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Karnataka: हृदय रोग से पीड़ित था 10 महीने का बच्चा, डॉक्टरों ने की सर्जरी, मिला नया जीवन
Thu, 21 Nov 2024 11:00 PM IST
बशु जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: बशु जैन
Updated Thu, 21 Nov 2024 11:00 PM IST
सार
अस्पताल ने बताया कि 10 महीने के बच्चे की हालत लगातार बिगड़ रही थी। उसे गंभीर पीलिया हो गया था। वजन कम हो गया, पेट में तरल पदार्थ का जमाव और दूध पिलाने में कठिनाई हुई। परिजनों ने बच्चे को तत्काल इलाज के लिए नारायण हेल्थ सिटी में भर्ती कराया। यहां उसका हृदय प्रत्यारोपण किया गया।
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हृदय रोग
- फोटो : Freepik.com
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विस्तार
बंगलूरू में डॉक्टरों ने 10 महीने के एक बच्चे को नया जीवन दिया। डॉक्टरों ने हृदय रोग से पीड़ित बच्चे की हृदय प्रत्यारोपण सर्जरी की। सर्जरी के बाद बच्चे को लंबे समय तक निगरानी में रखा गया। बच्चे का विकास होता देख डॉक्टरों ने उसे गुरुवार को डिस्चार्ज कर दिया। बताया गया कि हृदय रोग से पीड़ित शिशु का नारायण हेल्थ सिटी में हृदय प्रत्यारोपण हुआ। जो भारतीय चिकित्सा इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
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अस्पताल ने बताया कि 10 महीने के बच्चे की हालत लगातार बिगड़ रही थी। उसे गंभीर पीलिया हो गया था। वजन कम हो गया, पेट में तरल पदार्थ का जमाव और दूध पिलाने में कठिनाई हुई। इससे परिजन परेशान हो रहे थे। परिजनों ने बच्चे को तत्काल इलाज के लिए नारायण हेल्थ सिटी में भर्ती कराया।
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अस्पताल में प्रत्यारोपण विशेषज्ञ डॉ शशिराज ने विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम के साथ बच्चे की स्थिति देखी। लंबे उपचार के बाद डॉक्टरों ने पाया कि हृदय प्रत्यारोपण के अलावा कोई विकल्प नहीं है। इसके बाद 72 घंटे के भीतर एक न्यूरो संबंधी रोग से जान गंवाने वाले 2.5 साल के बच्चे का हृदय उपलब्ध हो गया। 18 अगस्त को नारायण हेल्थ सिटी में कुशल सर्जिकल टीम ने हृदय प्रत्यारोपण किया और दो महीने की रिकवरी अवधि के बाद बच्चे को स्थिर स्थिति में छुट्टी दी गई। इसमें बढ़ी हुई गतिविधि, स्वस्थ भूख और स्थिर वजन वृद्धि के साथ उल्लेखनीय प्रगति दिखाई दी।
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डॉ. शशिराज ने बताया कि बच्चों में हृदय का फेल होना विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण है। शिशुओं के लिए हृदय मिलने में परेशानी होती है। डॉ. शशिराज ने बताया कि शिशु की हालत गंभीर थी और हम जानते थे कि समय बीत रहा है। यह मामला विशेषज्ञ टीमवर्क और हृदय प्रत्यारोपण की जीवन-रक्षक क्षमता को दर्शाता है। यह मामला हृदय विफलता और अंग दान के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाएगा।