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Una News: पहली कक्षा में दाखिले पर साढ़े पांच वर्ष आयु की शर्त का विरोध
Sat, 06 Apr 2024 12:52 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Sat, 06 Apr 2024 12:52 AM IST
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अभिभावकों ने कहा- नई नीति से बच्चों का एक साल हो जाएगा बर्बाद
समस्या के हल को लेकर उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा से मिलकर सौंपा मांगपत्र
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले के समस्त सरकारी स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र 2024-25 की शुरुआत हो गई है। नए सत्र के लिए बच्चों के दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो गई है। छह साल की आयु पूर्ण करने वाले बच्चों को प्रथम कक्षा में दाखिला दिया जा रहा है, जिसका नर्सरी में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक विरोध कर रहे हैं। हालांकि दाखिले के लिए बच्चे की छह वर्ष की आयु पूर्ण करने में सरकार द्वारा छह माह की छूट भी दी गई है। यानी सितंबर 2024 तक छह वर्ष पूरी करने वाले बच्चों को दाखिला मिल रहा है। वहीं, अभिभावकों का तर्क है कि पहले पांच वर्ष की उम्र के बच्चे पहली कक्षा में दाखिला लेते थे, लेकिन अब साढ़े पांच या छह साल का बच्चा इसके लिए पात्र होगा।
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा नए शैक्षणिक सत्र 2024-25 के लिए छह वर्ष आयु पूर्ण कर चुके विद्यार्थियों का प्रथम कक्षा में दाखिल किया जा रहा है, जिसका में नर्सरी में पढ़ रहे बच्चों के अभिभावक विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि नए शैक्षणिक सत्र में सरकार ने प्रथम कक्षा में प्रवेश के लिए बच्चों की आयु सीमा पांच से बढ़ाकर छह वर्ष कर दी है, जिससे सरकारी स्कूलों में नर्सरी कक्षा पूर्ण कर चुके बच्चों का एक साल बर्बाद हो रहा है। उन्होंने बताया कि दो साल पहले जब नर्सरी कक्षा में बच्चों को दाखिल किया गया था, उस समय प्रथम कक्षा में प्रवेश के लिए बच्चों की आयु पांच वर्ष थी, जबकि अब छह वर्ष कर दी है। इससे नर्सरी कक्षा पूर्ण कर चुके बच्चों को प्रथम कक्षा में प्रवेश नहीं मिल पा रहा। ऐसे में इन बच्चों को दोबारा नर्सरी में रहना पड़ेगा, जिससे बच्चों का एक वर्ष पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगा। इसके अलावा अभिभावकों द्वारा बच्चों का परीक्षा शुल्क, बस किराया सब व्यर्थ हो जाएगा।
बता दें सरकार द्वारा इस बार प्रथम कक्षा में प्रवेश के लिए छह साल की आयु में छह माह की छूट दी गई है। इसके तहत 30 सितंबर 2024 तक छह वर्ष पूर्ण करने वाले बच्चे भी प्रथम कक्षा में प्रवेश के योग्य हैं। अभिभावकों में ईशा, अमरजीत सिंह, परमिंदर सिंह, मीना कुमारी, रजनीश कुमार, पूजा शर्मा, मनीश ठाकुर, प्रीति सैनी, संदीप कुमार, दीपक कुमार, वलवीर चंद का कहना है कि नई शिक्षा नीति को नर्सरी से ही लागू कर देना चाहिए।
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वहीं, प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक देवेन्द्र चंदेल का कहना है कि नई शिक्षा नीति को नर्सरी से ही लागू कर देना चाहिए, ताकि बच्चों का एक साल बर्बाद न हो।
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समस्या के हल को लेकर उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा से मिलकर सौंपा मांगपत्र
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले के समस्त सरकारी स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र 2024-25 की शुरुआत हो गई है। नए सत्र के लिए बच्चों के दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो गई है। छह साल की आयु पूर्ण करने वाले बच्चों को प्रथम कक्षा में दाखिला दिया जा रहा है, जिसका नर्सरी में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक विरोध कर रहे हैं। हालांकि दाखिले के लिए बच्चे की छह वर्ष की आयु पूर्ण करने में सरकार द्वारा छह माह की छूट भी दी गई है। यानी सितंबर 2024 तक छह वर्ष पूरी करने वाले बच्चों को दाखिला मिल रहा है। वहीं, अभिभावकों का तर्क है कि पहले पांच वर्ष की उम्र के बच्चे पहली कक्षा में दाखिला लेते थे, लेकिन अब साढ़े पांच या छह साल का बच्चा इसके लिए पात्र होगा।
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा नए शैक्षणिक सत्र 2024-25 के लिए छह वर्ष आयु पूर्ण कर चुके विद्यार्थियों का प्रथम कक्षा में दाखिल किया जा रहा है, जिसका में नर्सरी में पढ़ रहे बच्चों के अभिभावक विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि नए शैक्षणिक सत्र में सरकार ने प्रथम कक्षा में प्रवेश के लिए बच्चों की आयु सीमा पांच से बढ़ाकर छह वर्ष कर दी है, जिससे सरकारी स्कूलों में नर्सरी कक्षा पूर्ण कर चुके बच्चों का एक साल बर्बाद हो रहा है। उन्होंने बताया कि दो साल पहले जब नर्सरी कक्षा में बच्चों को दाखिल किया गया था, उस समय प्रथम कक्षा में प्रवेश के लिए बच्चों की आयु पांच वर्ष थी, जबकि अब छह वर्ष कर दी है। इससे नर्सरी कक्षा पूर्ण कर चुके बच्चों को प्रथम कक्षा में प्रवेश नहीं मिल पा रहा। ऐसे में इन बच्चों को दोबारा नर्सरी में रहना पड़ेगा, जिससे बच्चों का एक वर्ष पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगा। इसके अलावा अभिभावकों द्वारा बच्चों का परीक्षा शुल्क, बस किराया सब व्यर्थ हो जाएगा।
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बता दें सरकार द्वारा इस बार प्रथम कक्षा में प्रवेश के लिए छह साल की आयु में छह माह की छूट दी गई है। इसके तहत 30 सितंबर 2024 तक छह वर्ष पूर्ण करने वाले बच्चे भी प्रथम कक्षा में प्रवेश के योग्य हैं। अभिभावकों में ईशा, अमरजीत सिंह, परमिंदर सिंह, मीना कुमारी, रजनीश कुमार, पूजा शर्मा, मनीश ठाकुर, प्रीति सैनी, संदीप कुमार, दीपक कुमार, वलवीर चंद का कहना है कि नई शिक्षा नीति को नर्सरी से ही लागू कर देना चाहिए।
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वहीं, प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक देवेन्द्र चंदेल का कहना है कि नई शिक्षा नीति को नर्सरी से ही लागू कर देना चाहिए, ताकि बच्चों का एक साल बर्बाद न हो।