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Una News: कृषि विभाग खुद बेघर, किसान भटक रहे दर-दर

Tue, 12 May 2026 06:42 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Updated Tue, 12 May 2026 06:42 AM IST
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The agriculture department itself is homeless, farmers are wandering from door to door
ऊना। किसानों को आधुनिक खेती, मिट्टी जांच और सरकारी योजनाओं का लाभ देने वाला कृषि विभाग इन दिनों खुद बेघर है और किसानों को दर-दर भटकना पड़ रहा है। विभाग का पुराना भवन तोड़ दिया लेकिन नया भवन अब तक टेंडरों और फाइलों में ही उलझा पड़ा है। हालात ऐसे हैं कि कृषि विभाग की शाखाएं अलग-अलग किराये के कमरों और भवनों में बिखर गई हैं। इसका सीधा असर उन किसानों पर पड़ रहा है, जिन्हें छोटी-छोटी सेवाओं के लिए शहरभर में धक्के खाने पड़ रहे हैं। विडंबना यह है कि किसानों को आत्मनिर्भर खेती और आधुनिक तकनीक का पाठ पढ़ाने वाला कृषि विभाग खुद स्थायी छत के लिए भटक रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब कृषि विभाग खुद बिखरा पड़ा है तो किसानों को राहत और सुविधा आखिर कैसे मिलेगी।
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वर्तमान में कृषि विभाग के उपनिदेशक का कार्यालय सब्जी मंडी परिसर में किराये पर चल रहा है। मिट्टी जांच लैब को करीब आठ किलोमीटर दूर पेखुबेला में शिफ्ट कर दिया है। ऐसे में किसान दर-दर भटकने को मजबूर हो गए है। भू संरक्षण शाखा नए उपायुक्त कार्यालय के पास अलग कमरे में संचालित हो रही है जबकि आत्मा प्रोजेक्ट का कार्यालय पुराने उपायुक्त कार्यालय में शिफ्ट कर दिया गया गया है। विभाग की शाखाएं अलग-अलग जगह होने से किसानों का एक ही दिन में काम निपटाना मुश्किल हो गया है।
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हर महीने देना पड़ रहा 53 हजार किराया
बेघर हो चुके कृषि विभाग की शाखाओं को भले ही सरकारी भवनों में शिफ्ट किया गया है लेकिन विभाग से इसका किराया भी वसूला जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार विभाग को हर महीने 53 हजार रुपये किराया देना पड़ रहा है। बीते नौ महीनों के दौरान कृषि विभाग 4 लाख 77 हजार रुपये किराये के रूप में सरकार को अदा कर चुका है। अभी जो हालात हैं उससे लगता है कि किराये का आंकड़ा और भी बढ़ सकता है।
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विभाग के अधिकारियों को चाहिए था कि एक ही स्थान पर कार्यालय की व्यवस्था कर लेते। अब किसानों को यहां-वहां भटकना पड़ रहा है।
-विशेषर लाल, किसान

दूर से आते हैं फिर ऊना आकर कृषि विभाग का कार्यालय ढूंढते हैं। फिर पता चलता है मिट्टी की जांच आठ किलोमीटर दूर है, ऐसे में सुविधा कम और परेशानी अधिक मिल रही है। -विक्रम सिंह, किसान


फिलहाल अलग-अलग भवनों में विभाग की शाखाएं चलाई जा रही है, सभी का किराया चुकाया जा रहा है।
-डॉ. प्रेम ठाकुर, उपनिदेशक, कृषि विभाग
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