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घर का माहौल और सोच बदलें, तभी होगा महिला सशक्तिकरण: डा. निधि पटेल

Fri, 17 Dec 2021 12:15 AM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 17 Dec 2021 12:15 AM IST
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SDM advises to change the environment and thinking in the family for woman empowerment
बसाल स्कूल में अमर उजाला फाउंडेशन अपराजिता कार्यक्रम के दौरान विद्याथियों को सम्बोधित करती एसड? - फोटो : Una
ऊना/नारी। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बसाल में वीरवार को अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल कार्यक्रम में महिला सशक्तीकरण पर बल दिया गया। एसडीएम सदर डॉ. निधि पटेल ने कहा कि अभी से ही घर का माहौल और सोच बदलें, तभी महिला सशक्तीकरण हो सकता है।
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महिला सशक्तीकरण के बजाय व्यक्ति विशेष के सशक्तीकरण की जरूरत है। आज हर कोई महिला सशक्तीकरण की बात कर रहा है, लेकिन इसकी जरूरत क्यों है। पारिवारिक माहौल में शुरूआत से बेटा और बेटी में भेदभाव करना शुरू कर दिया जाता है। खुद बच्चों को इसके खिलाफ आगे आना चाहिए।
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अगर हमें लड़कियों के प्रति समाज की सोच को बदलना चाहते हैं तो इसके लिए सबसे पहली शुरूआत घर से होना चाहिए। डॉ. निधि पटेल ने कहा कि उनके हर फैसले को परिवार से समर्थन मिला और इसी विश्वास की बदौलत यह मुकाम हासिल किया है।
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इस मौके पर स्कूल स्टाफ से सुषमा रानी, गीता देवी, राम देई, अलका, अंबिका, कनिका, महिंद्र कौर, नीलम देवी, ओम प्रकाश, राम सरूप, सतीश, अजय, मुकेश, यशपाल, चमन लाल, संजीव कुमार, महिंद्र, सुभाष चंद, राकेश, मनोज, जगन मोहन उपस्थित रहे।
गरीब परिवारों की मदद के लिए डॉक्टर से बनीं आईएएस
डॉ. निधि पटेल ने कहा है कि पीएमटी क्लीयर करने के बाद वह डॉक्टर बनीं। सेवाएं देने के दौरान कई गरीब परिवारों की महिलाएं इलाज करवाने पहुंचती थी। इस दौरान उन्हें गरीब परिवारों से जुड़ी कई समस्याओं का भी पता चला। इन समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासनिक अधिकारी बनने की ठानी।
विद्यार्थियों ने किए सवाल
यूपीएससी के लिए कैसे तैयारी करें
11वीं की छात्रा निकिता ने सवाल किया कि यूपीएससी की तैयारी कैसे करनी चाहिए। एसडीएम निधि पटेल ने बताया कि यूपीएससी के लिए सबसे पहले छठी से बारहवीं तक की पढ़ाई अच्छे से करने की जरूरत है। इन्हीं कक्षाओं का पाठ्यक्रम यूपीएससी का आधार है। यूपीएससी के लिए जीवन में अनुशासन का होना बहुत जरूरी है।
जीवन का लक्ष्य कैसे हासिल करें
11वीं कक्षा की छात्रा दीपा रानी ने पूछा कि अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए कैसा जीवन जीना चाहिए। इस पर निधि पटेल ने बताया कि किताबों से लगाव होना बेहद जरूरी है। इनसे बड़ा को दोस्त नहीं होता। कोई भी लक्ष्य हासिल करने के लिए जुनून होना चाहिए। बच्चों को फोन और टीवी छोड़कर किताबों में रुचि दिखानी चाहिए।
क्या मध्यम दर्जे का छात्र भी बन सकता है एसडीएम
सातवीं कक्षा के छात्र कृष्णा ने सवाल किया कि क्या मध्यम दर्जे का विद्यार्थी भी एसडीएम बन सकता है। इस पर डॉ. निधि पटेल ने कहा कि वह खुद मध्यम दर्जे की विद्यार्थी रही हैं, लेकिन मुझे बारहवीं कक्षा तक अपना लक्ष्य और जीवन में पढ़ाई का महत्व पता था। दिमाग की ताकत हर बच्चे में एक जैसी होती है।
सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में कितना अंतर
नवीं कक्षा की छात्रा मन्नत ने सवाल पूछा कि सरकारी और प्राइवेट स्कूलों की पढ़ाई में कितना अंतर है। इस पर डॉ. निधि पटेल ने कहा कि सरकारी और प्राइवेट स्कूलों की पढ़ाई में खास अंतर नहीं है। वह खुद कॉन्वेंट स्कूल की छात्रा रही हैं। लेकिन जब वह डॉक्टर बनी तो उसके साथ कई डॉक्टर सरकारी स्कूलों से पढ़ाई कर आए थे।
विद्यार्थियों को मिली अहम जानकारी : कश्मीर
स्कूल के प्रधानाचार्य कश्मीर सिंह ने बताया इस कार्यक्रम से विद्यार्थियों को जीवन के जुड़ी अहम जानकारियां मिली हैं। आज महिलाओं की स्थिति में काफी सुधार तो हुआ है, लेकिन अभी भी अगर पति-पत्नी दोनों बाहर काम करते हैं तो घर आकर खाना बनाने की जिम्मेदारी पत्नी की होती है। इस सोच को बदलने की आवश्यकता है।
अपराजिता पर दी प्रस्तुति
इस मौके पर सातवीं कक्षा की मानसी और सिमरन मे देशभक्ति के गीतों की प्रस्तुति दी। आंचल और अन्य छात्राओं ने राष्ट्रीय गीत से कार्यक्रम की शुरूआत की। नेहा और अन्य छात्राओं ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया। 9वीं की अक्षिता और 11वीं की दिवांशी ने रानी लक्ष्मीबाई के जीवन पर प्रकाश डाला।

पढ़ाए जाते हैं बेटे... पढ़ जाती हैं बेटियां
मंच संचालन कर रहे चमन लाल शास्त्री ने अपराजिता विषय पर कविता सुनाकर सभी को बेटियों का महत्व बताया। उन्होंने बेटियों के जुड़ाव से लेकर विस्तार से जानकारी दी। पढ़ाए जाते हैं बेटे... पढ़ जाती है बेटियां, खेलते हैं बेटे... जीत जाती हैं बेटियां कविता पढ़कर महिला सशक्तीकरण का संदेश दिया।
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