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Una News: 15 दिन बाद भी वनकाटुओं का सुराग नहीं, कार्रवाई पर उठे सवाल
Tue, 01 Sep 2026 12:17 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Tue, 01 Sep 2026 12:17 AM IST
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बड़ूही (ऊना)। रामगढ़ धार की खुरबाईं बीट के अमरोह क्षेत्र में पांच हरे खैर के पेड़ों के अवैध कटान को 15 दिन बीत चुके हैं लेकिन वनकाटुओं का अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
वन विभाग ने जंगल में झाड़ियों के बीच छिपाकर रखे खैर के करीब 20 मोछे तो बरामद कर लिए लेकिन पेड़ों को काटने वाले कौन थे, कहां से आए थे और कटान के बाद लकड़ी को जंगल से बाहर ले जाने की उनकी क्या योजना थी, इन सवालों के जवाब अभी भी जांच में ही उलझे हुए हैं।
मामले में वन विभाग की ओर से पुलिस चौकी जोल में शिकायत देने और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने की कार्रवाई की गई है। हालांकि 15 दिन बाद भी किसी आरोपी तक नहीं पहुंच पाने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। खास बात यह है कि विभाग के अनुसार पांच हरे खैर के पेड़ों के कटान से करीब 3.50 लाख रुपये के नुकसान का आकलन किया गया है।
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ग्रामीणों का कहना है कि यदि जंगल में रात के समय पांच हरे पेड़ काट दिए जाते हैं और उनकी लकड़ी को वहीं झाड़ियों में छिपा दिया जाता है, तो यह वन क्षेत्र की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
वन मंडलाधिकारी विकल्प यादव पहले ही कह चुके हैं कि अवैध कटान करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और पुलिस के सहयोग से आरोपियों तक पहुंचने के प्रयास जारी हैं।
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वन विभाग ने जंगल में झाड़ियों के बीच छिपाकर रखे खैर के करीब 20 मोछे तो बरामद कर लिए लेकिन पेड़ों को काटने वाले कौन थे, कहां से आए थे और कटान के बाद लकड़ी को जंगल से बाहर ले जाने की उनकी क्या योजना थी, इन सवालों के जवाब अभी भी जांच में ही उलझे हुए हैं।
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मामले में वन विभाग की ओर से पुलिस चौकी जोल में शिकायत देने और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने की कार्रवाई की गई है। हालांकि 15 दिन बाद भी किसी आरोपी तक नहीं पहुंच पाने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। खास बात यह है कि विभाग के अनुसार पांच हरे खैर के पेड़ों के कटान से करीब 3.50 लाख रुपये के नुकसान का आकलन किया गया है।
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ग्रामीणों का कहना है कि यदि जंगल में रात के समय पांच हरे पेड़ काट दिए जाते हैं और उनकी लकड़ी को वहीं झाड़ियों में छिपा दिया जाता है, तो यह वन क्षेत्र की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
वन मंडलाधिकारी विकल्प यादव पहले ही कह चुके हैं कि अवैध कटान करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और पुलिस के सहयोग से आरोपियों तक पहुंचने के प्रयास जारी हैं।