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Una News: बिन बारिश खलिहानों में ही टूटने लगीं किसानों की उम्मीदें
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मौसम विभाग ने इस सप्ताह जताई है बारिश की संभावना, अभी तक मायूसी ही हाथ लगी
सोमवार को हल्की बारिश के बाद खिली रही धूप
गैर सिंचित इलाकों में फसलों को नहीं मिल पाई जरूरत के मुताबिक नमी
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। बदरा छा रहे हैं और बिन बारिश ही चले जा रहे हैं। इससे किसानों की उम्मीदें टूटने लगी हैं। गेहूं और नगदी फसलें बर्बाद होने के कगार पर हैं। बीते करीब तीन माह से किसानों को अच्छी बारिश का इंतजार है। जमीन में पर्याप्त नमी नहीं बची है। जिले में बीते सोमवार को बादल छाए और बूंदाबांदी ही हुई।
मौसम विभाग ने इस सप्ताह अच्छी बारिश की संभावना जताई है लेकिन अभी तक किसानों को निराशा ही हाथ लगी। जानकारी के अनुसार जिले में 35 हजार हेक्टेयर जमीन पर उगाई जाने वाली गेहूं की फसल का 65 प्रतिशत हिस्सा गैर सिंचित इलाकों में तैयार होता है। गैर सिंचित इलाकों में बिना नमी वाली जमीन पर गेहूं की फसल सही तरीके से उग नहीं पाई है। ऐसे में 30 से 40 प्रतिशत फसल शुरुआत में ही खराब हो चुकी है, जबकि बाकी फसल पर भी बिना बारिश के खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। गैर सिंचित इलाकों के किसान रविंद्र कुमार, राकेश सैनी, अर्शप्रीत, राजेश जसवाल ने कहा कि बारिश के बिना फसल बर्बाद हो रही है। अगर जमीन में नमी ही न हो तो खाद व अन्य जरूरी कीटनाशकों का छिड़काव कैसे कर सकते हैं। कहा कि अब बिक्री के लिए गेहूं की फसल तो दूर की बात उनके लिए गुजारे लायक गेहूं तैयार करना चुनौती बन चुका है।
सिंचाई के बावजूद खल रही बारिश की कमी
सिंचाई सुविधा वाले इलाकों के किसान प्रेम चंद, तरसेम लाल, जसविंद्र सिंह, सुखदेव, श्याम लाल ने बताया कि उन्होंने दो बार फसल की सिंचाई कर दी है लेकिन फसल की वृद्धि उम्मीद मुताबिक नहीं है। बारिश से फसल को मिलने वाला लाभ सिंचाई करने से पूरा नहीं होता। वर्तमान में बारिश की सख्त आवश्यकता है।
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कोट्स
लंबे समय से बारिश का न होना फसलों के लिए खतरे की घंटी है। बारिश का कोई विकल्प नहीं। कुछ दिन से मौसम खराब है। इसलिए बारिश की उम्मीद है। गेहूं की फसल काफी हद तक प्रभावित हो चुकी है। बारिश होने से बाकी बची फसल को बचाया जा सकता है।
कुलभूषण धीमान, उपनिदेशक, जिला कृषि विभाग
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सोमवार को हल्की बारिश के बाद खिली रही धूप
गैर सिंचित इलाकों में फसलों को नहीं मिल पाई जरूरत के मुताबिक नमी
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। बदरा छा रहे हैं और बिन बारिश ही चले जा रहे हैं। इससे किसानों की उम्मीदें टूटने लगी हैं। गेहूं और नगदी फसलें बर्बाद होने के कगार पर हैं। बीते करीब तीन माह से किसानों को अच्छी बारिश का इंतजार है। जमीन में पर्याप्त नमी नहीं बची है। जिले में बीते सोमवार को बादल छाए और बूंदाबांदी ही हुई।
मौसम विभाग ने इस सप्ताह अच्छी बारिश की संभावना जताई है लेकिन अभी तक किसानों को निराशा ही हाथ लगी। जानकारी के अनुसार जिले में 35 हजार हेक्टेयर जमीन पर उगाई जाने वाली गेहूं की फसल का 65 प्रतिशत हिस्सा गैर सिंचित इलाकों में तैयार होता है। गैर सिंचित इलाकों में बिना नमी वाली जमीन पर गेहूं की फसल सही तरीके से उग नहीं पाई है। ऐसे में 30 से 40 प्रतिशत फसल शुरुआत में ही खराब हो चुकी है, जबकि बाकी फसल पर भी बिना बारिश के खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। गैर सिंचित इलाकों के किसान रविंद्र कुमार, राकेश सैनी, अर्शप्रीत, राजेश जसवाल ने कहा कि बारिश के बिना फसल बर्बाद हो रही है। अगर जमीन में नमी ही न हो तो खाद व अन्य जरूरी कीटनाशकों का छिड़काव कैसे कर सकते हैं। कहा कि अब बिक्री के लिए गेहूं की फसल तो दूर की बात उनके लिए गुजारे लायक गेहूं तैयार करना चुनौती बन चुका है।
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सिंचाई के बावजूद खल रही बारिश की कमी
सिंचाई सुविधा वाले इलाकों के किसान प्रेम चंद, तरसेम लाल, जसविंद्र सिंह, सुखदेव, श्याम लाल ने बताया कि उन्होंने दो बार फसल की सिंचाई कर दी है लेकिन फसल की वृद्धि उम्मीद मुताबिक नहीं है। बारिश से फसल को मिलने वाला लाभ सिंचाई करने से पूरा नहीं होता। वर्तमान में बारिश की सख्त आवश्यकता है।
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लंबे समय से बारिश का न होना फसलों के लिए खतरे की घंटी है। बारिश का कोई विकल्प नहीं। कुछ दिन से मौसम खराब है। इसलिए बारिश की उम्मीद है। गेहूं की फसल काफी हद तक प्रभावित हो चुकी है। बारिश होने से बाकी बची फसल को बचाया जा सकता है।
कुलभूषण धीमान, उपनिदेशक, जिला कृषि विभाग