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Budget 2022: क्या है हलवा सेरेमनी? जिसकी जगह इस बार मिठाई ने ले ली, बजट परंपराओं में अब तक हुए ये बदलाव
Fri, 28 Jan 2022 06:29 PM IST
प्रतिभा ज्योति
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: प्रतिभा ज्योति
Updated Fri, 28 Jan 2022 06:29 PM IST
सार
कुछ मीठा हो जाए, की तर्ज पर ‘हलवा सेरमनी’ को बजट कार्यक्रमों की आधिकारिक शुरुआत माना जाता रहा है। ढेर सारा हलवा एक बड़े बर्तन में तैयार किया जाता था। वित्त मंत्री सहित मंत्रालय के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को यह परोसा जाता था। सभी एक साथ हलवा खाते थे।
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अगले सप्ताह मंगलवार को लोकसभा में बजट पेश करेंगी। उम्मीद की जा रही है कि कोरोना महामारी के कारण बजट में आर्थिक सुधार और महामारी के प्रभावों के कारण देश की स्वास्थ्य प्रणाली को बढ़ाने और मजबूत करने पर सरकार का ध्यान होगा। बुधवार को वित्त मंत्रालय ने अपने एक बयान में कहा है कि इस बार बजट पेपरलेस होगा।
हालांकि इससे पहले 2021 में भी डिजिटल बजट पेश किया जा चुका है। लेकिन इस साल एक बात नई हुई है कि बजट पेश होने से पहले हर साल परंपरागत तौर पर मनाई जाने वाली हलवा सेरेमनी इस साल नहीं मनाई गई। इसकी जगह कर्मचारियों में मिठाई बांटी गई। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को कोविड-उपयुक्त व्यवहार के लिए दिशानिर्देशों का पालन करते हुए परंपरागत 'हलवा सेरमनी' के बजाय मिठाई वितरण के साथ 2021-22 के लिए बजट बनाने की प्रक्रिया के अंतिम चरण की शुरुआत की।
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हालांकि इससे पहले 2021 में भी डिजिटल बजट पेश किया जा चुका है। लेकिन इस साल एक बात नई हुई है कि बजट पेश होने से पहले हर साल परंपरागत तौर पर मनाई जाने वाली हलवा सेरेमनी इस साल नहीं मनाई गई। इसकी जगह कर्मचारियों में मिठाई बांटी गई। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को कोविड-उपयुक्त व्यवहार के लिए दिशानिर्देशों का पालन करते हुए परंपरागत 'हलवा सेरमनी' के बजाय मिठाई वितरण के साथ 2021-22 के लिए बजट बनाने की प्रक्रिया के अंतिम चरण की शुरुआत की।
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बजट से पहले हलवा सेरेमनी (फाइल फोटो)
- फोटो : Finance Ministry
क्या है हलवा सेरेमनी
मीठी शुरुआत के तौर पर हलवा सेरेमनी एक परंपरागत बजट पूर्व कार्यक्रम है जिसे बजट की छपाई से पहले मनाया जाता रहा है। कहा जाता है लंबे समय तक चलने वाली बजट बनाने की प्रक्रिया की समाप्ति के बाद मीठा खाकर बजट की छपाई को औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाई जाती रही। वित्त मंत्री कढ़ाई को हिलाती हैं और अधिकारियों को मिठाई परोस कर इसकी हरी झंडी दिखाई जाती है। यह समारोह वित्त मंत्रालय के नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में होता है, जहां एक विशेष प्रिंटिंग प्रेस है।
मीठी शुरुआत के तौर पर हलवा सेरेमनी एक परंपरागत बजट पूर्व कार्यक्रम है जिसे बजट की छपाई से पहले मनाया जाता रहा है। कहा जाता है लंबे समय तक चलने वाली बजट बनाने की प्रक्रिया की समाप्ति के बाद मीठा खाकर बजट की छपाई को औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाई जाती रही। वित्त मंत्री कढ़ाई को हिलाती हैं और अधिकारियों को मिठाई परोस कर इसकी हरी झंडी दिखाई जाती है। यह समारोह वित्त मंत्रालय के नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में होता है, जहां एक विशेष प्रिंटिंग प्रेस है।
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वित्त मंत्रालय
- फोटो : TWITTER: @FinMinIndia
नार्थ ब्लॉक का बेसमेंट हो जाता है ‘लॉक-इन’
कई प्रचलित दावों में कहा जाता रहा है कि संसद में बजट पेश होने से पहले करीब 10 दिनों तक बजट से जुड़े वित्त मंत्रालय के अधिकारी और कर्मचारी नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में बंद रहते हैं। जहां पूरी गोपनीयता रखी जाती है। दावों के मुताबिक मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों पर इंटेलिजेंस ब्यूरो की चौबीसों घंटे निगरानी रहती है, उन्हें प्रियजनों से संपर्क करने की अनुमति नहीं होती। यहां तक की उन्हें फोन करने की भी इजाजत नहीं है। सीसीटीवी का एक मजबूत नेटवर्क है और जैमर उन्हें बाहरी संपर्क से काट कर रखता है।
