यादा सीटों के प्रचंड बहुमत से सत्ता में आई भाजपा ने गोरखपुर के सांसद और फायरब्रांड नेता योगी आदित्यनाथ को देश के सबसे महत्वपूर्ण सूबे की जिम्मेदारी सौंपी तो उम्‍मीदों का बड़ा बोझ भी उन्हें थमा दिया। इसके 

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अलावा योगी को पुरानी सरकार से विरासत में भी तमाम चुनौतियां मिलीं जिनका हल करना उनकी पहली जिम्मेदारी बन गया। हालांकि उम्‍मीदों के अनुरूप मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक के बाद एक ताबड़तोड़ फैसले कर यह साबित करने का प्रयास किया कि वह इस जिम्मेदारी को निभाने के‌ लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं।
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चाहे वह कानून व्यवस्‍था का मुद्दा हो या महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध की रोकथाम का, चाहे वह किसानों के बहुप्रतिक्षित लोन माफी का मामला हो या बूचड़खानों पर कार्रवाई का। तमाम मुद्दों पर योगी सरकार ने शुरूआत में गंभीर रुख दिखाया और उन पर तेजी से काम भी किया। अब जबकि सरकार के 100  दिन पूरे हो चुके हैं तो यह जानना भी जरूरी हो जाता है कि तीन महीने से ज्यादा के समय में सरकार आखिर चली कितनी दूर?

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100 days of yogi govt, know about key points

कानून व्यवस्‍था 
यूपी में भाजपा से पहले की अखिलेश सरकार को कानून व्यवस्‍था के मुद्दे पर हमेशा घेरा जाता था। योगी मुख्यमंत्री बने तो उनसे सबसे ज्यादा उम्‍मीदें बिगड़ती कानून व्यवस्‍था में सुधार को लेकर ही बनीं, लेकिन पहले 100 दिनों में सरकार इस मुद्दे पर जूझती नजर ही आई। जेवर गैंगरेप, मथुरा में सर्राफ हत्याकांड, रामपुर में युवतियों से सरेआम छेड़छाड़ जैसे मुद्दों पर सरकार को खासी बदनामी झेलनी पड़ी। सरकार की शुरूआत के डेढ़ महीने में ही प्रदेश के क्राइम में 27 फीसदी की बढोत्तरी देखने को मिली थी। हालांकि इससे पार पाने के लिए सरकार ने थोक के भाव अधिकारियों के ट्रांसफर किए लेकिन कोई खास नतीजा नहीं निकला। नतीजतन सरकार अभी भी इस मुद्दे पर जूझ रही है। 

किसानों की कर्ज माफी 
कहा जाता है कि यूपी में किसानों की कर्ज माफी का मुद्दा भाजपा के लिए टर्निंग प्वाइंट रहा। प्रदेश में सरकार बनी तो सबसे पहला सवाल भी कर्ज माफी का ही सामने आया। कर्ज माफी की घोषणा के कारण ही शुरूआती 15 दिनों तक कैबिनेट की बैठक नहीं हो सकी। लंबे इंतजार के बाद पहली बैठक हुई तो सरकार ने प्रदेश के एक लाख से ज्यादा किसानों के 36 हजार करोड़ रुपये के कर्ज माफ करने की घोषणा कर दी। इसे सरकार का बड़ा कदम बताया गया, लेकिन हैरत की बात ये है कि तीन महीने बीतने के बाद भी अभी तक प्रदेश के किसी किसान को इसका लाभ नहीं मिल पाया है। इसकी बड़ी वजह है कि लोन माफी की योजना से जुड़ी तमाम शर्तें जो आम किसान को इस राहत से दूर ले जाती हैं। सरकार अभी तक इस योजना पर गाइडलाइन ही जारी नहीं कर सकी है।

