Viral Jokes: डॉक्टर- खाना कहां खाते हो? मरीज का जवाब पढ़कर पेट पकड़कर हंसने लगेंगे आप
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में इंसान के पास खुद के बारे में इत्मिनान से सोचने के लिए समय नहीं है। यही वजह है कि कम उम्र के लोग भी अवसाद और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। इसलिए हम आपको हंसाने के लिए मजेदार चुटकुले लेकर आए हैं।
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Viral Jokes: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में इंसान के पास खुद के बारे में इत्मिनान से सोचने के लिए समय नहीं है। काम का बोझ और व्यक्तिगत समस्याओं की वजह से लोग मानसिक तनाव और अवसाद जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में डॉक्टर भी यह सलाह देते हैं कि हर इंसान को रोज थोड़ी देर जरूर हंसना चाहिए। दरअसल, हंसी-खुशी से रहने से इंसान न सिर्फ मानसिक रूप से बल्कि शारीरिक रूप से भी स्वस्थ रहता है। हंसने से मन हल्का रहता है और हम अपने भविष्य के प्रति सकारात्मक रहने लगते हैं। इसके अलावा जब हम हंसते हैं, तो हमारे शरीर में एंडोर्फिन नामक हार्मोन का स्त्राव होता है, जो तनाव कम करने वाले गुणों से भरपूर होता है। साथ ही जब हम हंसी-खुशी से रहते हैं तो हमारी प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है जिससे हमारा शारीरिक स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है। इसलिए हम आपको हंसाने के लिए रोज धमाकेदार चुटकुले लेकर आते हैं। इसी कड़ी में हम आपके लिए कुछ झन्नाटेदार चुटकुले लेकर आए हैं, जिसे पढ़कर आप हंस-हंसकर लोटपोट हो जाएंगे। तो देर किस बात कि, चलिए शुरू करते हैं, हंसने-हंसाने का सिलसिला...
टीचर ने चिंटू से पूछा-
टीचर- चिंटू, उसने कपड़े धोए और उसे कपड़े धोने पड़े। इन दोनों वाक्यों में अंतर क्या है ?
चिंटू - सर, पहले वाक्य से पता चलता है कि व्यक्ति कि शादी नहीं हुई है,
जबकि दूसरे वाक्य से उसके शादी-शुदा होने का पता चलता है।
टीचर अभी तक बेहोश है
डॉक्टर - खाना कहां खाते हो?
पिंटू - रोजाना होटल में ही खाता हूं।
डॉक्टर - अरे रोजाना होटल में खाना मत खाया करो।
पिंटू - ओह! ठीक है अब पैक करा के घर ले आया करुंगा।
डॉक्टर बेचारा बेहोश हो गया।
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रिंकी - इतनी देर से तू क्या सोच रही है?
चिंकी - जानती है कल रात की आंधी में एक टी- शर्ट मेरे घर आकर गिर गई।
रिंकी - तो इसमें क्या हुआ?
चिंकी - सोच रही हूं कि जींस ले लूं या फिर एक और आंधी का इंतजार करूं।
कल तुम्हें फांसी होगी... बताओ तुम्हारी अंतिम इच्छा क्या है?
कैदी- मैं तरबूज खाना चाहता हूं।
जेलर- लेकिन ये तरबूज का मौसम नहीं है।
कैदी- कोई बात नहीं, मैं इंतजार कर लूंगा।
दामाद- आज से मैं रोटी नहीं चावल खाऊंगा।
सास- ऐसा क्यों?
दामाद - मोहल्ले वालों के ताने सुनकर थक गया हूं। रोज कहते हैं कि ससुराल वालों की रोटी तोड़ता हूं।