बताया जाता है 1950 तक बजट दस्तावेज की छपाई राष्ट्रपति भवन में होती रही लेकिन उसी वर्ष एक लीक हो जाने के बाद इसे मिंटो रोड और बाद में नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में स्थानांतरित कर दिया गया। बजट की छपाई स्थायी रूप से इसी प्रिंटिंग प्रेस में होने लगी है।
कई प्रचलित दावों में कहा जाता रहा है कि संसद में बजट पेश होने से पहले करीब 10 दिनों तक बजट से जुड़े वित्त मंत्रालय के अधिकारी और कर्मचारी नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में बंद रहते हैं। जहां पूरी गोपनीयता रखी जाती है। दावों के मुताबिक मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों पर इंटेलिजेंस ब्यूरो की चौबीसों घंटे निगरानी रहती है, उन्हें प्रियजनों से संपर्क करने की अनुमति नहीं होती। यहां तक की उन्हें फोन करने की भी इजाजत नहीं है। सीसीटीवी का एक मजबूत नेटवर्क है और जैमर उन्हें बाहरी संपर्क से काट कर रखता है।
बताया जाता है 1950 तक बजट दस्तावेज की छपाई राष्ट्रपति भवन में होती रही लेकिन उसी वर्ष एक लीक हो जाने के बाद इसे मिंटो रोड और बाद में नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में स्थानांतरित कर दिया गया। बजट की छपाई स्थायी रूप से इसी प्रिंटिंग प्रेस में होने लगी है।
बजट
- फोटो : अमर उजाला
कैसा होगा डिजिटल बजट
हर बार बजट की छपाई होती रही है लेकिन इस बार भी डिजिटल बजट पेश किया जाएगा। एक फरवरी को संसद में बजट पेश करने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद केंद्रीय बजट 2022-23 बजट वेबसाइट www.indiabudget.gov.in और यूनियन बजट मोबाइल एप पर उपलब्ध कराया जाएगा। एप पर केंद्रीय बजट का संपूर्ण दस्तावेज मिल जाएगा जिसमें बजट भाषण से लेकर वार्षिक वित्तीय विवरण (आमतौर पर जिसे बजट के रूप में जाना जाता है), अनुदान की मांग और वित्त विधेयक शामिल है। ये एप हिंदी और इंग्लिश दोनों भाषाओं में उपलब्ध है। लोकसभा के सभी सदस्यों समेत अन्य सभी लोगों को बजट की डिजिटल कॉपी दी जाएगी।
हर बार बजट की छपाई होती रही है लेकिन इस बार भी डिजिटल बजट पेश किया जाएगा। एक फरवरी को संसद में बजट पेश करने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद केंद्रीय बजट 2022-23 बजट वेबसाइट www.indiabudget.gov.in और यूनियन बजट मोबाइल एप पर उपलब्ध कराया जाएगा। एप पर केंद्रीय बजट का संपूर्ण दस्तावेज मिल जाएगा जिसमें बजट भाषण से लेकर वार्षिक वित्तीय विवरण (आमतौर पर जिसे बजट के रूप में जाना जाता है), अनुदान की मांग और वित्त विधेयक शामिल है। ये एप हिंदी और इंग्लिश दोनों भाषाओं में उपलब्ध है। लोकसभा के सभी सदस्यों समेत अन्य सभी लोगों को बजट की डिजिटल कॉपी दी जाएगी।
वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के साथ निर्मला सीतरमण-अनुराग ठाकुर (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
बजट की कई परंपराओं में हो चुका है बदलाव
मोदी सरकार के आने के बाद से बजट की कई परंपराओं में बदलाव हो चुका है। जैसे आजादी के पहले से बजट को चमड़े के ब्रीफकेस में पेश करने की परंपरा रही। जब निर्मला सीतारमण ने वित्त मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला तो ब्रीफकेस के बजाय लाल कपड़ों में लिपटे बही-खाता के रूप में बजट पेश किया। डिजिटल बजट का आना और हलवा सेरेमनी न होना इसी बदलाव की अगली कड़ियां हैं।
मोदी सरकार के आने के बाद से बजट की कई परंपराओं में बदलाव हो चुका है। जैसे आजादी के पहले से बजट को चमड़े के ब्रीफकेस में पेश करने की परंपरा रही। जब निर्मला सीतारमण ने वित्त मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला तो ब्रीफकेस के बजाय लाल कपड़ों में लिपटे बही-खाता के रूप में बजट पेश किया। डिजिटल बजट का आना और हलवा सेरेमनी न होना इसी बदलाव की अगली कड़ियां हैं।