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Una News: बिना जांच दौड़ रहे निजी स्कलों के वाहन
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कई वाहनों पर सेवाएं दे रहे रिटायर हो चुके चालक
कई वाहनों के दस्तावेज हो चुके एक्सपायर
विभाग की ओर से औपचारिकता मात्र की जा रही कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले में संचालित हो रहे अधिकांश निजी स्कूलों की परिवहन व्यवस्था पूरी तरह राम भरोसे चल रही है। हालात यह हैं कि न तो वाहनों के दस्तावेजों की जांच हो रही है और न ही चालकों के पास वैध लाइसेंस हैं या नहीं, इसकी कोई पड़ताल करने वाला है। अधिकांश स्कूलों ने परिवहन की जिम्मेदारी निजी ट्रांसपोर्टरों को सौंप रखी है। ऐसे में स्कूल प्रबंधन बच्चों की सुरक्षा जैसी संवेदनशील जिम्मेदारी से पल्ला झाड़कर उसे ठेकेदारों के हाथों में दे रहा है। सवाल यह उठता है कि ट्रांसपोर्टर की ओर से लगाए गए चालक वाहन चलाने में कितने कुशल या अनुभवी हैं, इसका आकलन कौन कर रहा है। फिलहाल इस दिशा में कोई ठोस व्यवस्था नहीं दिख रही।
जानकारी के अनुसार जिले में 200 से अधिक निजी स्कूल संचालित हैं। इनमें से कई बड़े स्कूलों ने अपनी बस सेवाएं ठेके पर दे रखी हैं। यही ट्रांसपोर्टर बच्चों को घर से लाने और छोड़ने का कार्य करते हैं। इनमें से कई वाहन चालकों का अनुभव बेहद सीमित है, जबकि कुछ चालक पहले अन्य निजी सेवाओं में कार्यरत थे और अब स्कूल बसें चला रहे हैं।
स्थिति यह भी है कि कई बसों पर स्कूल का नाम तक अंकित नहीं होता। बसों की खिड़कियों में सुरक्षा इंतज़ाम अधूरे हैं और न ही अन्य सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है। शिकायत के लिए कोई संपर्क नंबर भी अधिकांश बसों पर दर्ज नहीं है।
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अभिभावक अमित कुमार, सुरेंद्र, अमित सिंह, सतविंदर सैनी, अनुराग समेत अन्य ने कहा कि बच्चों को स्कूल लाने और घर छोड़ने का काम अत्यंत संवेदनशील है। इस कार्य में लापरवाही किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि पूर्व में कई हादसों में बच्चों की जान स्कूल वाहनों की लापरवाही के कारण जा चुकी है। इसलिए यह जिम्मेदारी परिपक्व और प्रशिक्षित चालकों को ही सौंपी जानी चाहिए।
अभिभावकों ने यह भी कहा कि स्कूल प्रबंधन को इस जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ना चाहिए, बल्कि स्वयं इसकी निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए।
इस संबंध में जिला उच्च शिक्षा विभाग के उपनिदेशक अनिल कुमार ने बताया कि निजी स्कूलों में निरीक्षण की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि अगर किसी भी स्कूल में लापरवाही पाई गई तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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कई वाहनों के दस्तावेज हो चुके एक्सपायर
विभाग की ओर से औपचारिकता मात्र की जा रही कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले में संचालित हो रहे अधिकांश निजी स्कूलों की परिवहन व्यवस्था पूरी तरह राम भरोसे चल रही है। हालात यह हैं कि न तो वाहनों के दस्तावेजों की जांच हो रही है और न ही चालकों के पास वैध लाइसेंस हैं या नहीं, इसकी कोई पड़ताल करने वाला है। अधिकांश स्कूलों ने परिवहन की जिम्मेदारी निजी ट्रांसपोर्टरों को सौंप रखी है। ऐसे में स्कूल प्रबंधन बच्चों की सुरक्षा जैसी संवेदनशील जिम्मेदारी से पल्ला झाड़कर उसे ठेकेदारों के हाथों में दे रहा है। सवाल यह उठता है कि ट्रांसपोर्टर की ओर से लगाए गए चालक वाहन चलाने में कितने कुशल या अनुभवी हैं, इसका आकलन कौन कर रहा है। फिलहाल इस दिशा में कोई ठोस व्यवस्था नहीं दिख रही।
जानकारी के अनुसार जिले में 200 से अधिक निजी स्कूल संचालित हैं। इनमें से कई बड़े स्कूलों ने अपनी बस सेवाएं ठेके पर दे रखी हैं। यही ट्रांसपोर्टर बच्चों को घर से लाने और छोड़ने का कार्य करते हैं। इनमें से कई वाहन चालकों का अनुभव बेहद सीमित है, जबकि कुछ चालक पहले अन्य निजी सेवाओं में कार्यरत थे और अब स्कूल बसें चला रहे हैं।
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स्थिति यह भी है कि कई बसों पर स्कूल का नाम तक अंकित नहीं होता। बसों की खिड़कियों में सुरक्षा इंतज़ाम अधूरे हैं और न ही अन्य सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है। शिकायत के लिए कोई संपर्क नंबर भी अधिकांश बसों पर दर्ज नहीं है।
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अभिभावक अमित कुमार, सुरेंद्र, अमित सिंह, सतविंदर सैनी, अनुराग समेत अन्य ने कहा कि बच्चों को स्कूल लाने और घर छोड़ने का काम अत्यंत संवेदनशील है। इस कार्य में लापरवाही किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि पूर्व में कई हादसों में बच्चों की जान स्कूल वाहनों की लापरवाही के कारण जा चुकी है। इसलिए यह जिम्मेदारी परिपक्व और प्रशिक्षित चालकों को ही सौंपी जानी चाहिए।
अभिभावकों ने यह भी कहा कि स्कूल प्रबंधन को इस जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ना चाहिए, बल्कि स्वयं इसकी निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए।
इस संबंध में जिला उच्च शिक्षा विभाग के उपनिदेशक अनिल कुमार ने बताया कि निजी स्कूलों में निरीक्षण की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि अगर किसी भी स्कूल में लापरवाही पाई गई तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।