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पेट्रोल पंपों पर छापे 
सरकार गठन के बाद यूपी की एसटीएफ ने प्रदेश के पेट्रोल पंपों में घटतौली के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया था। इसमें एसटीएफ को बड़ी सफलता भी मिली जब लखनऊ सही राज्य के अन्य शहरों में पेट्रोल पंपों पर चिप लगाकर और रिमोट के द्वारा बड़े पैमाने पर तेल चोरी के मामलों का खुलासा हुआ। चोरी पकड़े जाने के बाद दर्जनों पेट्रोल पंपों को सील कर उनके लाइसेंस निलंबित करने की संस्तुति भी की गई। लेकिन पेट्रोल पंपों के दबाव में सरकार जल्द ही इस मुद्दे पर बैकफुट पर आ गई और पेट्रोल पंपों की जांच का काम एसटीएफ से लेकर जिला प्रशासन को दे दिया गया। सरकार के निर्णय के बाद माना गया कि पेट्रोल पंप मालिकों को राहत देने के लिए यह कदम उठाया गया है, इस मुद्दे पर हाईकोर्ट ने भी प्रदेश सरकार के खिलाफ कड़ी टिप्पणी करते हुए उसकी मंशा पर सवाल
खड़े किए। फिलहाल यह मामला पूरी तरह ठंडे बस्ते में चला गया है। 

गड्ढा मुक्त सड़कें
मुख्यमंत्री चुने जाने के बाद योगी आदित्यनाथ ने एक कार्यक्रम में बड़े विश्वास के साथ दावा किया था कि 15 जून तक वह पूरे प्रदेश की सड़कों को गड्ढामुक्त कर देंगे। इस मुद्दे पर उनसे कई बार सवाल पूछे गए जिसमें हर बार उनका यही जवाब रहा कि वह निश्चित समय में अपना लक्ष्य प्राप्त कर लेंगे। लेकिन तय समय सीमा 15 जून तक सरकार का काम इस मुद्दे पर फिसड्डी ही रहा। प्रदेश में गिनी चुनी सड़के ही गड्ढा मुक्त हो सकीं वो भी आंशिक रूप से। ग्रामीण इलाकों में तो यह दावा पूरी तरह फ्लॉप नजर आया। 

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अवैध बूचड़खाना पर लगाम
यूपी में चुनावों से पहले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने अपनी कई रैलियों में इस बात की घोषणा की थी कि भाजपा सरकार बनते ही 24 घंटे के अंदर अध्यादेश लाकर अवैध बूचडखानों पर रोक लगा दी जाएगी। योगी सरकार ने शुरूआती दौर में इस पर कदम उठाया भी लेकिन इस मुद्दे पर सरकार की स्थिति दो कदम आगे चार कदम पीछे वाली रही। पहले सभी यांत्रिक बूचडखानों पर रोक की बात की गई, इस संबंध में कार्रवाई भी शुरू हुई, लेकिन जब विरोध हुआ तो सरकार ने कदम पीछे खींच लिए। फिर केवल अवैध बूचड़खानों पर रोक की बात कही गई, लेकिन यहां भी मामला ऊपर नीचे वाला ही रहा। कुछ बूचड़खानों पर लगाम लगी तो काफी सारे अब भी बदस्तूर चल रहे हैं। 

एंटी रोमियो स्कवायड 
सरकार बनते ही योगी आदित्यनाथ ने महिलाओं के प्रति अपराधों में लगाम लगाने के लिए एंटी रोमियो स्कवायड की घोषणा की थी। शुरूआत में सरकार के इस कदम की काफी सराहना भी की गई। पुलिस ने भी इस मुद्दे पर काफी सक्रियता दिखाई, जिसके बाद कई जगहों से इस बात की भी शिकायत आई कि पुलिस ने साथ जा रहे भाई-बहन या दोस्तों को भी तंग करना शुरू कर दिया। एंटी रोमिया स्कवायड के साथ ही कुछ हिंदू वादी संगठन भी सक्रिय हो गए जो प्रेमी जोडों को अपना निशाना बनाने लगे। मेरठ में तो ऐसे ही एक मामले में एक घर में मौजूद प्रेमी जोड़े की हिंदू युवा वाहिनी के सदस्यों ने पिटाई भी कर दी थी। हालांकि रोमियो स्कवायड से महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों में कोई खास कमी नहीं आई। रामपुर में दो युवतियों के साथ कुछ युवाओं ने सरेआम बदसलूकी कर उसका
वीडियो भी बना लिया, इसके अलावा छेड़खानी की कई बड़ी घटनाओं के कारण सरकार को शर्मिदंगी का सामना करना पड़ा।

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