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पुलिस लोगों की आवाज दबाने का नहीं उठाने का करती है काम : कुलविंद्र सिंह
Sun, 05 May 2024 01:39 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Sun, 05 May 2024 01:39 AM IST
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केवी स्कूल सलोह की छात्रा अर्शिता।संवाद
ऊना। विजिलेंस विभाग एंटी क्रप्शन ब्यूरो ऊना के डीएसपी कुलविंद्र सिंह ने कहा कि समाज में पुलिस की अहम भूमिका है। प्राचीन काल में अगर कोई भी क्राइम होता था, तो उस दौर में राजा महाराजा दंड देकर सजा सुनाते थे। उन्होंने कहा कि पुलिस लोगों की आवाज को दबाने के लिए नहीं, बल्कि उनकी आवाज को उठाने के लिए काम करती है, ताकि सभी सुरक्षित रह सकें।
यह बात उन्होंने शनिवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से केंद्रीय विद्यालय सलोह में आयोजित पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि शिरकत करते हुए बच्चों से कही। इस दौरान स्कूल की प्रिंसिपल नीलम गुलेरिया ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि पुलिस गलत करने वालों को पकड़ती है और सजा देती है और पुलिस का निर्दोष व्यक्तियों के साथ मैत्रीपूर्ण व्यवहार होता है। कहा कि पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम अमर उजाला के द्वारा आयोजित करने से समाज में फैल रही कुरीतियों को दूर करने में कारगर साबित हो रहा है। वर्तमान का युग सोशल मीडिया का युग है और साइबर क्राइम बढ़ने लगा है। बच्चे विभिन्न अपराधों में फंस रहे हैं, फेसबुक पर झूठी जानकारी पर विश्वास करके लालच में आ रहे हैं और अनजान लोगों के द्वारा भेजे जा रहे लिंक पर क्लिक करके क्राइम को बढ़ावा दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बच्चे मानसिक रूप से विकसित नहीं हो पाते हैं, जितना की वह सोशल मीडिया के माध्यम से मोबाइल के जाल में फंस रहे हैं, इससे बच्चों की ग्रोथ रुक गई है, खेलना बच्चों ने बंद कर दिया है और मोबाइल के आदी होने से वर्तमान की युवा पीढ़ी खतरे की जद में आ गई है। कहा कि मोबाइल से बच्चे दूर रहें और अच्छे काम के लिए इसका इस्तेमाल करें। गेम की लत लगने से कई बच्चों की मौतें भी हो चुकी हैं। उन्हाेंने कहा कि नशा समाज में विकराल रूप धारण कर चुका है और छोटे-छोटे बच्चे भी इसमें शामिल हो गए हैं, जिससे उनका कॅरियर तबाह होकर रह गया है।
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उन्होंने नशे से बचने का आह्वान किया है और कहा है कि सभी बच्चे ट्रैफिक नियमों का पालन करें, अपने समाज में लोगों को जागरूक करें। एक साल में जितनी मौतें लोगों की बीमारी से नहीं हो रही हैं, जितनी रोड एक्सीडेंट की वजह से हो रही है और अपंग तो कितने हो रहे हैं, इसकी कोई भी गिनती नहीं है।
बाक्स
धैर्य कंवर का कहना है कि कार्यक्रम से साइबर क्राइम के बारे में जानकारी मिली। इस तरह के कार्यक्रमों से समाज में जागरूकता आती है। अमर उजाला का कार्यक्रम सराहनीय है।
बाक्स
राधिका ठाकुर ने कहा कि अगर समाज में नशा बढ़ रहा है तो सरकार को ऐसी चीजों को वैन कर देना चाहिए, जो कि समाज के लिए घातक हो रही हैं। तभी इस पर अंकुश लग सकता है।
बाक्स
दिवनीत का कहना है कि शहर के चौक पर तो पुलिस के जवान ट्रैफिक व्यवस्था के लिए तैनात रहते हैं, लेकिन एनएच के साथ लगते स्कूलों में मार्गों को क्रॉस करने में बच्चों को दिक्कतें आती हैं। सरकार को भी इस दिशा में उचित कदम उठाने चाहिएं।
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इशप्रीत कौर का कहना है कि शातिरों को स्कैम करने के लिए मोबाइल नंबरों का कैसे पता चलता है। उन्होंने कहा कि अमर उजाला के कार्यक्रम से तमाम पहलुओं के बारे में जानकारी प्राप्त हुई।
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प्रिया शर्मा का कहना है कि अस्पतालों में भी लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं। उपचार करवाने के बाद भारी भरकम रकम अर्जित की जाती है। ऐसे में अमर उजाला के कार्यक्रम से जागरूक हुए हैं।
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अर्शिता का कहना है कि पुलिस की पाठशाला में पुलिस के साथ बच्चों का सीधे तौर पर संवाद होने से कई सवालों के जबाव मिले और समाज में भी लोगों को जागरूक करने का प्रण लिया।
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स्कूल प्रिंसिपल नीलम गुलेरिया का कहना है कि अमर उजाला फाउंडेशन का समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने और लोगों को ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से जागरूक करने का प्रयास सराहनीय है। इस तरह के कार्यक्रम से पुलिस विभाग की ओर से भ्रष्टचार, नशे, ट्रैफिक नियमों, महिला उत्पीड़न सहित कई मसलों पर चर्चा होने से जागरूकता बढ़ती है और बच्चों का भी मनोबल बढ़ता है। दूसरी ओर बातचीत करने में बच्चों की झिझक भी दूर होती है।
