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आत्मा एक अनुभव है, सिद्धांत नहीं : अतुल कृष्ण
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संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। ठाकुरद्वारा बढेड़ा हरोली में भागवताचार्य अतुल कृष्ण ने शिव महापुराण कथा के प्रथम दिन कहा कि निद्रा जब जागरण में बदलती है, मृत्यु उसी दिन अमरता में बदल जाती है। अंधेरा जब रोशनी बनता है, देह आत्मा में रूपांतरित होने लगती है। प्रेममय हृदय की कोई सीमा नहीं; जितना हम प्रभु से प्रेम करेंगे, वे उतना ही हमारे निकट आते हैं। उन्होंने बताया कि आत्मा कोई सिद्धांत नहीं, बल्कि अनुभव है। यह चैतन्य की तीव्रता है। जितना चैतन्य होगा, उतना ही आत्मा का पता चलेगा। अन्य सब मित्र, परिवार, धन, प्रतिष्ठा दिखावा है, केवल चैतन्य ही सच्चा अपना है।
कथा में प्रमुख रूप से प्रीतम सिंह, जोगिंद्र सिंह, होशियार सिंह, श्यामलाल, रमेश चंद्र, सतीश कुमार, राकेश कुमार, हरीश कुमार, सुखविंद्र बग्गा, कुलदीप सिंह, अनूप सिंह, वीरेंद्र कुमार, सुरेंद्र कुमार, धर्मपाल एवं अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे। कथा 10 फरवरी तक चलेगी और प्रतिदिन भंडारे का आयोजन भी होगा।
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ऊना। ठाकुरद्वारा बढेड़ा हरोली में भागवताचार्य अतुल कृष्ण ने शिव महापुराण कथा के प्रथम दिन कहा कि निद्रा जब जागरण में बदलती है, मृत्यु उसी दिन अमरता में बदल जाती है। अंधेरा जब रोशनी बनता है, देह आत्मा में रूपांतरित होने लगती है। प्रेममय हृदय की कोई सीमा नहीं
कथा में प्रमुख रूप से प्रीतम सिंह, जोगिंद्र सिंह, होशियार सिंह, श्यामलाल, रमेश चंद्र, सतीश कुमार, राकेश कुमार, हरीश कुमार, सुखविंद्र बग्गा, कुलदीप सिंह, अनूप सिंह, वीरेंद्र कुमार, सुरेंद्र कुमार, धर्मपाल एवं अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे। कथा 10 फरवरी तक चलेगी और प्रतिदिन भंडारे का आयोजन भी होगा।
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