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Una News: चेक बाउंस मामले में ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द, आरोपी बरी

Tue, 15 Sep 2026 12:41 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Updated Tue, 15 Sep 2026 12:41 AM IST
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Trial court's verdict in cheque bounce case set aside; accused acquitted.
दुलैहड़ (ऊना)। चेक बाउंस के मामले में सत्र न्यायालय ऊना ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए आरोपी को बरी कर दिया है। सत्र न्यायाधीश नरेश कुमार की अदालत ने आरोपी को सुनाई गई चार माह की साधारण कैद और 1.10 लाख रुपये मुआवजा देने की सजा निरस्त कर दी। अदालत ने माना कि कानूनी नोटिस की सेवा की तारीख साबित नहीं होने के कारण शिकायत समय से पहले दायर की गई थी।
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शिकायत के अनुसार मई 2021 में आरोपी ने निजी जरूरत के लिए एक लाख रुपये उधार लिए थे। इसके बदले 5 अगस्त 2022 को एक लाख रुपये का चेक जारी किया गया। बैंक में लगाने पर चेक 8 अगस्त 2022 को खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण बाउंस हो गया। इसके बाद 17 अगस्त 2022 को रजिस्टर्ड डाक से कानूनी नोटिस भेजकर चेक की रकम का भुगतान करने को कहा गया। भुगतान नहीं होने पर परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत शिकायत दायर की गई। ट्रायल कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद आरोपी को दोषी ठहराते हुए चार माह के साधारण कारावास और 1.10 लाख रुपये मुआवजे की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ सत्र न्यायालय में अपील की गई। अपील में दलील दी गई कि कानूनी नोटिस की सेवा की तारीख रिकॉर्ड पर साबित नहीं है, इसलिए शिकायत समय से पहले दायर हुई थी। दूसरी ओर शिकायतकर्ता की ओर से कहा गया कि रजिस्टर्ड डाक से भेजे गए नोटिस को सात दिन में सेवित माना जाना चाहिए और शिकायत समय पर दायर हुई थी। सत्र न्यायालय ने कहा कि आरोपी ने नोटिस प्राप्त होने की बात स्वीकार की है लेकिन शिकायतकर्ता यह साबित नहीं कर सका कि नोटिस किस तारीख को मिला। अदालत ने हाईकोर्ट के हालिया बंसत बनाम वीरेंद्र सिंह मामले का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में रजिस्टर्ड डाक से भेजे गए नोटिस की सेवा 30वें दिन मानी जाएगी।
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अदालत के अनुसार नोटिस 17 अगस्त 2022 को भेजा गया था। इसलिए इसकी सेवा 16 सितंबर 2022 को मानी जाएगी। इसके बाद आरोपी को चेक की रकम का भुगतान करने के लिए 15 दिन का समय मिलना था। भुगतान न होने पर शिकायत दायर करने का कारण 2 अक्तूबर 2022 को पैदा होता जबकि शिकायत 16 सितंबर 2022 को ही दायर कर दी गई थी। अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने नोटिस की सेवा की तारीख, भुगतान के लिए मिली 15 दिन की अवधि और शिकायत दायर करने का कारण कब पैदा हुआ, इस महत्वपूर्ण पहलू पर विचार नहीं किया। शिकायत समय से पहले दायर होने के कारण कानूनन सुनवाई योग्य नहीं थी। सत्र न्यायाधीश नरेश कुमार ने अपील स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट का दोषसिद्धि और सजा का आदेश रद्द कर दिया। आरोपी को धारा 138 एनआई एक्ट के आरोप से बरी कर दिया गया। यदि मुआवजे की राशि जमा करवाई गई है तो अपील की अवधि समाप्त होने के बाद उसे वापस करने के आदेश दिए गए हैं।
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