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यह बात उन्होंने शनिवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से केंद्रीय विद्यालय सलोह में आयोजित पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि शिरकत करते हुए बच्चों से कही। इस दौरान स्कूल की प्रिंसिपल नीलम गुलेरिया ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि पुलिस गलत करने वालों को पकड़ती है और सजा देती है और पुलिस का निर्दोष व्यक्तियों के साथ मैत्रीपूर्ण व्यवहार होता है। कहा कि पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम अमर उजाला के द्वारा आयोजित करने से समाज में फैल रही कुरीतियों को दूर करने में कारगर साबित हो रहा है। वर्तमान का युग सोशल मीडिया का युग है और साइबर क्राइम बढ़ने लगा है। बच्चे विभिन्न अपराधों में फंस रहे हैं, फेसबुक पर झूठी जानकारी पर विश्वास करके लालच में आ रहे हैं और अनजान लोगों के द्वारा भेजे जा रहे लिंक पर क्लिक करके क्राइम को बढ़ावा दे रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि बच्चे मानसिक रूप से विकसित नहीं हो पाते हैं, जितना की वह सोशल मीडिया के माध्यम से मोबाइल के जाल में फंस रहे हैं, इससे बच्चों की ग्रोथ रुक गई है, खेलना बच्चों ने बंद कर दिया है और मोबाइल के आदी होने से वर्तमान की युवा पीढ़ी खतरे की जद में आ गई है। कहा कि मोबाइल से बच्चे दूर रहें और अच्छे काम के लिए इसका इस्तेमाल करें। गेम की लत लगने से कई बच्चों की मौतें भी हो चुकी हैं। उन्हाेंने कहा कि नशा समाज में विकराल रूप धारण कर चुका है और छोटे-छोटे बच्चे भी इसमें शामिल हो गए हैं, जिससे उनका कॅरियर तबाह होकर रह गया है।
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उन्होंने नशे से बचने का आह्वान किया है और कहा है कि सभी बच्चे ट्रैफिक नियमों का पालन करें, अपने समाज में लोगों को जागरूक करें। एक साल में जितनी मौतें लोगों की बीमारी से नहीं हो रही हैं, जितनी रोड एक्सीडेंट की वजह से हो रही है और अपंग तो कितने हो रहे हैं, इसकी कोई भी गिनती नहीं है।
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धैर्य कंवर का कहना है कि कार्यक्रम से साइबर क्राइम के बारे में जानकारी मिली। इस तरह के कार्यक्रमों से समाज में जागरूकता आती है। अमर उजाला का कार्यक्रम सराहनीय है।
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राधिका ठाकुर ने कहा कि अगर समाज में नशा बढ़ रहा है तो सरकार को ऐसी चीजों को वैन कर देना चाहिए, जो कि समाज के लिए घातक हो रही हैं। तभी इस पर अंकुश लग सकता है।
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दिवनीत का कहना है कि शहर के चौक पर तो पुलिस के जवान ट्रैफिक व्यवस्था के लिए तैनात रहते हैं, लेकिन एनएच के साथ लगते स्कूलों में मार्गों को क्रॉस करने में बच्चों को दिक्कतें आती हैं। सरकार को भी इस दिशा में उचित कदम उठाने चाहिएं।
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इशप्रीत कौर का कहना है कि शातिरों को स्कैम करने के लिए मोबाइल नंबरों का कैसे पता चलता है। उन्होंने कहा कि अमर उजाला के कार्यक्रम से तमाम पहलुओं के बारे में जानकारी प्राप्त हुई।
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प्रिया शर्मा का कहना है कि अस्पतालों में भी लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं। उपचार करवाने के बाद भारी भरकम रकम अर्जित की जाती है। ऐसे में अमर उजाला के कार्यक्रम से जागरूक हुए हैं।
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अर्शिता का कहना है कि पुलिस की पाठशाला में पुलिस के साथ बच्चों का सीधे तौर पर संवाद होने से कई सवालों के जबाव मिले और समाज में भी लोगों को जागरूक करने का प्रण लिया।
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स्कूल प्रिंसिपल नीलम गुलेरिया का कहना है कि अमर उजाला फाउंडेशन का समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने और लोगों को ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से जागरूक करने का प्रयास सराहनीय है। इस तरह के कार्यक्रम से पुलिस विभाग की ओर से भ्रष्टचार, नशे, ट्रैफिक नियमों, महिला उत्पीड़न सहित कई मसलों पर चर्चा होने से जागरूकता बढ़ती है और बच्चों का भी मनोबल बढ़ता है। दूसरी ओर बातचीत करने में बच्चों की झिझक भी दूर होती है।

केवी स्कूल सलोह की छात्रा अर्शिता।संवाद

केवी स्कूल सलोह की छात्रा अर्शिता।संवाद

केवी स्कूल सलोह की छात्रा अर्शिता।संवाद

केवी स्कूल सलोह की छात्रा अर्शिता।संवाद

केवी स्कूल सलोह की छात्रा अर्शिता।संवाद

केवी स्कूल सलोह की छात्रा अर्शिता।संवाद

केवी स्कूल सलोह की छात्रा अर्शिता।संवाद

केवी स्कूल सलोह की छात्रा अर्शिता।संवाद

केवी स्कूल सलोह की छात्रा अर्शिता।संवाद