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Una News: राजेश शर्मा छुट्टी लेकर करने आए भगवान की लीलाओं का मंचन
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सतीश शर्मा
नारी (ऊना)। बसाल गांव में रामलीला का मंचन 1986 से लगातार 39 वर्षों से हो रहा है। यह आयोजन गांववासियों की ओर से गठित कमेटी के सहयोग से संपन्न होता है। शुरुआत सेवानिवृत्त अध्यापक राम आसरा और स्व. मास्टर रमेश चंद के प्रयासों से हुई थी। वर्तमान में कमेटी की बागडोर नवयुवक नवीन कुमार संभाल रहे हैं, जिनके साथ मंच संचालक नरेंद्र हरिपाल सक्रिय हैं। कलाकारों का आवास और भोजन भी कमेटी द्वारा प्रबंधित किया जाता है। प्रमुख भूमिकाओं में राजेश शर्मा (राम), मनोज कुमार (रावण), संजीव कुमार (राम), जसवंत सिंह (भरत), नेहा उप्पल (धार्मिक नृत्य) और अन्य कलाकार शामिल हैं। कलाकारों में कुछ बाहरी जिलों और राज्यों से भी आए हैं। कलाकारों में राजेश शर्मा रावण का रोल अदा करते हैं। शिमला सचिवालय में नौकरी करते हैं। भगवान की लीलाओं का मंचन करने के लिए छुट्टियां लेकर आए हैं। संजीव कुमार नैना देवी से भगवान राम, मनोज कुमार लक्ष्मण, जसवंत सिंह भरत और परशुराम का मंचन करते है। हंसराज केवट, रूपलाल दशरथ, सोनू कैकई, नेहा उप्पल लुधियाना से भगवान के भजनों पर धार्मिक नृत्य का रोल अदा कर रहे है।
नवीन कुमार और नरेंद्र हरिपाल ने बताया कि रामलीला पूरी तरह शुद्ध रामायण के अनुसार ही प्रस्तुत की जाती है। इसमें फिल्मी या पंजाबी गानों का प्रयोग बिल्कुल नहीं होता। ग्रामीणों ने शुरू में गाने बजाने का रिवाज रोककर केवल भगवान राम की लीलाओं को मंच पर पेश करने का निर्णय लिया था।
लंबे समय से यह रामलीला शुद्ध रूप में आयोजित हो रही है और युवा वर्ग भी इसमें सक्रिय रूप से सहयोग दे रहा है। यह आयोजन गांव और क्षेत्र के लिए आदर्श भगवान राम का पर्व बन चुका है, और सभी लोग कलाकारों की तारीफ कर रहे हैं।
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नारी (ऊना)। बसाल गांव में रामलीला का मंचन 1986 से लगातार 39 वर्षों से हो रहा है। यह आयोजन गांववासियों की ओर से गठित कमेटी के सहयोग से संपन्न होता है। शुरुआत सेवानिवृत्त अध्यापक राम आसरा और स्व. मास्टर रमेश चंद के प्रयासों से हुई थी। वर्तमान में कमेटी की बागडोर नवयुवक नवीन कुमार संभाल रहे हैं, जिनके साथ मंच संचालक नरेंद्र हरिपाल सक्रिय हैं। कलाकारों का आवास और भोजन भी कमेटी द्वारा प्रबंधित किया जाता है। प्रमुख भूमिकाओं में राजेश शर्मा (राम), मनोज कुमार (रावण), संजीव कुमार (राम), जसवंत सिंह (भरत), नेहा उप्पल (धार्मिक नृत्य) और अन्य कलाकार शामिल हैं। कलाकारों में कुछ बाहरी जिलों और राज्यों से भी आए हैं। कलाकारों में राजेश शर्मा रावण का रोल अदा करते हैं। शिमला सचिवालय में नौकरी करते हैं। भगवान की लीलाओं का मंचन करने के लिए छुट्टियां लेकर आए हैं। संजीव कुमार नैना देवी से भगवान राम, मनोज कुमार लक्ष्मण, जसवंत सिंह भरत और परशुराम का मंचन करते है। हंसराज केवट, रूपलाल दशरथ, सोनू कैकई, नेहा उप्पल लुधियाना से भगवान के भजनों पर धार्मिक नृत्य का रोल अदा कर रहे है।
नवीन कुमार और नरेंद्र हरिपाल ने बताया कि रामलीला पूरी तरह शुद्ध रामायण के अनुसार ही प्रस्तुत की जाती है। इसमें फिल्मी या पंजाबी गानों का प्रयोग बिल्कुल नहीं होता। ग्रामीणों ने शुरू में गाने बजाने का रिवाज रोककर केवल भगवान राम की लीलाओं को मंच पर पेश करने का निर्णय लिया था।
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लंबे समय से यह रामलीला शुद्ध रूप में आयोजित हो रही है और युवा वर्ग भी इसमें सक्रिय रूप से सहयोग दे रहा है। यह आयोजन गांव और क्षेत्र के लिए आदर्श भगवान राम का पर्व बन चुका है, और सभी लोग कलाकारों की तारीफ कर रहे हैं।
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